पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने एक बयान को लेकर चर्चा में आ गए हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह राज्य की कानून-व्यवस्था पर बात करते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं कि बिहार में ‘क्राइम’ हो सकता है, लेकिन ‘अपराध’ नहीं। मुख्यमंत्री के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक बहस छेड़ दी है। विपक्ष ने इसे विरोधाभासी बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है, वहीं सोशल मीडिया यूजर्स भी इस टिप्पणी को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
क्या कहा मुख्यमंत्री ने?
वायरल वीडियो में सम्राट चौधरी कहते सुनाई दे रहे हैं, “हमारे यहां कोई अपराध नहीं है। अपराध का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो चुका है। क्राइम हो सकते हैं, लेकिन अपराध नहीं। कोई अपराधी नहीं है।” उनका यह बयान दिल्ली में बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच हुए एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया। इस कार्यक्रम में नदी जल प्रबंधन से जुड़े समझौते पर भी चर्चा हुई थी।
मुख्यमंत्री की टिप्पणी का वीडियो सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा ‘क्राइम’ और ‘अपराध’ शब्दों को लेकर हो रही है। हिंदी में अपराध और अंग्रेजी में क्राइम का अर्थ एक ही होता है। ऐसे में मुख्यमंत्री के बयान को कई लोग विरोधाभासी बता रहे हैं। सवाल उठाए जा रहे हैं कि जब दोनों शब्दों का मतलब एक ही है, तो इनके बीच अंतर किस आधार पर किया गया?
तेजस्वी यादव ने भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री के बयान पर बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए तंज कसा कि बिहार में ‘क्राइम’ हो सकता है, लेकिन ‘अपराध’ नहीं। तेजस्वी ने मुख्यमंत्री के बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा और मंच पर मौजूद अधिकारियों को लेकर सवाल उठाए।
तेजस्वी यादव ने अपनी पोस्ट में मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप भी लगाए। हालांकि, उनके पोस्ट में लगाए गए आरोप राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं, उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस खबर का विषय नहीं है। मुख्यमंत्री के बयान और तेजस्वी की प्रतिक्रिया के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
बयान से क्यों उठे सवाल?
दरअसल, ‘क्राइम’ अंग्रेजी का शब्द है, जबकि ‘अपराध’ उसका हिंदी अर्थ है। दोनों का मतलब एक ही है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह कहना कि क्राइम हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं, लोगों को हैरान कर रहा है। सोशल मीडिया पर यूजर्स इस बयान को लेकर व्यंग्य कर रहे हैं। कुछ लोग इसे शब्दों का विरोधाभास बता रहे हैं, तो कुछ इसे सरकार के कानून-व्यवस्था संबंधी दावों से जोड़कर देख रहे हैं।
इससे पहले भी बिहार के एक शिक्षा मंत्री का छात्राओं से जुड़ा बयान चर्चा में आया था। छात्राओं को दसवीं कक्षा तक पहुंचने का आशीर्वाद देने और उनके पहले से हाईस्कूल में पढ़ने की बात सामने आने के बाद उस बयान पर भी सवाल उठे थे। अब मुख्यमंत्री के ताजा बयान ने एक बार फिर बीजेपी नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर बहस को हवा दे दी है।
सोशल मीडिया पर तंज, सियासत में चर्चा
मुख्यमंत्री के बयान पर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जब क्राइम और अपराध का अर्थ एक ही है, तो बिहार में दोनों के बीच यह अंतर कैसे किया जा सकता है? विपक्षी दल भी इस मुद्दे को सरकार की कानून-व्यवस्था संबंधी समझ और दावों पर सवाल उठाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री के बयान का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। उनका संबोधन बिहार में विकास, नदी जल प्रबंधन और राज्य की चुनौतियों से जुड़ा था। इसी दौरान कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने अपराध का कॉन्सेप्ट खत्म होने की बात कही। फिलहाल इस बयान को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से कोई अलग स्पष्टीकरण सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है।
बिहार की राजनीति में यह मामला अब केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्ष इसे सरकार को घेरने के लिए इस्तेमाल कर रहा है, जबकि सोशल मीडिया पर लोग शब्दों के इस कथित अंतर को लेकर लगातार तंज कस रहे हैं। इसी कड़ी में एक टिप्पणी खूब चर्चा में है—“चिड़िया चुनती है दानों को, बीजेपी चुनती है नादानों को।” हालांकि यह सोशल मीडिया पर किया जा रहा राजनीतिक व्यंग्य है, कोई तथ्यात्मक निष्कर्ष नहीं।