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करवाचौथ 2025: चांद क्यों माना जाता है सौभाग्य का प्रतीक?

करवाचौथ 2025: क्यों माना जाता है चंद्रमा को सौभाग्य का प्रतीक? जानिए देवी लक्ष्मी, सागर मंथन और शिव-पार्वती से संबंध हमारे दैनिक जीवन और अध्यात्म दोनों में चंद्रमाका विशेष स्थान है।बच्चों के लिए वह “चांद मामा” हैं, तो धर्मशास्त्रों में रहस्य, शीतलता और सौभाग्य के प्रतीक माने गए हैं।जैसे सूर्य देव को नारायण कहा गया […]

करवाचौथ 2025: क्यों माना जाता है चंद्रमा सौभाग्य का प्रतीक

करवाचौथ 2025: क्यों माना जाता है चंद्रमा को सौभाग्य का प्रतीक? जानिए देवी लक्ष्मी, सागर मंथन और शिव-पार्वती से संबंध

हमारे दैनिक जीवन और अध्यात्म दोनों में चंद्रमाका विशेष स्थान है।बच्चों के लिए वह “चांद मामा” हैं, तो धर्मशास्त्रों में रहस्य, शीतलता और सौभाग्य के प्रतीक माने गए हैं।जैसे सूर्य देव को नारायण कहा गया है, वैसे ही चंद्रदेव को सौम्य देवता कहा गया है।वेदों में उन्हें औषधियों के स्वामी, रसों के देवता और पुष्पों की आत्मा कहा गया है।इसीलिए करवाचौथ पर सुहागिन स्त्रियां चंद्रमा के दर्शन कर अपने सौभाग्य और दीर्घायु पति के लिए व्रत पूरा करती हैं।

चंद्रदेव: देवी लक्ष्मी और सागर मंथन से संबंध

स्कंद पुराण के अनुसार, चंद्रमा की उत्पत्ति सागर मंथन के दौरान हुई थी। देवी लक्ष्मी और चंद्रदेव दोनों समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए — इसलिए चंद्रमा को देवी लक्ष्मी का भाई और सौभाग्य का प्रतीक कहा गया है।जब ऋषि दुर्वासा के श्राप से इंद्रदेव ने अपना ऐश्वर्य खो दिया था, तब चंद्रदेव भी लुप्त हो गए थे।उनके लुप्त होने से धरती पर अंधकार और नकारात्मकता फैल गई। बाद में जब सागर मंथन से चंद्रमा का पुनर्जन्म हुआ,तो उनकी किरणों ने पुनः शांति, समृद्धि और सौभाग्य का प्रकाश फैलाया।तब से ही चंद्रमा को शुभता, प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

वेदों और पुराणों में चंद्रदेव की उत्पत्ति

ऋग्वेद में कहा गया है कि विराट पुरुष के मन से चंद्रमा की उत्पत्ति हुई —“चन्द्रमा मनसो जातः चक्षोः सूर्योजायत।”यानी उस भगवान विष्णु के मन से चंद्रमा और नेत्रों से सूर्य उत्पन्न हुए।वहीं शिव पुराण के अनुसार, शिव-पार्वती के आनंद तांडव से सूर्य भगवान शिव की आंखों की ऊर्जा से बने और चंद्रदेव देवी पार्वती की कांतिमान देह से उत्पन्न हुए।

चंद्रमा का आध्यात्मिक महत्व

चंद्रमा को मन का अधिपति और भावनाओं का संचालक कहा गया है।वह स्त्रियों के सौंदर्य, कोमलता और सौभाग्य के प्रतीक हैं।हिरण, खरगोश, मेमने जैसे कोमल जीवों की संरक्षक शक्ति भी चंद्रदेव ही हैं।वेदों में कहा गया है कि चंद्रदेव की किरणों से बनने वाला सोमरसदेवताओं का प्रिय अमृत है, जो औषधियों और जीवन की ऊर्जा का स्रोत है।

करवाचौथ पर चंद्रमा की पूजा क्यों की जाती है?

करवाचौथ के व्रत में स्त्रियां चंद्रमा को अपने पति के सौभाग्य और लंबी उम्र के लिए साक्षी बनाती हैं।क्योंकि चंद्रदेव स्वयं देवी लक्ष्मी के भाई और सौभाग्य के दाता देवता माने जाते हैं।उनकी शीतल किरणें वैवाहिक जीवन में प्रेम, शांति और समृद्धि लाने वाली मानी जाती हैं।

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