“UP Vigilance Action: उत्तर प्रदेश के झांसी और आगरा में विजिलेंस टीम ने दो जूनियर इंजीनियर और एक संविदाकर्मी को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। बांदा में एक लाख और आगरा में 10 हजार रुपये की घूस लेते आरोपी रंगे हाथ पकड़े गए।“
झांसी/आगरा। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। झांसी और आगरा में अलग-अलग मामलों में दो जूनियर इंजीनियर (जेई) और एक संविदाकर्मी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। झांसी विजिलेंस की टीम ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बांदा स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात जेई सलमान को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा। आरोप है कि वह ग्रेनाइट प्लांट संचालक से नोटिस पर कार्रवाई नहीं करने के बदले रकम मांग रहा था। वहीं आगरा में बिजली विभाग के जेई विनेश यादव और उसके साथ काम करने वाले संविदाकर्मी लोकेंद्र सिंह को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। दोनों पर नए बिजली कनेक्शन के नाम पर घूस मांगने का आरोप है।
बांदा में नोटिस पर कार्रवाई रोकने के लिए मांगे थे एक लाख रुपये
झांसी विजिलेंस की टीम ने सोमवार, 2 नवंबर को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय बांदा में तैनात जूनियर इंजीनियर सलमान को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। शिकायतकर्ता ग्रेनाइट प्लांट संचालक ने विजिलेंस से संपर्क कर आरोप लगाया था कि जेई नोटिस पर कार्रवाई नहीं करने के बदले उससे एक लाख रुपये की मांग कर रहा है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, 18 जून 2026 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय की ओर से उसे व्हाट्सएप पर नोटिस भेजा गया था। उसका आरोप था कि बिना किसी सर्वे के यह नोटिस जारी किया गया। इसके बाद उसे क्षेत्रीय कार्यालय बुलाया गया, जहां क्षेत्रीय अधिकारी माधवी कमलवंशी से मुलाकात के बाद उसे जेई सलमान के पास भेजा गया।
आरोप है कि जेई ने नोटिस पर आगे की कार्रवाई नहीं करने के एवज में एक लाख रुपये मांगे। जब प्लांट संचालक ने रकम कम करने की बात कही तो जेई ने कथित तौर पर साफ कर दिया कि इससे कम पैसे में काम नहीं होगा।
गोपनीय जांच के बाद विजिलेंस ने बिछाया जाल
ग्रेनाइट प्लांट संचालक ने इस मामले में झांसी विजिलेंस के सामने शिकायती पत्र दिया था। शिकायत मिलने के बाद टीम ने गोपनीय जांच कराई। जांच में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई।
इसके बाद 2 नवंबर को शिकायतकर्ता को एक लाख रुपये देने के लिए भेजा गया। जैसे ही जेई सलमान ने रिश्वत की रकम ली, पहले से तैयार विजिलेंस टीम ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आरोपी के खिलाफ बांदा शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
आगरा में नए बिजली कनेक्शन के नाम पर मांगी 10 हजार की घूस
उधर, आगरा में भी विजिलेंस टीम ने बिजली विभाग के अवर अभियंता और एक संविदाकर्मी को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। दोनों आरोपी फतेहाबाद खंड के विद्युत उपखंड शमसाबाद में तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने नए बिजली कनेक्शन के लिए 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
शमसाबाद निवासी अर्जुन ने विजिलेंस को दी शिकायत में बताया कि उसने अपने नए मकान में बिजली कनेक्शन के लिए 24 अक्टूबर को आवेदन किया था। इसके बाद कनेक्शन जारी करने से पहले स्थल निरीक्षण के लिए आए कर्मचारियों ने उसे जेई विनेश यादव से मिलने को कहा।
अर्जुन के मुताबिक, जब उसने जेई से संपर्क किया तो उससे कनेक्शन जारी करने के बदले 10 हजार रुपये मांगे गए। आरोप था कि रकम दिए बिना बिजली कनेक्शन नहीं मिलेगा। शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण उसका कनेक्शन भी नहीं हो सका।
संविदाकर्मी करता था जेई के एजेंट का काम
शिकायत मिलने के बाद आगरा विजिलेंस ने भी गोपनीय जांच कराई। शुरुआती जांच में जेई के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर कार्रवाई की तैयारी की गई। विजिलेंस टीम ने शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम देने के लिए भेजा और पहले से जाल बिछाकर निगरानी शुरू कर दी।
एसपी विजिलेंस राजकुमार अग्रवाल के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान जेई विनेश यादव के साथ संविदाकर्मी लोकेंद्र सिंह भी पकड़ में आ गया। आरोप है कि लोकेंद्र सिंह क्षेत्र में जेई के एजेंट के रूप में काम करता था और रिश्वत की रकम लेकर उसे देता था।
शिकायतकर्ता की ओर से रकम दिए जाने के बाद विजिलेंस टीम ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज
आगरा विजिलेंस ने जेई विनेश यादव और संविदाकर्मी लोकेंद्र सिंह के खिलाफ विजिलेंस थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। वहीं बांदा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जेई सलमान के खिलाफ शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
दोनों जिलों में हुई इन कार्रवाइयों ने सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के मामलों को फिर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ बांदा में नोटिस पर कार्रवाई रोकने के लिए एक लाख रुपये मांगे जाने का आरोप है, तो दूसरी तरफ आगरा में आम नागरिक से बिजली कनेक्शन जारी करने के नाम पर 10 हजार रुपये की घूस मांगी गई। विजिलेंस की कार्रवाई के बाद अब दोनों मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
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