लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मतदान केंद्रों के पुनर्गठन को भारत निर्वाचन आयोग ने मंजूरी दे दी है। प्रदेश के सभी 75 जिलों की 403 विधानसभा क्षेत्रों में मतदेय स्थलों के संभाजन का प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद अब राज्य में बूथों की कुल संख्या घटकर 1,73,730 रह गई है। इससे पहले प्रदेश में 1,77,516 मतदेय स्थल थे। इस तरह पुनर्गठन के बाद कुल 3,786 बूथ कम हो गए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 4 नवंबर को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि बूथों का पुनर्गठन निर्धारित मानक के आधार पर किया गया है। इस प्रक्रिया में प्रत्येक मतदेय स्थल पर अधिकतम 1,200 मतदाताओं के मानक को ध्यान में रखा गया। जिलों से प्राप्त प्रस्तावों को भारत निर्वाचन आयोग के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया था, जिन्हें आयोग ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।
सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में बदली मतदान केंद्रों की व्यवस्था
उत्तर प्रदेश में मतदेय स्थलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया 16 अक्टूबर से शुरू की गई थी। इसके तहत सभी 75 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों से बूथों के निर्धारण और पुनर्गठन से संबंधित प्रस्ताव मांगे गए थे। जिलों से प्राप्त प्रस्तावों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत भारत निर्वाचन आयोग को भेजा गया। आयोग की मंजूरी के बाद अब प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में संशोधित बूथ व्यवस्था लागू होगी।
बूथों की संख्या में हुई यह कमी आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। निर्वाचन अधिकारियों के मुताबिक, मतदान केंद्रों का निर्धारण निर्धारित मतदाता संख्या के मानक के आधार पर किया गया है। अब मतदाता सूची के आगामी आलेख्य प्रकाशन और उससे जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया भी इन्हीं अनुमोदित मतदेय स्थलों के आधार पर पूरी की जाएगी।
1.73 लाख बूथों पर होगा मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन
प्रदेश में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027 यानी स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) की प्रक्रिया भी चल रही है। इस कार्यक्रम के लिए अर्हता तिथि 1 जनवरी 2027 निर्धारित की गई है। बूथों के पुनर्गठन को मंजूरी मिलने के बाद अब मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन प्रदेश के 1,73,730 अनुमोदित मतदेय स्थलों पर किया जाएगा।
इसका मतलब है कि मतदाता सूची के प्रारूप में नाम देखने, नामों से जुड़ी जानकारी की जांच करने और आवश्यक सुधार कराने की प्रक्रिया नई बूथ व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ेगी। मतदाताओं को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका नाम सही मतदाता सूची भाग और निर्धारित मतदान केंद्र से जुड़ा हुआ है।
बूथ बदलने पर BLO घर तक पहुंचाएंगे लिखित जानकारी
बूथों के पुनर्गठन के कारण जिन मतदाताओं के मतदान केंद्र बदले गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी देने की जिम्मेदारी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को सौंपी गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नए और अनुमोदित मतदेय स्थलों पर बीएलओ की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
जिन मतदाताओं का बूथ बदला है, उन्हें संबंधित बीएलओ के माध्यम से लिखित रूप में नए मतदेय स्थल की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि मतदाताओं को चुनाव के समय अपने मतदान केंद्र को खोजने में परेशानी न हो और वे समय रहते नए बूथ की जानकारी प्राप्त कर सकें।
इस पूरी प्रक्रिया की नियमित निगरानी बीएलओ सुपरवाइजर करेंगे। वहीं, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) को भी व्यवस्था का व्यक्तिगत रूप से सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे बूथ परिवर्तन की सूचना सही मतदाताओं तक पहुंचाने और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने में मदद मिलेगी।
एक परिवार के सभी सदस्यों के नाम एक ही मतदाता सूची भाग में रखने का निर्देश
बूथ पुनर्गठन के साथ निर्वाचन आयोग ने परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची में एक ही भाग में दर्ज रखने पर भी विशेष जोर दिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बीएलओ को निर्देश दिए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि एक परिवार के सभी पात्र सदस्यों के नाम एक ही मतदाता सूची भाग में दर्ज हों।
अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि एक ही परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग मतदाता सूची भागों या मतदान केंद्रों से जुड़े होते हैं। इससे मतदाताओं को मतदान के समय अपने-अपने बूथ की जानकारी लेने में असुविधा हो सकती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए परिवार के सभी सदस्यों के नाम एक ही सूची भाग में रखने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
निर्देशों के मुताबिक, यदि आलेख्य मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद किसी परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग मतदेय स्थलों या सूची भागों में दर्ज पाए जाते हैं, तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फॉर्म-8 के माध्यम से आवश्यक संशोधन कराया जाएगा। इसके लिए संबंधित मतदाता बीएलओ और निर्वाचन अधिकारियों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
राजनीतिक दलों को भी उपलब्ध कराई जाएगी बूथों की सूची
निर्वाचन आयोग ने बूथों के पुनर्गठन की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को भी शामिल करने के निर्देश दिए हैं। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को अनुमोदित मतदेय स्थलों की सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
इसके अलावा संबंधित क्षेत्रों में नए और परिवर्तित बूथों को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए गए हैं। निर्वाचन अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक मतदाता तक उसके नए मतदान केंद्र की जानकारी समय से पहुंचे। इससे चुनाव के दिन बूथ को लेकर भ्रम और अनावश्यक भागदौड़ की स्थिति से बचा जा सकेगा।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले अहम बदलाव
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में मतदेय स्थलों का पुनर्गठन और मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण चुनावी तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आयोग की मंजूरी के बाद अब नई बूथ व्यवस्था के आधार पर मतदाता सूची के आलेख्य प्रकाशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इस बदलाव का सीधा असर उन मतदाताओं पर पड़ सकता है, जिनके मतदान केंद्र या मतदाता सूची के भाग में परिवर्तन हुआ है। इसलिए मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे बीएलओ से मिलने वाली लिखित सूचना पर ध्यान दें और मतदाता सूची में अपने नाम तथा परिवार के अन्य सदस्यों की प्रविष्टियों की जांच करें।
फिलहाल निर्वाचन आयोग ने बूथों की संख्या घटाकर 1,73,730 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब जिला निर्वाचन अधिकारियों, बीएलओ और अन्य निर्वाचन अधिकारियों के सामने चुनौती होगी कि नई व्यवस्था की जानकारी हर मतदाता तक समय से पहुंचे, ताकि आगामी चुनाव में मतदान प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हो सके।