भारत और जापान के बीच आयोजित इंडिया-जापान समिट 2026 में आर्थिक सहयोग, निवेश, व्यापार, तकनीकी विकास और रणनीतिक साझेदारी को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सम्मेलन के दौरान कहा कि जापान भारत में निवेश को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन चुका है। उन्होंने कहा कि जापानी कंपनियां भारत में विनिर्माण (Manufacturing), सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर, हरित ऊर्जा और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश करने में रुचि दिखा रही हैं।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘पीएलआई (Production Linked Incentive)’ और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसी नीतियों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। इसी कारण जापान समेत दुनिया की कई बड़ी कंपनियां भारत को अपने दीर्घकालिक निवेश केंद्र के रूप में देख रही हैं।
समिट के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत बनाने, महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की उपलब्धता, उन्नत प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर निर्माण, रक्षा उत्पादन, रेलवे आधुनिकीकरण और स्वच्छ ऊर्जा जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और जापान के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देश हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए भी मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए नियमित संवाद और संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
जापानी प्रतिनिधियों ने भी भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार, मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल मानव संसाधन और तेज आर्थिक विकास की सराहना की। उनका कहना था कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता रखता है। जापानी कंपनियां भारत में दीर्घकालिक निवेश की संभावनाओं का लगातार आकलन कर रही हैं।
बैठक में हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं, औद्योगिक कॉरिडोर, स्मार्ट सिटी विकास, हरित हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। दोनों देशों ने नवाचार, स्टार्टअप सहयोग और अनुसंधान एवं विकास (R&D) के क्षेत्र में संयुक्त पहल को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
भारत और जापान के बीच पिछले कई वर्षों में आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। जापान भारत के प्रमुख विदेशी निवेशकों में शामिल है और ऑटोमोबाइल, मेट्रो रेल, औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सेवाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में अरबों डॉलर का निवेश कर चुका है। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल और कई औद्योगिक परियोजनाएं दोनों देशों की मजबूत साझेदारी का उदाहरण हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और सप्लाई चेन में बदलाव के बीच भारत जापानी कंपनियों के लिए एक विश्वसनीय निवेश गंतव्य बनकर उभर रहा है। चीन पर निर्भरता कम करने की वैश्विक रणनीति के बीच भारत को विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में जापानी निवेश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि प्रस्तावित निवेश योजनाएं समयबद्ध तरीके से लागू होती हैं तो भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिलेगा और निर्यात क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत-जापान समिट 2026 को दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में कई नई परियोजनाओं, निवेश समझौतों और औद्योगिक साझेदारियों की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत हो सकते हैं।
