अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और वाणिज्य मंत्री Howard Lutnick के बीच भारत के टैरिफ को लेकर हुई एक तीखी बहस का खुलासा सामने आया है। यह दावा एक नई किताब “Regime Change: Inside the Imperial Presidency of Donald Trump” में किया गया है, जिसे पत्रकार Maggie Haberman और Jonathan Swan ने लिखा है।
किताब के अनुसार, ट्रंप का मानना था कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर बेहद ऊंचे आयात शुल्क लगाता है। जब लुटनिक ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के आधिकारिक आंकड़े उनके सामने रखे, तो ट्रंप ने उन्हें खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें “गलत आंकड़े” दिए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप बार-बार इस बात पर जोर दे रहे थे कि भारत के टैरिफ आधिकारिक रिकॉर्ड से कहीं अधिक हैं।
बताया गया है कि ट्रंप का विश्वास था कि भारत द्वारा अमेरिकी वस्तुओं पर लगाए जाने वाले प्रभावी शुल्क 175 प्रतिशत या उससे भी अधिक हो सकते हैं। वहीं अमेरिकी प्रशासन के आधिकारिक आंकड़े इससे काफी कम थे। इसी मतभेद को लेकर दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हुई।
यह खुलासा ऐसे समय सामने आया है जब पिछले कुछ वर्षों में भारत-अमेरिका व्यापार संबंध कई बार टैरिफ विवादों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। ट्रंप प्रशासन लंबे समय से भारत को उच्च टैरिफ वाला देश बताता रहा है। व्हाइट हाउस की एक फैक्ट शीट में भी कहा गया था कि भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिकी उत्पादों पर सबसे ऊंचे शुल्क लगाने वाले देशों में शामिल है। कुछ कृषि उत्पादों पर औसत शुल्क 37 प्रतिशत तक और कुछ ऑटोमोबाइल श्रेणियों पर 100 प्रतिशत से अधिक बताया गया था।
हॉवर्ड लुटनिक भी पहले सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि भारत और चीन उन देशों में हैं जहां आयात शुल्क अपेक्षाकृत अधिक हैं। हालांकि उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि केवल टैरिफ होने से महंगाई बढ़ना जरूरी नहीं है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताओं में टैरिफ हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। दोनों देश कई दौर की बातचीत कर चुके हैं, लेकिन कृषि, डेयरी, रूसी तेल आयात और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर मतभेद बार-बार सामने आते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस किताब में सामने आए खुलासे ट्रंप प्रशासन के भीतर व्यापार नीति को लेकर होने वाली चर्चाओं और मतभेदों की झलक देते हैं। साथ ही यह भी दिखाते हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में टैरिफ का मुद्दा कितना महत्वपूर्ण रहा है।
फिलहाल इस खुलासे पर न तो व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है और न ही भारत सरकार ने इस विशेष दावे पर कोई टिप्पणी की है। लेकिन किताब में वर्णित यह घटना अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति के गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
