अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में 7 नवंबर को आयोजित होने वाले दसवें दीपोत्सव-2026 को भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सरयू तट स्थित राम की पैड़ी और आसपास के घाटों पर दीप सज्जा से लेकर स्वयंसेवकों की तैनाती तक का काम तेजी से चल रहा है। इसी क्रम में डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने दीपोत्सव स्थल का सघन निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने विभिन्न घाटों पर दीपों के लिए तैयार किए जा रहे लेआउट, निर्धारित मानकों और व्यवस्थाओं को बारीकी से देखा। जहां आवश्यक सुधार की जरूरत महसूस हुई, वहां संबंधित अधिकारियों को समय रहते व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
दीपोत्सव के आयोजन में अवध विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका है। विश्वविद्यालय प्रशासन की देखरेख में सरयू तट के विभिन्न घाटों पर दीप सजाने और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस बार आयोजन को व्यवस्थित और आकर्षक बनाने के लिए घाटों पर दीपों की सजावट निर्धारित प्रारूप के अनुसार कराई जा रही है। कुलपति ने निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि दीपों की कतारें तय मानकों के अनुरूप हों और पूरे घाट क्षेत्र में सजावट एकरूपता के साथ दिखाई दे। उनका निर्देश था कि तैयारियों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो और सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं।
56 घाटों पर 35 हजार स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी
दीपोत्सव-2026 को सफल बनाने के लिए इस बार सरयू तट के कुल 56 घाटों पर व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। दीप सज्जा और अन्य जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए लगभग 35 हजार स्वयंसेवकों को लगाया गया है। इनके साथ 900 घाट समन्वयक, 112 घाट प्रभारी और 27 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। सभी को निर्धारित घाटों और कार्यक्षेत्रों के अनुसार जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि आयोजन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
घाटों पर स्वयंसेवक नियमित रूप से पहुंचकर दीपों को निर्धारित स्थानों पर सजा रहे हैं। घाट समन्वयक और प्रभारी उनके कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। पर्यवेक्षकों को अलग-अलग क्षेत्रों में व्यवस्थाओं पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रयास है कि इतने बड़े आयोजन में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट रहे और सभी टीमें आपसी तालमेल के साथ काम करें। स्वयंसेवकों में भी आयोजन को लेकर खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी और अन्य प्रतिभागी पूरी निष्ठा के साथ दीपोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं।
रंगोली में दिखेगी भारतीय संस्कृति की झलक
इस बार दीपोत्सव के दौरान दीपों की रोशनी के साथ भारतीय संस्कृति और परंपरा के शुभ प्रतीकों को भी विशेष स्थान दिया जा रहा है। कई प्रमुख घाटों पर स्वास्तिक, कमल और चक्रपूर्णा थीम पर आकर्षक रंगोली तैयार की गई है। इन रंगोलियों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक परंपरा और शुभता के प्रतीकों को दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है। दीपों की सजावट और रंगोली का यह संयोजन घाटों की सुंदरता को और आकर्षक बनाने के साथ आयोजन को सांस्कृतिक स्वरूप भी प्रदान करेगा।
विश्वविद्यालय की ओर से घाटों की सजावट को केवल दीपों की संख्या तक सीमित न रखते हुए पूरे आयोजन को व्यवस्थित और सांस्कृतिक रूप से प्रभावशाली बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए घाटवार योजना के अनुसार काम कराया जा रहा है। दीपों के लेआउट से लेकर रंगोली और अन्य सजावटी व्यवस्थाओं तक संबंधित टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं।
कुलपति ने स्वयंसेवकों का बढ़ाया उत्साह
निरीक्षण के दौरान कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने घाटों पर काम कर रहे स्वयंसेवकों से संवाद किया और उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक नगरी अयोध्या में दीपोत्सव-2026 के सफल आयोजन का महत्वपूर्ण दायित्व स्वयंसेवकों के कंधों पर है। इतने बड़े आयोजन में प्रत्येक स्वयंसेवक की मेहनत और जिम्मेदारी मायने रखती है। उन्होंने सभी से पूरी निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।
कुलपति ने कहा कि सप्तपुरियों में शामिल अयोध्या की पावन भूमि का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पूरी दुनिया में है। भगवान श्रीराम के आगमन की स्मृति से जुड़े इस महापर्व का हिस्सा बनना सभी के लिए सौभाग्य की बात है। दीपोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को विश्व पटल पर प्रस्तुत करने का अवसर भी है।
उन्होंने कहा कि दीपोत्सव के माध्यम से अयोध्या की पहचान और सांस्कृतिक गरिमा दुनिया भर में पहुंच रही है। यह आयोजन रामनगरी की बढ़ती प्रतिष्ठा का जीवंत प्रतीक बन चुका है। ऐसे महाआयोजन को सफल बनाने में अयोध्या के नागरिकों और स्वयंसेवकों का समर्पण बेहद महत्वपूर्ण है। कुलपति ने स्थानीय लोगों के सहयोग और सहभागिता को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि जनभागीदारी से ही इस तरह के बड़े आयोजन सफल होते हैं।
केंद्रीय कंट्रोल रूम से होगी घाटों की निगरानी
दीपोत्सव के नोडल प्रभारी प्रो. एसएस मिश्र ने कुलपति को तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी घाटों की गतिविधियों पर केंद्रीय कंट्रोल रूम से लगातार नजर रखी जा रही है। अलग-अलग घाटों पर चल रहे कार्यों की नियमित जानकारी प्राप्त की जा रही है, ताकि किसी भी समस्या का समय रहते समाधान किया जा सके। आवश्यक सामग्री की उपलब्धता और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी लगातार अपडेट लिया जा रहा है।
प्रो. मिश्र के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर आयोजित होने वाले दीपोत्सव में समन्वय और निगरानी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सभी घाटों पर तैनात समन्वयक, प्रभारी और पर्यवेक्षक निर्धारित जिम्मेदारियों के अनुसार काम कर रहे हैं। केंद्रीय कंट्रोल रूम के माध्यम से व्यवस्थाओं की स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है और जरूरत के अनुसार संबंधित टीमों को निर्देश दिए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह है कि दीप सज्जा और आयोजन से जुड़ा कोई भी महत्वपूर्ण कार्य अधूरा न रहे।
उपराष्ट्रपति के प्रस्तावित आगमन को लेकर भी तैयारियां
दीपोत्सव-2026 के आयोजन को लेकर इस बार विशेष तैयारियां की जा रही हैं। उपलब्ध आयोजन संबंधी जानकारी के अनुसार, उपराष्ट्रपति के मुख्य अतिथि के रूप में आगमन को देखते हुए भी व्यवस्थाओं को पुख्ता बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दीपोत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन प्रस्तावित है। ऐसे में आयोजन स्थल की सजावट, घाटों की व्यवस्था, स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी और कार्यक्रमों के संचालन को लेकर विश्वविद्यालय तथा संबंधित टीमें लगातार काम कर रही हैं।
दीपोत्सव के दौरान अयोध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए घाटों पर व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रखना भी चुनौतीपूर्ण होगा। विश्वविद्यालय की ओर से घाटवार जिम्मेदारियां तय करने और लगातार निगरानी की व्यवस्था इसी उद्देश्य से की गई है। आयोजन के दौरान दीपों की सजावट और प्रज्ज्वलन तय समय पर पूरा कराने के लिए स्वयंसेवकों को अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र में ही काम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
निरीक्षण टीम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह के निरीक्षण के दौरान दीपोत्सव के नोडल प्रभारी प्रो. एसएस मिश्र के साथ प्रो. शैलेंद्र कुमार वर्मा, प्रो. संग्राम सिंह, प्रो. फर्रुख जमाल, प्रो. सीके मिश्र, डॉ. राणा रोहित सिंह और डॉ. डीएन वर्मा मौजूद रहे। अधिकारियों ने घाटों पर चल रहे कार्यों की जानकारी दी और तैयारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि दीपोत्सव के दिन सभी 56 घाटों पर दीपों की सजावट निर्धारित योजना के अनुसार पूरी हो और आयोजन सुचारु रूप से संपन्न कराया जाए। हजारों विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों की भागीदारी, घाटवार जिम्मेदारियां तथा केंद्रीय कंट्रोल रूम से निगरानी इस बार की तैयारियों के प्रमुख आधार हैं। अब आयोजन की तारीख नजदीक आने के साथ ही घाटों पर काम में तेजी लाई जा रही है, ताकि दीपोत्सव के अवसर पर सरयू तट दीपों की भव्य रोशनी से जगमगा उठे।