भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर अपनी अत्याधुनिक उपग्रह तकनीक के जरिए देशभर में सक्रिय हो रहे मानसून की शानदार तस्वीरें साझा की हैं। अंतरिक्ष से ली गई इन सैटेलाइट तस्वीरों में भारत के बड़े हिस्से पर फैले घने वर्षा वाले बादल स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरों से पता चलता है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अब देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिय हो चुका है और आने वाले दिनों में कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
ISRO द्वारा जारी सैटेलाइट इमेज में अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर फैले विशाल बादलों का समूह साफ दिखाई दे रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह संकेत है कि मानसूनी सिस्टम पूरी तरह सक्रिय है और देश के मध्य, पश्चिमी, उत्तरी तथा पूर्वी राज्यों में बारिश की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इन तस्वीरों का उपयोग भारतीय मौसम विभाग (IMD) मौसम का सटीक पूर्वानुमान तैयार करने और समय रहते चेतावनी जारी करने के लिए भी करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक मौसम उपग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में होने वाले बदलावों पर लगातार नजर रखते हैं। बादलों की स्थिति, नमी, समुद्री सतह के तापमान, हवा की दिशा और वर्षा की तीव्रता जैसी जानकारियां इन्हीं उपग्रहों से प्राप्त होती हैं। यही आंकड़े मौसम वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करते हैं कि किस क्षेत्र में भारी बारिश, आंधी या बिजली गिरने की संभावना अधिक है।
ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार इस समय मानसूनी बादलों का घना समूह मध्य भारत, पश्चिमी तट, पूर्वोत्तर भारत और गंगा के मैदानी क्षेत्रों तक फैल चुका है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-एनसीआर सहित कई क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश होने की संभावना जताई गई है। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है।
भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि सक्रिय मानसून के कारण कई राज्यों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की जा सकती है। निचले इलाकों में जलभराव, शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम, नदियों के जलस्तर में वृद्धि और कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका भी जताई गई है। प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में सतर्क रहने और राहत-बचाव की तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
कृषि क्षेत्र के लिए यह मानसून काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समय पर और पर्याप्त बारिश होने से खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, बाजरा और दलहन जैसी फसलों को इस बारिश से लाभ मिल सकता है। हालांकि कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए खेती से जुड़े निर्णय लें, क्योंकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा फसलों को नुकसान भी पहुंचा सकती है।
ISRO के मौसम संबंधी उपग्रह देश में प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चक्रवात, भारी वर्षा, बाढ़, जंगल की आग और समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इन उपग्रहों का लगातार उपयोग किया जाता है। इनसे प्राप्त जानकारी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसियों, मौसम विभाग और राज्य सरकारों तक पहुंचाई जाती है, जिससे समय रहते लोगों को अलर्ट जारी किया जा सके।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का स्वरूप लगातार बदल रहा है। कई क्षेत्रों में कम समय में अत्यधिक बारिश और लंबे समय तक सूखे जैसी स्थितियां देखने को मिल रही हैं। ऐसे में सैटेलाइट आधारित निगरानी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। अंतरिक्ष से मिलने वाले वास्तविक समय (Real-Time) के आंकड़े मौसम पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
ISRO और भारतीय मौसम विभाग के बीच वर्षों से तकनीकी सहयोग जारी है। दोनों संस्थाएं मिलकर मौसम की निगरानी, आपदा प्रबंधन और जलवायु संबंधी अनुसंधान को मजबूत बना रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में नई पीढ़ी के मौसम उपग्रहों के जरिए और भी अधिक सटीक पूर्वानुमान संभव हो सकेगा।
फिलहाल अंतरिक्ष से सामने आई मानसून की इन तस्वीरों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश में बारिश का दौर अभी जारी रहेगा। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे भारी बारिश और खराब मौसम के दौरान जारी एडवाइजरी का पालन करें, अनावश्यक यात्रा से बचें तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों पर नजर बनाए रखें।
