अयोध्या के रामपथ पर सफाई के दौरान सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई संविदा सफाईकर्मी पूनम का इलाज के दौरान निधन हो गया। करीब 13 दिनों तक आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद पूनम ने दम तोड़ दिया। उनके निधन की खबर से परिवार और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
पूनम रामपथ की सफाई व्यवस्था में संविदा पर काम करती थीं। 19 अक्टूबर की रात ड्यूटी के दौरान वह सड़क हादसे का शिकार हुई थीं। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया था, जहां कई दिनों तक उनका इलाज चला। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पूनम की मौत सिर्फ एक सड़क हादसे की घटना नहीं है, बल्कि अयोध्या में रात के समय सफाई कार्य करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। हादसे के बाद महिला सफाई कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा सामने आया था। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के सदस्य मनोज कुमार वाल्मीकि ने 27 अक्टूबर को अयोध्या में कहा था कि रात आठ बजे के बाद महिला सफाई कर्मचारियों से काम नहीं कराया जाएगा। आयोग ने पूनम के हादसे को गंभीरता से लेते हुए सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा और अन्य समस्याओं पर भी जानकारी ली थी।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक 19 अक्टूबर की रात करीब दो बजे रामपथ पर अमानीगंज के पास सफाई के दौरान तेज रफ्तार स्कूटी की चपेट में आने से पूनम गंभीर रूप से घायल हुई थीं। उस समय उनकी हालत नाजुक बताई गई थी और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया था। घटना के बाद रात में महिला कर्मचारियों से सफाई कार्य कराने को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल भी उठे थे।
पूनम के परिवार की स्थिति इस घटना को और अधिक मार्मिक बना देती है। उनके पति का पहले ही निधन हो चुका था। ऐसे में वह अपने परिवार के लिए मुख्य सहारा थीं। चार बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। अब पूनम के निधन के बाद इन चारों बच्चों के सिर से मां का साया भी उठ गया है।
एक मां के रूप में पूनम अपने बच्चों के पालन-पोषण के साथ-साथ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां भी संभाल रही थीं। संविदा पर सफाई का काम करके वह अपने परिवार की जरूरतें पूरी करने का प्रयास कर रही थीं। हादसे के बाद परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद पूनम स्वस्थ होकर वापस लौटेंगी, लेकिन लंबे उपचार के बाद उनका निधन हो गया।
पूनम के निधन से यह सवाल भी उठ रहा है कि शहर की सफाई व्यवस्था को सुचारु रखने वाले संविदा और सफाई कर्मचारियों के लिए काम के दौरान सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था कितनी प्रभावी है। खासकर रात के समय सड़क पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यातायात सुरक्षा, पर्याप्त प्रकाश, सुरक्षा जैकेट, चेतावनी संकेत और वाहनों की आवाजाही से बचाव के इंतजाम बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के समक्ष सफाई कर्मचारियों ने पहले भी कई समस्याएं रखी थीं। इनमें वेतन में देरी, बीमा की सुविधा, कर्मचारियों के कार्ड, कार्यस्थल पर शौचालय और लंबे समय तक काम कराने जैसी शिकायतें शामिल थीं। आयोग के सदस्य ने बड़े आयोजनों के दौरान सफाई कर्मचारियों के लिए भोजन-पानी और जरूरत पड़ने पर मौके पर चिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था को भी जरूरी बताया था।
पूनम की मौत के बाद इन व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठना स्वाभाविक है। अयोध्या में रामपथ सहित प्रमुख मार्गों और धार्मिक स्थलों के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने में सफाई कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। शहर में लगातार बढ़ रहे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या के बीच सफाई व्यवस्था का दबाव भी बढ़ा है। ऐसे में कर्मचारियों की सुरक्षा को व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाए जाने की जरूरत है।
पूनम की मौत की परिस्थितियों, हादसे में जिम्मेदारी और संबंधित सुरक्षा इंतजामों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। सड़क हादसे के कारणों और ड्यूटी के दौरान उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्था की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन स्तरों पर सुधार की जरूरत है।
फिलहाल पूनम का परिवार एक अपूरणीय क्षति से गुजर रहा है। चार बच्चों के लिए मां का जाना केवल भावनात्मक नुकसान नहीं, बल्कि उनके जीवन और भविष्य से जुड़ी बड़ी चुनौती भी है। ऐसे में परिवार को प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर किस तरह की सहायता मिलती है, इस पर भी लोगों की नजर रहेगी।
पूनम ने जिस काम के जरिए अपने परिवार का सहारा बनने की कोशिश की, उसी ड्यूटी के दौरान हुए हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली। उनका निधन अयोध्या की सफाई व्यवस्था में काम करने वाले उन कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल छोड़ गया है, जो दिन-रात शहर को साफ और व्यवस्थित रखने में जुटे रहते हैं।