“उत्तर प्रदेश MLC चुनाव 2026 में वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज कर भाजपा को झटका दिया। गोरखपुर में भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच कांटे की टक्कर है। जानें लखनऊ, मेरठ, बरेली समेत 11 स्नातक-शिक्षक सीटों का चुनावी हाल।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे प्रदेश की सियासत के लिए अहम संकेत दे रहे हैं। 11 सीटों पर हुए चुनाव की मतगणना में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में समाजवादी पार्टी ने शिक्षक एमएलसी सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक प्रभाव वाले गोरखपुर-फैजाबाद क्षेत्र में भाजपा को निर्दलीय प्रत्याशी से कड़ी चुनौती मिल रही है।
वाराणसी में सपा प्रत्याशी और मौजूदा एमएलसी लाल बिहारी यादव की जीत ने भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती जरूर बढ़ाई है। हालांकि, इस परिणाम को सीधे भाजपा की एंटी-इनकंबेंसी का प्रमाण मानने के बजाय स्थानीय चुनावी समीकरणों, प्रत्याशियों की पकड़ और शिक्षक वर्ग के रुझान के संदर्भ में देखना भी जरूरी है।
वाराणसी में लाल बिहारी यादव ने दूसरी बार दर्ज की जीत
वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी लाल बिहारी यादव ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है। उन्होंने भाजपा के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 5,015 मतों के अंतर से हराया। लाल बिहारी यादव को कुल 11,612 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रमोद मिश्रा के खाते में 6,597 मत आए।
पहली वरीयता के मतों की गणना में लाल बिहारी यादव को 10,958 वोट मिले थे। वहीं डॉ. प्रमोद मिश्रा को 6,060 वोट प्राप्त हुए। पहली वरीयता में बढ़त के बाद दूसरी वरीयता के मतों की गणना हुई और अंततः सपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। Amar Ujala Hindi News Live+1
यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। यहां सपा ने अपनी शिक्षक सीट बचाकर भाजपा के सामने चुनौती पेश की है।
गोरखपुर में भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच मुकाबला
गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतगणना के दौरान मुकाबला काफी दिलचस्प बना हुआ है। भाजपा के ध्रुव कुमार त्रिपाठी और निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। शुरुआती गणना में भाजपा प्रत्याशी को मामूली बढ़त मिली, जबकि बाद के रुझानों में निर्दलीय प्रत्याशी ने भी मजबूत चुनौती पेश की।
एक चरण के आंकड़ों में राजीव यादव को 3,753 और भाजपा के ध्रुव त्रिपाठी को 3,610 वोट मिले। सपा के डॉ. संजयन त्रिपाठी भी मुकाबले में बने हुए थे। इस सीट पर बदलते रुझानों ने भाजपा की चिंता बढ़ाई। ABP News+1
गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रमुख राजनीतिक आधार रहा है। ऐसे में यहां का चुनावी मुकाबला भाजपा के लिए प्रतिष्ठा से जुड़ा माना जा रहा है।
मेरठ और बरेली में भाजपा ने बरकरार रखा दबदबा
एमएलसी चुनाव में भाजपा को कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर सफलता भी मिली है। मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक दोनों सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की।
- मेरठ शिक्षक सीट: भाजपा के श्रीचंद शर्मा विजयी रहे।
- मेरठ स्नातक सीट: भाजपा के दिनेश गोयल ने जीत हासिल की।
- बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट: भाजपा के हरिसिंह ढिल्लों ने जीत दर्ज की।
इन परिणामों से स्पष्ट है कि प्रदेश में भाजपा का प्रदर्शन सभी क्षेत्रों में कमजोर नहीं रहा है। पार्टी ने अपने कई पुराने प्रभाव वाले निर्वाचन क्षेत्रों में पकड़ बनाए रखी है। The Times of India+1
लखनऊ शिक्षक सीट पर भी भाजपा की सफलता
लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के उमेश द्विवेदी ने जीत हासिल की। मतगणना के दौरान उन्होंने सपा प्रत्याशी सुशील कुमार (बाबा) के मुकाबले बढ़त बनाई थी। उपलब्ध चुनावी रिपोर्टों में उन्हें विजेता बताया गया है। A2Z News UP+1
राजधानी लखनऊ में भाजपा की इस सफलता ने पार्टी को राहत दी है। वहीं वाराणसी में सपा की जीत ने मुकाबले को राजनीतिक रूप से और दिलचस्प बना दिया है।
11 सीटों पर मुकाबला, 2027 से पहले सियासी संदेश
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल 11 सीटों के लिए मतदान हुआ था। इन चुनावों में भाजपा, सपा और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुकाबला देखने को मिला। मतगणना के दौरान कई सीटों पर बढ़त बदलती रही और कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में परिणाम को लेकर राजनीतिक दलों की निगाहें टिकी रहीं।
इन चुनावों का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा जहां अपने संगठन और सरकार के कामकाज के आधार पर राजनीतिक पकड़ मजबूत बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं सपा इन नतीजों को अपने पक्ष में माहौल बनने के संकेत के रूप में देख सकती है।
शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता आम विधानसभा मतदाताओं से अलग होते हैं। इसलिए इन परिणामों को पूरे प्रदेश के जनमत का सीधा पैमाना नहीं माना जा सकता। फिर भी वाराणसी में सपा की जीत और गोरखपुर में कड़ी चुनौती ने भाजपा के लिए राजनीतिक समीक्षा की गुंजाइश जरूर पैदा की है।
चुनावी नतीजों से भाजपा और सपा को क्या संदेश?
इन चुनाव परिणामों से तीन प्रमुख राजनीतिक संकेत सामने आते हैं।
- भाजपा के लिए चुनौती: वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा की जीत और गोरखपुर में कड़े मुकाबले ने पार्टी के सामने स्थानीय स्तर पर अपनी रणनीति की समीक्षा करने की चुनौती खड़ी की है।
- सपा को मजबूती: लाल बिहारी यादव की लगातार दूसरी जीत से सपा को शिक्षक वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ दिखाने का अवसर मिला है।
- 2027 की तैयारी: भाजपा और सपा दोनों के लिए ये चुनाव संगठनात्मक मजबूती, स्थानीय नेतृत्व और मतदाता संपर्क की परीक्षा के तौर पर देखे जा रहे हैं।
हालांकि, विधान परिषद के इन चुनावों के आधार पर विधानसभा चुनाव 2027 का परिणाम तय मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि वाराणसी और गोरखपुर के नतीजों ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा शुरू कर दी है।
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