केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और सख्त करते हुए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत पाकिस्तान में रह रहे 23 व्यक्तियों को आधिकारिक तौर पर ‘आतंकवादी’ (Individual Terrorists) घोषित कर दिया है। इस फैसले के साथ इन व्यक्तियों के खिलाफ भारत में पहले से चल रही कानूनी कार्रवाई को और मजबूती मिलेगी तथा उनकी संपत्तियों को जब्त करने और उनके वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई का रास्ता भी आसान होगा।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इन व्यक्तियों पर भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों में शामिल होने, आतंकवादी संगठनों की सहायता करने, सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने, युवाओं की भर्ती कराने, आतंकियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने और देश की सुरक्षा के खिलाफ साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप हैं। मंत्रालय का कहना है कि उपलब्ध खुफिया जानकारी और जांच एजेंसियों के इनपुट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
सरकार के अनुसार, सूची में शामिल अधिकांश व्यक्ति पाकिस्तान से संचालित विभिन्न प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं। इन पर जम्मू-कश्मीर सहित भारत के विभिन्न हिस्सों में आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने, हथियार और विस्फोटक उपलब्ध कराने तथा सीमा पार से घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप है। इन व्यक्तियों की गतिविधियों पर लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियां नजर रख रही थीं।
UAPA की धारा 35 के तहत किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद उसकी भारत में मौजूद संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाई जा सकती है तथा उसके सहयोगियों और नेटवर्क के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ सहयोगी देशों और एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ा सकता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का उद्देश्य केवल कानूनी कार्रवाई करना नहीं बल्कि आतंकवाद के पूरे नेटवर्क और उसकी फंडिंग पर प्रभावी रोक लगाना भी है। पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार आतंकवाद के खिलाफ “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति के तहत लगातार प्रतिबंधित संगठनों और उनके सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करती रही है।
गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता के खिलाफ किसी भी प्रकार की गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में कठोर कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, UAPA के तहत किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने की प्रक्रिया कानून में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार की जाती है। संबंधित व्यक्ति के पास कानून के तहत उपलब्ध कानूनी उपायों का उपयोग करने का अधिकार भी होता है। वहीं जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर आगे की कार्रवाई करती हैं।
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है। सरकार का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग और सूचना साझा करना समय की आवश्यकता है। इसी दिशा में भारत विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है।
इस फैसले को भारत की आतंकवाद विरोधी नीति के तहत एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में जांच एजेंसियां इन व्यक्तियों से जुड़े नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और सहयोगियों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर सकती हैं।
