“विपक्ष के ‘जन महाभियोग’ और वोट चोरी के आरोपों के बीच भाजपा ने जवाबी अभियान तेज किया। ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ कार्यक्रम के तहत देशभर में पदयात्राएं, युवा संवाद और 800 स्थानों पर कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।“
नई दिल्ली। देश में चुनावी प्रक्रिया, लोकतंत्र और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की ओर से चलाए जा रहे ‘जन महाभियोग’ अभियान और वोट चोरी के आरोपों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जवाबी रणनीति तैयार की है। पार्टी अब विपक्ष के राजनीतिक आरोपों का जवाब केवल बयानों तक सीमित रखने के बजाय जनसंपर्क कार्यक्रमों, पदयात्राओं, युवा संवाद और विभिन्न सार्वजनिक आयोजनों के माध्यम से देने की तैयारी में है।
भाजपा ने इसके लिए ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान का खाका तैयार किया है। पार्टी की रणनीति के तहत दिल्ली में मॉक पार्लियामेंट के जरिए चुनावी मुद्दों पर बहस आयोजित की गई, जबकि नवंबर में देशभर में व्यापक स्तर पर कार्यक्रम करने की योजना है। इस अभियान को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष के राजनीतिक नैरेटिव का जवाब देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
मॉक पार्लियामेंट में युवाओं ने उठाए चुनावी मुद्दे
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में सुबह 10:30 बजे से ‘लोकतंत्र बनाम अराजकता’ नाम से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी’ संस्था के बैनर तले हुए इस आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे युवाओं ने मॉक पार्लियामेंट में हिस्सा लिया।
इस दौरान युवाओं ने संसद की कार्यवाही की तर्ज पर अलग-अलग राजनीतिक नेताओं की भूमिकाएं निभाईं। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस नेता राहुल गांधी जैसी भूमिकाओं के माध्यम से राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की गई। बहस के केंद्र में ईवीएम, चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे विषय रहे।
आयोजकों की ओर से इसे आम नागरिकों और युवाओं की भागीदारी वाला कार्यक्रम बताया गया। इसमें भाजपा सांसदों की प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं रही। हालांकि, राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इस आयोजन को विपक्ष के वोट चोरी संबंधी आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के जवाब में चल रही राजनीतिक मुहिम से जोड़कर देखा जा रहा है।
INDIA ब्लॉक की बैठक स्थगित होने पर भाजपा ने साधा निशाना
इसी बीच दिल्ली में खराब मौसम और भारी बारिश के कारण विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक का प्रस्तावित कार्यक्रम स्थगित होने पर भाजपा नेताओं ने निशाना साधा। विपक्षी नेताओं की बैठक शुक्रवार दोपहर 3:30 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर प्रस्तावित थी।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश के अनुसार, बैठक अब 31 अक्टूबर को दोपहर 2:30 बजे आयोजित की जाएगी। इसके बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष की बड़ी रैली प्रस्तावित है। इस रैली के माध्यम से विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, वोट चोरी और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अपनी बात जनता के सामने रखने की तैयारी कर रहा है।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्ष के कार्यक्रम स्थगित होने पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष के पास न तो मजबूत संगठन है और न ही आपसी एकजुटता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र से जुड़े गंभीर मुद्दों पर संसद के भीतर चर्चा होनी चाहिए। केवल बाहर कार्यक्रम और मॉक ड्रामा करने से कोई समाधान नहीं निकलने वाला।
किरेन रिजिजू ने कहा- लोकतंत्र में अंतिम फैसला वोट से होता है
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष के अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक रैलियों में भीड़ जुटाना अलग बात है, लेकिन लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता अपने वोट के माध्यम से करती है।
भाजपा नेताओं के इन बयानों से साफ है कि पार्टी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक और सार्वजनिक मंचों पर चुनौती देने की तैयारी में है। सत्तापक्ष का जोर इस बात पर है कि चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर जनता के बीच अपनी बात रखी जाए।
देशभर में पदयात्राएं, युवा संवाद और संगोष्ठियों की तैयारी
भाजपा की जवाबी रणनीति केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहने वाली है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत देश के विभिन्न राज्यों और जिलों में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इन कार्यक्रमों में पदयात्राएं, युवा संवाद, प्रबुद्ध वर्ग की संगोष्ठियां और प्रेस कॉन्फ्रेंस शामिल होंगी। पार्टी का प्रयास स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं, युवाओं और आम नागरिकों को जोड़कर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने का है। इसके लिए जिला स्तर पर भी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
भाजपा की योजना है कि अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा जाए, ताकि चुनाव आयोग, ईवीएम, SIR और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर पार्टी का पक्ष जनता के बीच पहुंचाया जा सके।
11 से 30 नवंबर तक अभियान का दूसरा चरण, 800 स्थानों पर कार्यक्रम
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस अभियान का दूसरा चरण 11 नवंबर से 30 नवंबर तक चलाने की तैयारी है। इस दौरान देशभर में लगभग 800 स्थानों पर बड़े कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इन आयोजनों के जरिए भाजपा विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक जवाब देने के साथ ही अपने संगठनात्मक नेटवर्क को भी सक्रिय करेगी।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी देश के कई हिस्सों में आयोजित पदयात्राओं में शामिल हो सकते हैं। उनकी भागीदारी से अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक महत्व मिलने की संभावना है।
विधानसभा चुनावों से पहले सियासी नैरेटिव की लड़ाई तेज
देश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक संदेशों की लड़ाई लगातार तेज हो रही है। INDIA ब्लॉक जहां वोट चोरी, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं भाजपा इन आरोपों का जवाब जनसंपर्क और संगठनात्मक अभियानों के माध्यम से देने की तैयारी में है।
दिल्ली की मॉक पार्लियामेंट से लेकर नवंबर में प्रस्तावित देशव्यापी कार्यक्रमों तक भाजपा की रणनीति विपक्ष के अभियान को राजनीतिक चुनौती देने की है। अब देखना होगा कि इस जवाबी मुहिम का जनता के बीच कितना प्रभाव पड़ता है और विपक्ष तथा सत्तापक्ष के बीच लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जारी बहस आने वाले दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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