स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक (Bürgenstock) में ईरान और अमेरिका के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता का पहला दौर समाप्त हो गया है। दोनों देशों ने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए अगले 60 दिनों के भीतर एक व्यापक समझौते तक पहुंचने के लिए रोडमैप पर सहमति जताई है। वार्ता में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और लेबनान की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
1. 60 दिनों में अंतिम समझौते का रोडमैप
वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि दोनों पक्षों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक औपचारिक रोडमैप स्वीकार किया। इस दौरान तकनीकी स्तर की बातचीत लगातार जारी रहेगी।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए “कम्युनिकेशन लाइन”
ईरान और अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी सैन्य या नौसैनिक गलतफहमी से बचने के लिए एक विशेष “Communication Line” स्थापित करने पर सहमति दी है। इसका उद्देश्य व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
3. लेबनान के लिए “डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल”
दोनों देशों ने लेबनान में संघर्षविराम बनाए रखने और तनाव कम करने के लिए एक “De-Confliction Cell” बनाने का फैसला किया है। इसमें मध्यस्थ देशों की भूमिका भी होगी और इसका उद्देश्य इज़राइल-हिज़्बुल्लाह टकराव को नियंत्रित करना है।
4. परमाणु मुद्दों पर तकनीकी बातचीत जारी
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी प्रगति दर्ज की गई है। दोनों पक्षों ने तकनीकी स्तर पर विस्तृत चर्चा जारी रखने पर सहमति जताई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, निरीक्षण, संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) और भविष्य की निगरानी व्यवस्थाएं प्रमुख एजेंडा में शामिल हैं।
5. प्रतिबंधों में राहत और तेल निर्यात
ईरान ने दावा किया है कि तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर कई प्रतिबंधों में राहत देने, कुछ जमे हुए विदेशी फंड जारी करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर सकारात्मक प्रगति हुई है। हालांकि अमेरिकी पक्ष ने अभी तक इन सभी दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
6. मानवीय सहयोग और कैदी अदला-बदली
दोनों देशों ने मानवीय सहायता वितरण और संभावित कैदी अदला-बदली (Prisoner Swap) के लिए तंत्र विकसित करने पर भी चर्चा की। इसे विश्वास बहाली के कदम के रूप में देखा जा रहा है।
7. तनाव के बावजूद वार्ता जारी
वार्ता के दौरान कुछ समय के लिए तनाव भी पैदा हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुछ टिप्पणियों के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने आपत्ति जताई, लेकिन मध्यस्थ देशों पाकिस्तान और कतर के प्रयासों से बातचीत जारी रही।
