संसद के मानसून सत्र में NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी गतिरोध शुक्रवार को भी समाप्त नहीं हो सका। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा किया, जबकि सरकार ने बिना किसी पूर्व शर्त के इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने की पेशकश दोहराई। लगातार व्यवधान के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित रही।
विपक्ष का कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वह इस विषय पर हर स्तर की चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन संसद की कार्यवाही बाधित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के हित में नहीं है।
लगातार चौथे दिन बाधित हुई कार्यवाही
शुक्रवार को जैसे ही लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष से सदन चलने देने की अपील की और कहा कि सरकार पेपर लीक के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। इसके बावजूद हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।
सरकार ने बातचीत का दिया प्रस्ताव
संसदीय कार्य मंत्री और अन्य केंद्रीय नेताओं ने विपक्ष से आग्रह किया कि वह किसी पूर्व शर्त के बिना चर्चा में शामिल हो। सरकार का कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर संसद में सार्थक बहस होनी चाहिए और समाधान खोजने के लिए सभी दलों को सहयोग करना चाहिए।
विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा
विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिक मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में हुई कथित अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए। विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर लोकसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात कर गतिरोध समाप्त कराने की कोशिश की।
पेपर लीक पर सरकार के कदम
गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने और दोषियों के खिलाफ कानून को और अधिक सख्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। सरकार का कहना है कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द सजा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी प्रक्रिया मजबूत की जाएगी।
आगे क्या?
सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत के प्रयास जारी हैं, लेकिन अभी तक किसी साझा समाधान पर सहमति नहीं बन सकी है। यदि दोनों पक्ष अपने रुख में लचीलापन नहीं दिखाते हैं, तो मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी संसद की कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी। इस बीच, देशभर के छात्र और अभिभावक उम्मीद कर रहे हैं कि संसद में इस मुद्दे पर सार्थक चर्चा होगी और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने की दिशा में ठोस निर्णय लिए जाएंगे।