सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लगातार तीन कारोबारी सत्रों तक तेजी दिखाने के बाद मंगलवार को सोने की कीमतों में नरमी देखने को मिली। वहीं चांदी भी दबाव में नजर आई। वैश्विक बाजारों में बदले माहौल और निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते कीमती धातुओं की कीमतों में यह बदलाव देखने को मिला है। ऐसे में निवेशकों से लेकर शादी-ब्याह के लिए खरीदारी करने वालों तक, सभी की नजर आज के ताजा भावों पर बनी हुई है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान हल्की गिरावट दर्ज की गई। पिछले कारोबारी सत्र में 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1,52,916 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था। मंगलवार सुबह इसकी शुरुआत 1,52,891 रुपये प्रति 10 ग्राम पर हुई। कारोबार के दौरान सोने ने 1,53,161 रुपये का उच्चतम स्तर भी छुआ, लेकिन बाद में इसमें कमजोरी देखने को मिली और यह 1,52,825 रुपये तक फिसल गया।
सुबह लगभग 10:15 बजे सोना करीब 6 रुपये की मामूली गिरावट के साथ 1,52,910 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही, लेकिन पिछले तीन दिनों से लगातार जारी तेजी पर फिलहाल ब्रेक जरूर लग गया है।
चांदी की बात करें तो यहां भी दबाव देखने को मिला। पिछले कुछ सत्रों में चांदी ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया था, लेकिन मंगलवार को बाजार में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी कमोडिटी में लगातार तेजी आती है तो कई निवेशक लाभ बुक करने के लिए बिकवाली करते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।
बाजार जानकारों के अनुसार, सोने की कीमतों में आई नरमी का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते तथा क्षेत्रीय हालात में सुधार की खबरों ने वैश्विक निवेशकों की चिंता कुछ हद तक कम की है। आमतौर पर जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं। लेकिन जब हालात सामान्य होने लगते हैं तो सोने की मांग में कमी देखने को मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में शांति की संभावना बढ़ने से निवेशकों का रुझान एक बार फिर शेयर बाजार और जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर बढ़ सकता है। यही वजह है कि सोने की कीमतों में तेजी फिलहाल थमती हुई नजर आ रही है।
इसके अलावा डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां भी सोने की कीमतों पर असर डालती हैं। यदि अमेरिकी ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो सोने में निवेश अपेक्षाकृत कम आकर्षक हो सकता है। हालांकि अभी भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बनी हुई है, जिसके चलते सोने को लंबी अवधि में मजबूत सपोर्ट मिलने की संभावना जताई जा रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई हल्की गिरावट का असर भी कमोडिटी बाजार पर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल बाजार और सोने के बाजार के बीच अप्रत्यक्ष संबंध होता है। जब ऊर्जा बाजार में स्थिरता आती है तो निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ती है, जिसका असर सुरक्षित निवेश विकल्पों पर पड़ सकता है।
यदि सर्राफा बाजार की बात करें तो वहां भी सोने की कीमतों में हल्की नरमी दर्ज की गई है। हालांकि विभिन्न शहरों में स्थानीय कर, मांग और परिवहन लागत के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, कानपुर और अन्य प्रमुख शहरों में ज्वेलर्स ने सोने के दाम में मामूली कमी की पुष्टि की है। वहीं चांदी की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शादी-ब्याह के सीजन और त्योहारों से पहले सोने की मांग में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में से एक है और यहां सांस्कृतिक तथा धार्मिक कारणों से भी सोने की मांग बनी रहती है। ऐसे में कीमतों में थोड़ी गिरावट आने पर कई खरीदार बाजार में सक्रिय हो जाते हैं।
निवेशकों के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि सोने में और गिरावट आती है तो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह खरीदारी का अवसर बन सकता है। हालांकि अल्पकालिक निवेश करने वालों को वैश्विक घटनाक्रम, डॉलर की स्थिति, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंध, वैश्विक आर्थिक वृद्धि, केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरें और डॉलर इंडेक्स सोने-चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए विशेषज्ञ जल्दबाजी में निवेश निर्णय लेने के बजाय बाजार की चाल पर लगातार नजर रखने की सलाह दे रहे हैं।
फिलहाल तीन दिनों की लगातार तेजी के बाद सोने और चांदी की कीमतों में थोड़ी राहत देखने को मिली है। हालांकि लंबी अवधि के दृष्टिकोण से बाजार अभी भी कई अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित हो सकता है। ऐसे में खरीदारी करने से पहले ताजा रेट और बाजार के रुझान को समझना बेहद जरूरी है।
