मुरादाबाद में गंगा उत्सव के दौरान हुई गंगा आरती, स्वयंसेवकों ने चलाया सफाई अभियान; 218वें साप्ताहिक अभियान के बीच प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर उठे सवाल
मुरादाबाद। रामगंगा नदी के तट पर जलते सैकड़ों दीप, गंगा आरती की गूंज और स्वच्छता का संदेश… गंगा उत्सव 2026 के अवसर पर मुरादाबाद में आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला। आयोजन ने एक ओर नदी और उससे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत के प्रति लोगों की भावनाओं को सामने रखा, तो दूसरी ओर रामगंगा की वास्तविक स्थिति और उसके संरक्षण को लेकर प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। कार्यक्रम में लोगों ने नदी को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया, लेकिन आयोजन के बीच यह सवाल भी प्रमुखता से उठा कि आखिर रामगंगा की सफाई और संरक्षण की जिम्मेदारी कब केवल सामाजिक संगठनों के प्रयासों से आगे बढ़कर सरकारी व्यवस्था की प्राथमिकता बनेगी?
परिवर्तन द चेंज संस्था और जिला गंगा समिति के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में संस्था के स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। आयोजन के दौरान रामगंगा घाट पर सफाई अभियान चलाया गया। लोगों ने नदी तट पर फैले कचरे और अन्य अपशिष्ट को हटाकर स्वच्छता का संदेश दिया। संस्था के मुताबिक, यह उसका 218वां साप्ताहिक स्वच्छता अभियान था। लगातार चल रहे इन प्रयासों के जरिए संस्था लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि नदी केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि शहर के पर्यावरण, जल संसाधन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ी हुई है।
कार्यक्रम में शाम का समय विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। रामगंगा तट पर दीप जलाए गए और गंगा आरती की गई। दीपों की रोशनी से घाट का वातावरण भक्तिमय हो उठा। आरती के दौरान लोगों ने नदी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ उसके संरक्षण और स्वच्छता का संकल्प भी लिया। आयोजन में शामिल लोगों का संदेश साफ था कि नदियों को केवल पर्व और उत्सव के अवसर पर याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सफाई और संरक्षण के लिए नियमित रूप से काम करना जरूरी है।
218 सप्ताह से जारी सफाई अभियान
परिवर्तन द चेंज संस्था लंबे समय से मुरादाबाद में रामगंगा नदी और उसके तट की सफाई के लिए अभियान चला रही है। संस्था की ओर से रविवार को नियमित रूप से स्वयंसेवकों के साथ नदी किनारे सफाई गतिविधियां आयोजित की जाती रही हैं। संस्था की सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, रामगंगा सफाई अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत 5 जून 2021 से लालबाग स्थित काली माता मंदिर के निकट नदी तट पर की गई थी। इसके तहत स्वयंसेवक नदी किनारे जमा कचरा एकत्र करते हैं और उसे नगर निगम की कचरा संग्रहण व्यवस्था तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
गंगा उत्सव के दौरान आयोजित 218वें अभियान ने इस निरंतरता को एक बार फिर सामने रखा। इतने लंबे समय तक किसी नदी की सफाई के लिए अभियान चलाना अपने आप में सामुदायिक भागीदारी का उदाहरण है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि ऐसे अभियानों का असर केवल कार्यक्रम स्थल तक सीमित न रहे। नदी में गिरने वाले नालों, घरेलू अपशिष्ट, प्लास्टिक और अन्य प्रदूषणकारी तत्वों पर नियंत्रण के लिए व्यापक व्यवस्था की आवश्यकता होती है। जब तक प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी रोक नहीं लगेगी, तब तक घाटों की सफाई के प्रयास नदी की पूरी समस्या का समाधान नहीं कर पाएंगे।
कार्यक्रम संयोजक ने दिया जनभागीदारी का संदेश
कार्यक्रम संयोजक प्रीति सिंह ने नदी संरक्षण और स्वच्छता के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नदियों को स्वच्छ रखना केवल किसी एक विभाग, संस्था या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें समाज के प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है। विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सामुदायिक कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक कपिल कुमार और जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ), नमामि गंगे पूजा सिन्हा ने भी नदियों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं का संदेश था कि नदी को केवल धार्मिक महत्व के नजरिए से देखने के बजाय उसके प्राकृतिक स्वरूप, जल गुणवत्ता और पर्यावरणीय महत्व को भी समझना होगा। यदि समाज नदी को अपनी साझा धरोहर मानेगा, तभी उसके संरक्षण के लिए स्थायी जनआंदोलन तैयार हो सकेगा।
कार्यक्रम में जिला गंगा समिति के नामित सदस्य प्रदीप सक्सेना, मंदिर के पुजारी और स्थानीय पार्षद प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। आयोजन के दौरान स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को लेकर चर्चा हुई। विद्यार्थियों और नागरिकों की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि नई पीढ़ी को भी नदी संरक्षण के प्रयासों से जोड़ना जरूरी है।
सवाल केवल घाट की सफाई का नहीं, नदी को प्रदूषण से बचाने का है
रामगंगा घाट पर सफाई अभियान और दीपोत्सव के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल नदी की वास्तविक स्थिति को लेकर है। घाट पर जमा कचरा हटाना जरूरी है, लेकिन नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए उससे कहीं व्यापक प्रयासों की जरूरत है। नदी में गिरने वाले नालों, सीवर के पानी, ठोस कचरे और अन्य अपशिष्ट के प्रवाह को नियंत्रित किए बिना स्वच्छता का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए नगर निगम, जलकल विभाग, प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय जरूरी है।
रामगंगा के प्रदूषण को रोकने के लिए सरकारी स्तर पर भी परियोजनाएं प्रस्तावित और संचालित हैं। उत्तर प्रदेश जल जीवन मिशन के नमामि गंगे संबंधी आधिकारिक पोर्टल पर मुरादाबाद में रामगंगा प्रदूषण नियंत्रण के लिए जोन-3 और जोन-4 में नालों के इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ी परियोजना का उल्लेख है। मई 2025 में स्वीकृत इस परियोजना में 15 एमएलडी और 65 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तथा उनसे संबंधित कार्य शामिल हैं। पोर्टल पर 13 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना की निविदा प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी और वित्तीय जांच आगे बढ़ रही थी।
यह जानकारी बताती है कि रामगंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए बुनियादी ढांचे से जुड़े काम भी जरूरी हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तभी प्रभावी साबित होंगे, जब शहर के नालों को व्यवस्थित तरीके से उनसे जोड़ा जाए, उपचारित पानी निर्धारित मानकों के अनुरूप हो और संचालन एवं रखरखाव की नियमित निगरानी की जाए। इसके साथ ही नदी में कचरा डालने पर रोक, घाटों की नियमित सफाई और नागरिकों के बीच जागरूकता अभियान भी लगातार चलाने होंगे।
स्थानीय निकाय और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल
गंगा उत्सव के दौरान उठे सवालों का एक अहम पक्ष स्थानीय निकायों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका से जुड़ा है। सामाजिक संस्थाएं और स्वयंसेवक अपने स्तर पर लगातार सफाई अभियान चला रहे हैं, लेकिन नदी संरक्षण का स्थायी समाधान केवल स्वयंसेवी प्रयासों से संभव नहीं है। शहर में कचरा प्रबंधन, नालों की सफाई, सीवर व्यवस्था, नदी किनारे अतिक्रमण और अपशिष्ट के निस्तारण जैसे विषयों पर संबंधित सरकारी विभागों की स्पष्ट जिम्मेदारी बनती है।
नगर निगम को यह सुनिश्चित करना होगा कि नदी और घाटों के आसपास कचरा जमा न हो। नालों के माध्यम से नदी में पहुंचने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना बनानी होगी। जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि अलग-अलग विभागों के कार्यों की समीक्षा करे और परियोजनाओं की प्रगति को सार्वजनिक जवाबदेही से जोड़े। वहीं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी नदी संरक्षण के मुद्दे को केवल आयोजनों और भाषणों तक सीमित रखने के बजाय नियमित रूप से उठाना चाहिए।
रामगंगा के किनारे रहने वाले लोगों के लिए नदी का महत्व धार्मिक और सांस्कृतिक होने के साथ-साथ पर्यावरणीय भी है। नदी के तट पर गंदगी, दुर्गंध या प्रदूषण की समस्या केवल दृश्य सुंदरता को प्रभावित नहीं करती, बल्कि आसपास के वातावरण और लोगों के जीवन पर भी असर डाल सकती है। इसलिए नदी संरक्षण को शहर की बुनियादी नागरिक सुविधाओं और पर्यावरणीय स्वास्थ्य से जोड़कर देखना जरूरी है।
आस्था के साथ वैज्ञानिक और प्रशासनिक प्रयास भी जरूरी
गंगा उत्सव जैसे आयोजन समाज में नदी के प्रति भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करते हैं। दीप जलाना, आरती करना और सामूहिक सफाई अभियान में भाग लेना लोगों को नदी से जोड़ने के प्रभावी माध्यम हैं। लेकिन नदी की स्वच्छता का मूल्यांकन केवल घाटों की सुंदरता या किसी एक दिन आयोजित कार्यक्रम से नहीं किया जा सकता। इसके लिए नदी के पानी की गुणवत्ता, प्रदूषण के स्रोतों, सीवर के प्रवाह और सफाई परियोजनाओं की प्रगति की नियमित निगरानी जरूरी है।
नमामि गंगे और जिला गंगा समिति जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य भी नदी संरक्षण को संस्थागत रूप देना है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह स्पष्ट होना चाहिए कि मुरादाबाद में रामगंगा के किन हिस्सों में प्रदूषण की समस्या अधिक है, कौन से नाले नदी में गिर रहे हैं, उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और सीवेज ट्रीटमेंट से जुड़ी परियोजनाओं की समयसीमा क्या है। इन सवालों पर नियमित और पारदर्शी जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचनी चाहिए।
विद्यार्थियों और युवाओं की भागीदारी को भी केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से नदी संरक्षण को लेकर नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं। स्थानीय नागरिकों को कचरा नदी में न डालने, धार्मिक सामग्री के उचित निस्तारण और घाटों को साफ रखने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई भी जरूरी है।
दीपोत्सव के बाद भी जारी रहनी चाहिए जवाबदेही
रामगंगा तट पर जले सैकड़ों दीपों ने गंगा उत्सव 2026 को यादगार बनाया। गंगा आरती और स्वच्छता अभियान ने लोगों को नदी के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराया। परिवर्तन द चेंज संस्था का 218वां साप्ताहिक अभियान यह भी दिखाता है कि नागरिक भागीदारी के जरिए लंबे समय तक प्रयास जारी रखे जा सकते हैं। लेकिन नदी की स्थायी स्वच्छता के लिए इन प्रयासों के साथ सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और विभागीय जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रामगंगा तट पर जले ये दीप केवल एक दिन के उत्सव की रोशनी बनकर रह जाएंगे या इनके जरिए नदी संरक्षण को लेकर कोई स्थायी पहल भी आगे बढ़ेगी? क्या नगर निगम और संबंधित विभाग नदी में पहुंचने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे? क्या जिला प्रशासन सीवेज और सफाई परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर उनकी प्रगति जनता के सामने रखेगा?
रामगंगा को स्वच्छ रखने के लिए सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन उन्हें सरकारी जिम्मेदारियों का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। नदी की सफाई तभी स्थायी होगी, जब जनभागीदारी, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक प्रबंधन एक साथ काम करेंगे। गंगा उत्सव का असली संदेश भी यही है कि नदी के प्रति आस्था केवल आरती और दीपों तक सीमित न रहे, बल्कि उसके पानी, तट और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के रूप में दिखाई दे।