“उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ के पास पांडुकेश्वर में बदरीनाथ से देहरादून लौट रहा हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया। हादसे में पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौत हो गई। सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन संभाला।“
चमोली/जोशीमठ। उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार को एक दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे में छह लोगों की मौत हो गई। बदरीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर जोशीमठ के नजदीक पांडुकेश्वर क्षेत्र में भेड़ गदेरे की पहाड़ी पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हेलीकॉप्टर में सवार पायलट समेत सभी छह लोगों की जान चली गई। हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और सेना की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभाल ली और मृतकों के शवों को निकालने की कार्रवाई शुरू की।
पांडुकेश्वर के पास पहाड़ी पर हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर बदरीनाथ से देहरादून के लिए रवाना हुआ था। उसे देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड पर उतरना था। इसी दौरान जोशीमठ और बदरीनाथ के बीच पांडुकेश्वर के पास भेड़ गदेरे की पहाड़ी पर हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने हादसे में सभी छह लोगों की मौत की पुष्टि की। घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता भी काफी दुर्गम है। पांडुकेश्वर सड़क से करीब सात किलोमीटर पैदल दूरी पर दुर्घटनास्थल स्थित है। ऐसे में राहत एवं बचाव दल को मौके तक पहुंचने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
हेलीकॉप्टर में सवार थे छह लोग, पांच यात्री कर्नाटक के निवासी
दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर ट्रांस भारत एविएशन कंपनी का बताया गया है। इसमें दिल्ली निवासी एक पायलट और कर्नाटक के पांच यात्री सवार थे। हादसे में सभी की मौत हो गई।
प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है:
- कैप्टन हिमांशु सभरवाल (48 वर्ष): निवासी दिल्ली, पायलट।
- प्रतापा (41 वर्ष): निवासी कर्नाटक।
- अरुण सालुंके (44 वर्ष): निवासी कर्नाटक।
- वीबी शंकर गौड़ा (39 वर्ष): निवासी कर्नाटक।
- सुधीर के. (50 वर्ष): निवासी कर्नाटक।
- एसएस नटराजा: निवासी कर्नाटक।
हादसे के बाद मृतकों के परिजनों को सूचना देने और आगे की आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
दुर्घटना के कारणों की जांच के बाद होगा खुलासा
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि हेलीकॉप्टर दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता रेस्क्यू अभियान को पूरा करने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की है।
हादसे के बाद एहतियातन मैसर्स ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के सभी हेलीकॉप्टरों की उड़ानों पर रोक लगा दी गई है। यूकाडा के सीईओ प्रतीक जैन के अनुसार, घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित टीम को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया था। दुर्घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लिया घटना का संज्ञान
हेलीकॉप्टर हादसे पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दुख जताया। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट साझा कर घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग तथा एसडीआरएफ की टीमें संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने और जरूरत के अनुसार तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
खराब मौसम के बीच भी जारी थीं हेलीकॉप्टर सेवाएं
हादसे के बाद बदरीनाथ क्षेत्र में हेलीकॉप्टर संचालन और मौसम की स्थिति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को मौसम खराब होने के बावजूद बदरीनाथ से देहरादून के लिए हेलीकॉप्टर उड़ानों का संचालन जारी था।
बताया गया कि दोपहर 1 बजकर 5 मिनट पर एक हेलीकॉप्टर ने बदरीनाथ से उड़ान भरी और सुरक्षित देहरादून पहुंच गया। इसके सात मिनट बाद यानी 1 बजकर 12 मिनट पर दूसरा हेलीकॉप्टर रवाना हुआ, लेकिन वह अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सका। बाद में उसके लापता होने की जानकारी सामने आई।
इसके बाद दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर एक अन्य हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी और वह भी सुरक्षित देहरादून पहुंच गया। दिनभर में करीब 12 चार्टर हेलीकॉप्टरों ने उड़ान भरी थी। हादसे के बाद मौसम की स्थिति, उड़ान संचालन और सुरक्षा मानकों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हादसे ने फिर उठाए पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सुरक्षा पर सवाल
उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में दुर्गम रास्तों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हेलीकॉप्टर सेवाएं यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण साधन हैं। खासकर चारधाम यात्रा के दौरान इन सेवाओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। हालांकि, ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र, अचानक बदलता मौसम और सीमित दृश्यता हवाई संचालन को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।
जोशीमठ के पास हुए इस हादसे के बाद हेलीकॉप्टर संचालन की सुरक्षा व्यवस्था, मौसम संबंधी सावधानियों और उड़ान अनुमति की प्रक्रिया पर चर्चा तेज होने की संभावना है। फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
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