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क्या 19 जून के समझौते के बाद ईरान को मिलेंगे जमे हुए अरबों डॉलर? JD Vance ने दी बड़ी सफाई

अमेरिका और ईरान के बीच 19 जून को प्रस्तावित समझौते पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव और संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच बनने जा रहे समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। लेकिन इस समझौते से जुड़ा सबसे […]

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद फ्रीज संपत्तियों पर चर्चा

अमेरिका और ईरान के बीच 19 जून को प्रस्तावित समझौते पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव और संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच बनने जा रहे समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। लेकिन इस समझौते से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान को उसके जमे हुए (Frozen) अरबों डॉलर के विदेशी फंड तक पहुंच मिल जाएगी?

इस सवाल पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने हाल ही में महत्वपूर्ण बयान दिया है। वेंस ने स्पष्ट किया कि केवल समझौते पर हस्ताक्षर हो जाने भर से ईरान को कोई पैसा नहीं मिलेगा। उनके अनुसार ईरान को किसी भी प्रकार की आर्थिक राहत या वैश्विक अर्थव्यवस्था में वापसी तभी मिलेगी जब वह समझौते में किए गए अपने सभी वादों को पूरा करेगा और उनका सत्यापन भी होगा।

वेंस ने कहा कि अमेरिका का संदेश साफ है—ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्वागत योग्य है, लेकिन केवल तभी जब वह अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े दायित्वों का पालन करे। उन्होंने कहा कि समझौता “वेरिफिकेशन आधारित” होगा और ईरान को पहले अपने कदम साबित करने होंगे।

आखिर कितने हैं ईरान के फ्रीज किए गए फंड?

वर्षों से लगाए गए अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान के अरबों डॉलर विभिन्न देशों और बैंकों में फंसे हुए हैं। विभिन्न आकलनों के अनुसार, दुनिया भर में ईरान की फ्रीज संपत्तियां 100 अरब डॉलर से अधिक भी हो सकती हैं, हालांकि वास्तविक रूप से उपलब्ध राशि को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं।

इनमें दक्षिण कोरिया, चीन, इराक, जापान और यूरोप के कुछ वित्तीय संस्थानों में जमा धन भी शामिल है। लंबे समय से तेहरान इन संपत्तियों तक पहुंच की मांग करता रहा है और यही मुद्दा हर बड़े अमेरिका-ईरान समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

ईरान क्या कह रहा है?

ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि समझौते के बाद प्रतिबंधों में राहत, आर्थिक नाकेबंदी में ढील और कुछ फंड तक पहुंच का रास्ता खुल सकता है। ईरान के सरकारी बयानों में यह भी दावा किया गया है कि भविष्य की वार्ताओं में जमे हुए धन और आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने पर चर्चा होगी।

हालांकि अमेरिका इस दावे को लेकर अधिक सतर्क दिखाई दे रहा है। वेंस ने कहा कि “ईरान को एक भी डॉलर सिर्फ हस्ताक्षर करने के बदले नहीं मिलेगा।” उन्होंने उन रिपोर्टों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि समझौते के तुरंत बाद अरबों डॉलर रिलीज कर दिए जाएंगे।

क्या किसी चरण में फंड अनफ्रीज हो सकते हैं?

यहीं से मामला दिलचस्प हो जाता है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भविष्य में चरणबद्ध (Phased) आर्थिक राहत संभव है। यदि ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के भंडार को खत्म करता है, अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण स्वीकार करता है और परमाणु हथियारों की दिशा में कोई गतिविधि नहीं करता, तो प्रतिबंधों में राहत और कुछ आर्थिक सुविधाएं दी जा सकती हैं।

कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि भविष्य में निवेश, व्यापार और वैश्विक वित्तीय प्रणाली तक पहुंच जैसे लाभ मिल सकते हैं। लेकिन यह सब प्रदर्शन-आधारित होगा, न कि केवल समझौते पर हस्ताक्षर करने से।

समझौते की सबसे बड़ी शर्त

अमेरिका का मुख्य फोकस ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर है। वेंस ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को समाप्त करे और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को पूर्ण पहुंच दे। इसके बाद ही दीर्घकालिक आर्थिक लाभों पर विचार किया जाएगा।

यानी 19 जून को होने वाला हस्ताक्षर अंतिम मंजिल नहीं बल्कि लंबी प्रक्रिया की शुरुआत माना जा रहा है। कई तकनीकी और राजनीतिक मुद्दों पर आगे भी बातचीत जारी रहेगी।

दुनिया क्यों देख रही है इस समझौते को?

इस समझौते का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल बाजार, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और पश्चिम एशिया की सुरक्षा इससे सीधे जुड़ी हुई है। यदि समझौता सफल रहता है तो तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है और वैश्विक व्यापार को राहत मिल सकती है।

भारत जैसे देशों के लिए भी यह महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से पूरा करता है। इसलिए ईरान को आर्थिक व्यवस्था में वापस लाने या प्रतिबंधों में ढील देने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

फिलहाल क्या स्थिति है?

अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार:

  • 19 जून के समझौते पर हस्ताक्षर होते ही ईरान को कोई तत्काल नकद भुगतान नहीं मिलेगा।
  • अमेरिका ने अरबों डॉलर तुरंत रिलीज होने की खबरों का खंडन किया है।
  • भविष्य में प्रतिबंधों में राहत और कुछ फंड तक पहुंच संभव है, लेकिन यह ईरान की अनुपालना और सत्यापन पर निर्भर करेगी।
  • समझौते का पूरा पाठ अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है और कई महत्वपूर्ण विवरणों पर बातचीत जारी है।

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