हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में गुलाब जल बनाने की आड़ में संचालित कथित सिंथेटिक ड्रग्स फैक्टरी का राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और यूपी एटीएस की संयुक्त टीम ने भंडाफोड़ किया है। एजेंसियों की इस कार्रवाई में करीब 1,102.88 किलोग्राम मादक पदार्थ, अर्धनिर्मित सामग्री, रसायन और उपकरण जब्त किए गए हैं। बरामद सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 300 करोड़ रुपये बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें एक आरोपी का संबंध हमीरपुर जिले के गोहांड से बताया जा रहा है। इस गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद हमीरपुर जिले में भी हलचल मच गई है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, जालौन के उरई क्षेत्र के एक गांव में गुलाब जल बनाने वाली इकाई की आड़ में मेफेड्रोन नामक सिंथेटिक नशीले पदार्थ के निर्माण की व्यवस्था की गई थी। बाहर से सामान्य उत्पादन इकाई जैसी दिखाई देने वाली इस जगह के अंदर कथित तौर पर नशीले पदार्थ तैयार करने के लिए प्रयोगशाला संचालित की जा रही थी। गुप्त सूचना मिलने के बाद डीआरआई ने मामले की पड़ताल की और यूपी एटीएस की सहायता से संयुक्त छापेमारी की योजना बनाई।
गुलाब जल की इकाई के भीतर मिली प्रयोगशाला
जानकारी के अनुसार, जालौन जनपद के डकोर कोतवाली क्षेत्र के ऐरी रमपुरा गांव में यह कार्रवाई की गई। एजेंसियों की टीम ने गुरुवार, 29 अक्टूबर की सुबह परिसर पर छापा मारा। तलाशी के दौरान अधिकारियों को वहां सिंथेटिक मादक पदार्थ बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रयोगशाला मिली। परिसर में रसायन, मशीनें और अन्य उपकरण मौजूद थे। शुरुआती जांच में यह सामने आया कि इस स्थान का इस्तेमाल कथित तौर पर मेफेड्रोन के निर्माण के लिए किया जा रहा था।
कार्रवाई के दौरान टीम ने फैक्टरी परिसर से करीब 184 किलोग्राम अर्धनिर्मित मादक पदार्थ बरामद किया। इसके अतिरिक्त लगभग 582.2 किलोग्राम रसायन और अन्य सामग्री भी जब्त की गई। अधिकारियों के मुताबिक, इन रसायनों और उपकरणों का इस्तेमाल कथित तौर पर नशीले पदार्थों के निर्माण में किया जा रहा था।
छापेमारी यहीं तक सीमित नहीं रही। फैक्टरी से जुड़े आरोपियों के आवासीय परिसरों की भी तलाशी ली गई। एक आरोपी के घर से 15.44 किलोग्राम तैयार मेफेड्रोन बरामद हुआ। इसके साथ ही करीब 152.94 किलोग्राम रसायन और निर्माण प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली मशीन भी जब्त की गई। दूसरे आरोपी के परिसर से लगभग 168.3 किलोग्राम अतिरिक्त रसायन बरामद किए गए।
इस प्रकार फैक्टरी और आरोपियों के आवासों से की गई संयुक्त बरामदगी का कुल वजन 1,102.88 किलोग्राम बताया गया है। यहां यह समझना जरूरी है कि जब्त की गई पूरी 1,102.88 किलोग्राम सामग्री तैयार ड्रग्स नहीं थी। इसमें तैयार मेफेड्रोन के साथ अर्धनिर्मित पदार्थ, रसायन और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री भी शामिल है। एजेंसियों ने पूरी बरामदगी का अनुमानित मूल्य करीब 300 करोड़ रुपये बताया है।
दो आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क की तलाश तेज
संयुक्त कार्रवाई के दौरान दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उपलब्ध जांच रिपोर्टों में आरोपियों की पहचान हेमेंद्र कुशवाह और महाराष्ट्र के सांगली निवासी संतोष कुमार के रूप में बताई गई है। संतोष की उम्र 37 वर्ष बताई गई है, जबकि हेमेंद्र की उम्र अलग-अलग रिपोर्टों में 27 और 28 वर्ष दर्ज है। दोनों पर कथित तौर पर अवैध मादक पदार्थ निर्माण और तस्करी से जुड़े नेटवर्क में शामिल होने का आरोप है।
एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गुलाब जल बनाने वाली इकाई की आड़ में यह गतिविधि कब से संचालित हो रही थी। इसके अलावा प्रयोगशाला के लिए रसायन कहां से मंगाए जाते थे, निर्माण प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था और तैयार मेफेड्रोन की सप्लाई किन क्षेत्रों में की जानी थी, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आरोपियों के आपसी संपर्क और उनके पुराने संबंधों की पड़ताल भी है। अधिकारियों को यह पता लगाना है कि फैक्टरी के संचालन के लिए आर्थिक मदद किसने उपलब्ध कराई, कच्चे माल की खरीद में किन लोगों की भूमिका रही और तैयार नशीले पदार्थों को आगे पहुंचाने की जिम्मेदारी किसके पास थी। बरामद मोबाइल फोन, दस्तावेजों, मशीनों और अन्य सामग्री की जांच से इस नेटवर्क की अतिरिक्त कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।
गोहांड से जुड़ा नाम आने पर हमीरपुर में चर्चा
इस पूरे मामले में हमीरपुर जिले के गोहांड का नाम सामने आने से स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। उपलब्ध स्थानीय जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी हेमंत का संबंध जरिया थाना क्षेत्र के गोहांड कस्बे से बताया जा रहा है। बताया गया है कि वह कुछ वर्षों तक महाराष्ट्र में रहा और इसके बाद उरई में रहने लगा था। उसके पिता भी उरई में ही निवास करते हैं, जबकि गोहांड स्थित पुश्तैनी मकान में उसकी मां रहती हैं।
स्थानीय लोगों के बीच आरोपी के परिवार और उसके पुराने निवास को लेकर चर्चा हो रही है। हालांकि, इस स्थानीय पहचान को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। एजेंसियों पर आधारित प्रकाशित रिपोर्टों में गिरफ्तार आरोपी का नाम हेमेंद्र कुशवाह और निवास उरई, जालौन बताया गया है। गोहांड निवासी होने की जानकारी की आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपी के गांव और पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़े विवरणों की पुष्टि संबंधित एजेंसियों से होना बाकी है।
फिर भी, जालौन में इतनी बड़ी कथित ड्रग्स फैक्टरी का खुलासा और मामले में बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति की गिरफ्तारी की खबर ने आसपास के जिलों का ध्यान इस कार्रवाई की ओर खींचा है। अब स्थानीय स्तर पर भी लोग यह जानना चाहते हैं कि इस पूरे कारोबार में संबंधित आरोपियों की भूमिका क्या थी और जांच आगे बढ़ने पर किन अन्य लोगों के नाम सामने आते हैं।
मेफेड्रोन क्या है और जांच क्यों महत्वपूर्ण?
मेफेड्रोन एक सिंथेटिक साइकोएक्टिव मादक पदार्थ है, जिसे आमतौर पर एमडी के नाम से भी जाना जाता है। इसका अवैध निर्माण और कारोबार स्वास्थ्य तथा कानून-व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती है। इस तरह के पदार्थों के निर्माण में विशेष रसायनों और उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए किसी सामान्य औद्योगिक या व्यावसायिक इकाई की आड़ में ऐसी प्रयोगशाला संचालित होने की आशंका सामने आने पर जांच एजेंसियों के लिए पूरे सप्लाई नेटवर्क का पता लगाना महत्वपूर्ण हो जाता है।
जालौन की इस कार्रवाई में तैयार मेफेड्रोन के अलावा बड़ी मात्रा में अर्धनिर्मित पदार्थ और रसायनों की बरामदगी भी जांच को महत्वपूर्ण बनाती है। इससे एजेंसियों को यह पता लगाने का अवसर मिलेगा कि निर्माण प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंच चुकी थी और फैक्टरी में कितनी बड़ी मात्रा में उत्पादन की तैयारी थी। हालांकि, उत्पादन क्षमता और वास्तविक कारोबार का पूरा आकलन जांच के बाद ही संभव होगा।
कई सवालों के जवाब तलाश रहीं एजेंसियां
फिलहाल डीआरआई और यूपी एटीएस की जांच कई महत्वपूर्ण सवालों पर केंद्रित है। सबसे पहले यह पता लगाया जा रहा है कि गुलाब जल बनाने वाली इकाई के नाम पर फैक्टरी का संचालन किस प्रकार किया जा रहा था। इसके अलावा रसायनों की आपूर्ति करने वाले लोगों, मशीनरी उपलब्ध कराने वालों, आर्थिक लेन-देन और तैयार पदार्थ की संभावित सप्लाई चेन की जानकारी जुटाई जा रही है।
एजेंसियां यह भी जांच रही हैं कि गिरफ्तार दोनों आरोपियों के अलावा इस गतिविधि में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। फैक्टरी के संचालन में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका, वित्तीय सहायता और संभावित खरीदारों के बारे में जानकारी जुटाना भी जांच का हिस्सा है। बरामद सामग्री का परीक्षण और दस्तावेजों की पड़ताल आगे की कार्रवाई में अहम भूमिका निभाएगी।
जालौन में हुई इस संयुक्त कार्रवाई ने बुंदेलखंड क्षेत्र में कथित अवैध नशीले पदार्थों के निर्माण के एक बड़े मामले को सामने ला दिया है। करीब 1,102.88 किलोग्राम सामग्री की बरामदगी और लगभग 300 करोड़ रुपये के अनुमानित मूल्य ने इस कार्रवाई को गंभीर बना दिया है। अब सबकी निगाहें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस कथित कारोबार का नेटवर्क कितना बड़ा था, इसकी सप्लाई कहां तक फैली थी और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
