अयोध्या। राजर्षि दशरथ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, दर्शननगर में मरीज के ऑपरेशन के नाम पर अवैध वसूली और इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप सामने आया है। बस्ती जिले के एक गरीब परिवार ने मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों पर जांच के नाम पर ऑपरेशन टालने और जरूरी सामान बाहर से खरीदने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि अस्पताल में सामान उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदारी करने को कहा गया। मेडिकल स्टोर पर ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले सामान की कीमत करीब पांच हजार रुपये बताई गई, जिसे सुनकर परिवार के होश उड़ गए। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार ने सामान खरीदने से इनकार कर दिया। इसके बाद से ऑपरेशन की तारीख लगातार आगे बढ़ाए जाने का आरोप लगाया गया है।
प्राचार्य को प्रार्थना पत्र देकर लगाई न्याय की गुहार
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम जोगापुर, जिला बस्ती निवासी विनोद कुमार गुप्ता ने राजर्षि दशरथ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की शिकायत की है। उन्होंने बताया कि उनके ससुर अमृतलाल प्रसाद पीलिया और शुगर की समस्या से पीड़ित हैं। उनका मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है और डॉक्टरों ने ऑपरेशन की जरूरत बताई है।
विनोद कुमार गुप्ता का आरोप है कि मरीज के ऑपरेशन से पहले कई दिनों तक अलग-अलग जांच के नाम पर प्रक्रिया आगे बढ़ती रही। कुछ जांचें मेडिकल कॉलेज के बाहर निजी लैब से कराने के लिए कहा गया। परिवार का कहना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने का उद्देश्य कम खर्च में बेहतर उपचार पाना था, लेकिन बाहर जांच और सामान खरीदने की बात से उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ गई।
ऑपरेशन के सामान के लिए मेडिकल स्टोर भेजने का आरोप
शिकायतकर्ता के मुताबिक ऑपरेशन के लिए जरूरी सामान अस्पताल में उपलब्ध होने के बावजूद मरीज के परिजनों को बाहर से खरीदने के लिए कहा गया। आरोप है कि संबंधित डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित एक मेडिकल स्टोर का नाम बताते हुए वहीं से सामान लाने को कहा था।
परिजन जब बताए गए मेडिकल स्टोर पर पहुंचे तो उन्हें सामान की कीमत करीब पांच हजार रुपये बताई गई। परिवार के लिए यह रकम जुटाना मुश्किल था। इतनी बड़ी राशि सुनकर परिजनों ने सामान खरीदने से इनकार कर दिया। परिवार का सवाल है कि जब ऑपरेशन के लिए जरूरी सामग्री अस्पताल में उपलब्ध है, तो उन्हें बाहर से सामान खरीदने के लिए क्यों कहा गया?
पीड़ित परिवार का आरोप है कि सामान नहीं खरीद पाने के कारण ऑपरेशन की तारीख लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। इससे मरीज के इलाज में देरी हो रही है और परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रशासन या संबंधित डॉक्टरों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
गरीब परिवार ने जताई मरीज की हालत बिगड़ने की चिंता
विनोद कुमार गुप्ता ने प्राचार्य को दिए गए प्रार्थना पत्र में अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि उनका परिवार बेहद गरीब है और निजी खर्च पर जांच तथा ऑपरेशन का सामान खरीदना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मरीज पहले से पीलिया और शुगर जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में ऑपरेशन में देरी होने से परिवार की चिंता लगातार बढ़ रही है।
परिवार का कहना है कि मरीज की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ रही है और उन्हें जल्द उपचार की आवश्यकता है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने के बावजूद यदि जरूरी सामान बाहर से खरीदना पड़े और आर्थिक मजबूरी के कारण इलाज प्रभावित हो, तो गरीब मरीजों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाता है।
प्राचार्य से जांच और कार्रवाई की मांग
पीड़ित विनोद कुमार गुप्ता ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि मरीज का ऑपरेशन जल्द कराया जाए और यह पता लगाया जाए कि अस्पताल में उपलब्ध होने के बावजूद जरूरी सामान बाहर से खरीदने के लिए क्यों कहा गया।
परिवार ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में किसी डॉक्टर या कर्मचारी की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को सरकारी चिकित्सा सुविधाओं का लाभ बिना किसी अतिरिक्त दबाव या अनावश्यक खर्च के मिल सके।
फिलहाल इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि प्राचार्य की ओर से शिकायत पर क्या कदम उठाए जाते हैं और मरीज को समय पर ऑपरेशन की सुविधा मिल पाती है या नहीं।