उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश, तेज आंधी और वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया है। ताजा पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के 65 से अधिक जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है, जबकि कई क्षेत्रों में 50 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। कुछ जिलों में ओलावृष्टि की चेतावनी भी जारी की गई है।
पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ था। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि गुरुवार रात कई इलाकों में मौसम ने अचानक करवट ली और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। इसके बाद तापमान में गिरावट आई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 से 48 घंटे तक इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है।
मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट के अनुसार लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी, बरेली, सीतापुर, रायबरेली, उन्नाव, बाराबंकी, बहराइच और आसपास के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में तेज हवाओं का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बदलाव के पीछे सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और वातावरण में बढ़ी नमी प्रमुख कारण हैं। यही प्रणाली उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश और आंधी का कारण बन रही है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश में भी तेज तूफान, बारिश और ओलावृष्टि की घटनाएं दर्ज की गई हैं। कुछ स्थानों पर हवाओं की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। ऑरेंज अलर्ट वाले क्षेत्रों में मौसम के अधिक गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। इनमें आगरा, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, एटा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, जालौन, झांसी और ललितपुर जैसे जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने लोगों को खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की सलाह दी है। वज्रपात के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग खुले स्थानों पर न करने और सुरक्षित भवनों में रहने की अपील की गई है। तेज हवाओं के कारण कमजोर होर्डिंग्स, टीन शेड और अस्थायी संरचनाओं को नुकसान पहुंच सकता है।
इस मौसम परिवर्तन का असर किसानों पर भी पड़ सकता है। एक तरफ बारिश से खेतों में नमी बढ़ेगी और खरीफ फसलों की तैयारी को मदद मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ तेज हवाएं और ओले सब्जियों, फलों और नर्सरी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे बीज, उर्वरक और कृषि उपकरणों को सुरक्षित स्थान पर रखें तथा खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखें।
खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले यह बारिश कई किसानों के लिए राहत भी लेकर आ सकती है। धान, मक्का, सोयाबीन और दलहनी फसलों की तैयारी कर रहे किसानों को मिट्टी में नमी मिलने से लाभ होगा। हालांकि मौसम विभाग ने जल्दबाजी में बुवाई न करने और स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।
राजधानी लखनऊ में भी मौसम सुहाना होने की संभावना जताई गई है। गुरुवार रात हुई बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो दिनों तक बादल छाए रहने, तेज हवाएं चलने और रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना बनी रहेगी।
दिल्ली-एनसीआर से सटे नोएडा और गाजियाबाद में भी मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। इन क्षेत्रों में 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जून के दूसरे पखवाड़े में मानसून की प्रगति और तेज हो सकती है। वर्तमान मौसम गतिविधियां इसी दिशा में संकेत दे रही हैं। यदि बारिश का यह क्रम जारी रहता है तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से नीचे रह सकता है और लोगों को लू से राहत मिलेगी। हालांकि मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि आंधी, बिजली और तेज हवाओं को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि ऐसी परिस्थितियां जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं।
फिलहाल उत्तर प्रदेश में मौसम पूरी तरह बदल चुका है। जहां कुछ दिन पहले लोग भीषण गर्मी से परेशान थे, वहीं अब बारिश और तेज हवाओं ने मौसम को सुहावना बना दिया है। लेकिन राहत के साथ सावधानी भी जरूरी है। मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा अलर्ट पर नजर बनाए रखना और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाना ही सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है।