अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान को लेकर सामने आए कथित गबन के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है। मामले में एफआईआर दर्ज होने, आठ लोगों के खिलाफ कार्रवाई और जांच तेज होने के बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। यह विवाद केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
ताजा घटनाक्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर अयोध्या पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान की गिनती के दौरान कथित रूप से धन का गबन किया गया। पुलिस ने सभी आठ आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। इनमें छह लोग मंदिर परिसर में नकदी गिनने की जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मचारी बताए गए हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में कुछ आरोपियों की संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं। शुरुआती जांच में आरोप है कि दान पेटियों से निकाली गई नकदी की गिनती के दौरान कुछ रकम को कथित रूप से अलग किया गया। पुलिस अब सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, बैंक रिकॉर्ड, कैश लॉग और अन्य दस्तावेजों का मिलान कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित गड़बड़ी कितने समय से चल रही थी और इसकी वास्तविक राशि कितनी है।
रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती स्तर पर करोड़ों रुपये की कथित अनियमितता की आशंका जताई गई है। हालांकि जांच अभी जारी है और अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अंतिम राशि का निर्धारण विस्तृत ऑडिट और जांच पूरी होने के बाद ही किया जाएगा। इस बीच सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह के दावों के प्रसार के बाद प्रशासन ने लोगों से केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
पूरा विवाद उस समय सामने आया जब विपक्षी दलों ने मंदिर में चढ़ावे की राशि को लेकर सवाल उठाने शुरू किए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कथित दान गबन को “महापाप” बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने की बात कही।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक करार दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि मामला सामने आते ही जांच शुरू कर दी गई, एफआईआर दर्ज हुई और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। पार्टी का दावा है कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए शुरुआत से ही जांच की मांग की थी। ट्रस्ट का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के बीच उसने स्वयं सरकार से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया ताकि सच्चाई सामने आ सके और श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। ट्रस्ट ने कहा कि मंदिर में आने वाला प्रत्येक दान करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होता है और उसके प्रबंधन में किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार्य नहीं है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस टीम ने प्रारंभिक जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह कथित गबन किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था या कुछ व्यक्तियों तक ही सीमित था।
विशेषज्ञों का कहना है कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रतिदिन करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। ऐसे में पारदर्शी लेखा प्रणाली, डिजिटल रिकॉर्डिंग, नियमित ऑडिट, बैंकिंग निगरानी और सीसीटीवी मॉनिटरिंग बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उनका मानना है कि इस मामले के बाद देशभर के बड़े धार्मिक संस्थानों में दान प्रबंधन की प्रक्रिया की भी समीक्षा हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है क्योंकि विपक्ष सरकार और ट्रस्ट की जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है, जबकि भाजपा जांच प्रक्रिया को अपनी पारदर्शिता का उदाहरण बता रही है। इस बीच सबसे बड़ी चिंता करोड़ों श्रद्धालुओं की उस आस्था को लेकर है, जिसके कारण मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में लोग दान करते हैं।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि सभी वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाएगी। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाई जाएगी।
