देशभर में चर्चित राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मेघालय सरकार ने मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि मेघालय हाईकोर्ट द्वारा जमानत बरकरार रखने के आदेश पर रोक लगाई जाए और मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत रद्द की जाए।
राज्य की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि सोनम रघुवंशी के खिलाफ हत्या की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप हैं और यदि वह जमानत पर बाहर रहती हैं तो उनके फरार होने या जांच एवं मुकदमे को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है।
यह मामला उस समय राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था जब इंदौर निवासी राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी शादी के कुछ दिनों बाद हनीमून मनाने मेघालय गए थे। दोनों 23 मई 2025 को लापता हो गए थे। कुछ दिनों बाद राजा का शव पूर्वी खासी हिल्स जिले के एक गहरे खाई क्षेत्र से बरामद हुआ, जबकि सोनम कई दिनों तक लापता रहने के बाद उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में मिली थीं। इसके बाद पुलिस जांच में मामला कथित हत्या की साजिश में बदल गया।
मेघालय पुलिस की जांच के अनुसार, सोनम रघुवंशी पर अपने पति की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि उन्होंने कथित रूप से अपने परिचित राज कुशवाहा और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई थी। जांच एजेंसी ने इस मामले में 700 से अधिक पन्नों की चार्जशीट भी अदालत में दाखिल की है, जिसमें डिजिटल साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई के बाद ही होगा।
इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को जमानत दी थी। अदालत का मानना था कि गिरफ्तारी के समय पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के आधार (Grounds of Arrest) स्पष्ट रूप से नहीं बताए गए और दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गलत धारा का उल्लेख किया गया था। बाद में मेघालय हाईकोर्ट ने भी इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए जमानत बरकरार रखी। हाईकोर्ट ने कहा था कि गिरफ्तारी संबंधी दस्तावेजों में बार-बार हुई त्रुटियों को केवल टाइपिंग की गलती कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मेघालय सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट ने प्रक्रिया संबंधी त्रुटियों को अत्यधिक महत्व दिया, जबकि मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। राज्य सरकार का तर्क है कि केवल तकनीकी आधार पर ऐसे गंभीर अपराध में आरोपी को राहत देना न्याय के हित में नहीं है। यही कारण है कि अब सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
दूसरी ओर, राजा रघुवंशी के परिवार ने भी पहले ही जमानत के फैसले पर असंतोष जताया था। परिवार का कहना है कि वे भी सुप्रीम कोर्ट में जमानत रद्द कराने की याचिका दायर करेंगे। परिजनों का आरोप है कि हत्या के मामले में मजबूत साक्ष्य मौजूद हैं और ऐसे में आरोपी को जमानत मिलने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट अब इस बात पर विचार करेगा कि क्या हाईकोर्ट द्वारा जमानत देने में कानून का सही अनुप्रयोग किया गया था या नहीं। शीर्ष अदालत यह भी देख सकती है कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में हुई कथित त्रुटियां इतनी गंभीर थीं कि उनके आधार पर जमानत उचित थी या मामले की प्रकृति को देखते हुए अलग दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
इस मामले ने देशभर में व्यापक चर्चा पैदा की है और लगातार मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है। हत्या की कथित साजिश, लंबी जांच, कई गिरफ्तारियां और अदालतों में चल रही सुनवाई ने इसे हाल के वर्षों के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल कर दिया है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर है, जहां यह तय होगा कि सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार रहेगी या उस पर रोक लगेगी।