देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। IIT विशेषज्ञों द्वारा किए गए सुरक्षा ऑडिट में CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से जुड़े कई सुरक्षा जोखिमों और तकनीकी कमजोरियों की पहचान की गई है। इस खुलासे के बाद छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह सिस्टम 2026 में कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल किया गया था।
CBSE ने इस वर्ष पहली बार बड़े पैमाने पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की थी। इसका उद्देश्य उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी, तेज और डिजिटल बनाना था। इसके तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर परीक्षकों के लिए उपलब्ध कराया गया। हालांकि परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं की गुणवत्ता, मूल्यांकन प्रक्रिया और तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, एक एथिकल हैकर द्वारा सामने लाई गई जानकारी के बाद IIT कानपुर और IIT मद्रास सहित विशेषज्ञों की टीम ने सिस्टम का ऑडिट किया। जांच में कुछ ऐसी कमजोरियां सामने आईं जिनके जरिए अनधिकृत पहुंच और संवेदनशील डेटा के जोखिम की आशंका जताई गई। हालांकि अब तक किसी बड़े डेटा दुरुपयोग या मार्क्स में बदलाव की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विशेषज्ञों ने इन खामियों को गंभीर माना है।
विवाद बढ़ने के बाद CBSE ने सुरक्षा समीक्षा शुरू की और OSM सिस्टम से जुड़े डेटा को बाहरी सर्वरों से हटाकर अपने नियंत्रण वाले सर्वरों पर स्थानांतरित करने का फैसला लिया। बोर्ड का कहना है कि इससे सुरक्षा और निगरानी दोनों को मजबूत किया जा सकेगा। साथ ही सिस्टम में मौजूद कमजोरियों को दूर करने के लिए तकनीकी सुधार भी किए गए हैं।
इस पूरे मामले के दौरान CBSE के पोर्टल को साइबर हमलों का भी सामना करना पड़ा। बोर्ड के अनुसार, जून के पहले सप्ताह में पोर्टल पर लाखों संदिग्ध अनुरोध और एक बड़े Denial-of-Service (DoS) हमले की कोशिश हुई थी। CBSE का दावा है कि तकनीकी टीमों ने समय रहते स्थिति को संभाल लिया और पोर्टल को चालू रखा।
वहीं दूसरी ओर, कई छात्रों और अभिभावकों ने री-इवैल्यूएशन पोर्टल को लेकर भी शिकायतें दर्ज कराईं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन मंचों पर छात्रों ने पोर्टल के धीमे होने, लॉगिन समस्याओं, उत्तर पुस्तिकाओं के डाउनलोड न होने और तकनीकी त्रुटियों की शिकायतें साझा कीं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सभी मामलों में नहीं हुई है, लेकिन इन शिकायतों ने OSM सिस्टम को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया।
CBSE ने अपने पक्ष में कहा है कि वास्तविक मूल्यांकन प्रणाली सुरक्षित रही और कई वायरल दावों में जिस पोर्टल का उल्लेख किया गया था, वह परीक्षण से जुड़ा प्लेटफॉर्म था। बोर्ड का कहना है कि छात्रों के अंकों और आधिकारिक मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े मुख्य सिस्टम पर कोई सफल साइबर हमला नहीं हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल CBSE तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल शिक्षा ढांचे के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत है। जैसे-जैसे परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम प्रणाली पूरी तरह ऑनलाइन होती जा रही है, वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और तकनीकी निगरानी की भूमिका भी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। IIT ऑडिट के बाद अब नजर इस बात पर है कि CBSE भविष्य में अपनी डिजिटल प्रणालियों को कितना मजबूत और सुरक्षित बना पाता है।