अयोध्या। भाजपा के पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ के परिवार और पुलिस के बीच वाहन खड़ा करने को लेकर देर रात विवाद हो गया। मामला कोतवाली नगर क्षेत्र की सिविल लाइन पुलिस चौकी का है। नगर पालिका के सामने वाहन खड़ा करने को लेकर शुरू हुई कहासुनी के बाद विवाद बढ़ गया और सूचना मिलने पर पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ भी मौके पर पहुंच गए।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बाबा गोरखनाथ का परिवार देर रात सिविल लाइन स्थित एक होटल पहुंचा था। इस दौरान नगर पालिका के सामने वाहन खड़ा करने को लेकर पुलिस और परिवार के सदस्यों के बीच कहासुनी हुई। परिवार की ओर से सिविल लाइन चौकी प्रभारी पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया गया। घटना की सूचना मिलने के बाद बाबा गोरखनाथ मौके पर पहुंचे और पुलिस अधिकारियों के सामने अपनी नाराजगी जताई।
वाहन खड़ा करने को लेकर शुरू हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत वाहन पार्किंग को लेकर हुई। पुलिस के अनुसार वाहन के सड़क किनारे खड़े होने से आवागमन प्रभावित हो रहा था और उसे हटाने को कहा गया था। दूसरी ओर, पूर्व विधायक के परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया।
विवाद के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। मामले की जानकारी मिलने पर बाबा गोरखनाथ भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों और पूर्व विधायक के बीच बातचीत हुई। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसमें पुलिस और पूर्व विधायक के परिवार के बीच तीखी बहस दिखाई दे रही है।
तीन युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया
विवाद के दौरान मौके पर पहुंचे तीन युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस की ओर से बाद में बताया गया कि इन युवकों के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की गई। पुलिस के मुताबिक मेडिकल जांच में उनके शराब पीने की पुष्टि भी हुई है। हालांकि इस मामले में पुलिस कार्रवाई और परिवार की ओर से लगाए गए दुर्व्यवहार के आरोप अलग-अलग पक्ष हैं, जिनका आकलन उपलब्ध तथ्यों और आधिकारिक जांच के आधार पर किया जाना होगा।
पुलिस का कहना है कि मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई। वहीं पूर्व विधायक के परिवार की ओर से चौकी प्रभारी के व्यवहार पर सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर सामने आ रहा है।
सीओ सिटी और नगर कोतवाल पहुंचे मौके पर
विवाद की सूचना मिलने पर सीओ सिटी श्रीयश त्रिपाठी और नगर कोतवाल मनोज शर्मा भी मौके पर पहुंचे। बाद में पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ ने अधिकारियों से बातचीत की। एक वीडियो रिपोर्ट के मुताबिक वह देर रात करीब 12 बजे नगर कोतवाली भी पहुंचे और अधिकारियों से पूरे मामले को लेकर वार्ता की।
पूर्व विधायक ने कहा कि वह अपनी ही सरकार में कानून-व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाना चाहते, लेकिन पुलिसकर्मियों, खासकर चौकी प्रभारी को अपने व्यवहार में सुधार करना चाहिए। उनका कहना था कि आम लोगों के साथ पुलिस का व्यवहार सम्मानजनक होना चाहिए।
पूर्व विधायक ने पुलिस के व्यवहार पर जताई नाराजगी
बाबा गोरखनाथ ने मौके पर पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वह अपनी सरकार में कानून-व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाएंगे, लेकिन चौकी इंचार्ज को अपना व्यवहार सुधारना होगा। उनके इस बयान के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा में आ गया है।
यह पहली बार नहीं है जब पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ का किसी अधिकारी या पुलिस-प्रशासन के व्यवहार को लेकर विवाद सामने आया हो। इससे पहले मार्च 2026 में मिल्कीपुर के तत्कालीन एसडीएम के साथ उनकी बातचीत का ऑडियो भी चर्चा में आया था। हालांकि वह अलग मामला था और वर्तमान विवाद को उसी घटना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
घटना के बाद विवाद से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ। वीडियो में पुलिस और पूर्व विधायक के परिवार के बीच तीखी नोकझोंक होती दिखाई दे रही है। हालांकि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। वीडियो की पूरी परिस्थितियों, घटनाक्रम के क्रम और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वर्तमान में मुख्य विवाद वाहन खड़ा करने और उसके बाद पुलिस तथा परिवार के बीच हुए व्यवहार को लेकर है। पुलिस की ओर से शांति भंग की कार्रवाई की बात सामने आई है, जबकि पूर्व विधायक ने चौकी प्रभारी के व्यवहार पर आपत्ति जताई है।
पुलिस कार्रवाई और आरोपों के बीच सामने आया अलग-अलग पक्ष
इस मामले में पुलिस का पक्ष है कि वाहन को लेकर समस्या पैदा हुई और बाद में कुछ युवकों द्वारा पुलिस से अभद्रता किए जाने पर उन्हें हिरासत में लेकर शांति भंग में कार्रवाई की गई। वहीं परिवार की ओर से पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया गया है। ऐसे में पूरे मामले की तस्वीर दोनों पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों से ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल अयोध्या में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। पूर्व विधायक के मौके पर पहुंचने और पुलिस अधिकारियों से बातचीत के बाद मामला शांत हुआ। प्रशासन की ओर से इस विवाद में किसी बड़े टकराव की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर पार्किंग व्यवस्था, पुलिस के व्यवहार और जनप्रतिनिधियों तथा पुलिस के बीच संवाद के तौर-तरीकों को लेकर चर्चा खड़ी कर दी है। वाहन पार्किंग जैसे मामूली विवाद के बाद मामला राजनीतिक चर्चा तक पहुंचना यह भी बताता है कि ऐसे मामलों में मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और संबंधित पक्षों के बीच संयमित संवाद कितना महत्वपूर्ण है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामले में तीन युवकों के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की गई है। पूर्व विधायक के परिवार की ओर से चौकी प्रभारी के व्यवहार पर आपत्ति जताई गई है। घटना के वायरल वीडियो और दोनों पक्षों के बयानों के बीच अब आगे की स्थिति पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई से स्पष्ट होगी।
