सूडान। सूडान के दक्षिण दारफुर प्रांत की राजधानी न्याला में एक भीड़भाड़ वाले बाजार पर हुए ड्रोन हमले ने भयावह तबाही मचा दी। इस हमले में 102 लोगों की मौत होने और 113 अन्य के घायल होने की खबर है। मृतकों और घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। हमले के बाद इलाके में मानवीय संकट और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है।
यह हमला सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 की शाम न्याला के पश्चिमी हिस्से में स्थित तानकोंग बाजार में हुआ। मानवाधिकार संगठन इमरजेंसी लॉयर्स के मुताबिक, उस समय बाजार में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। संगठन ने हमले के लिए सूडानी सेना को जिम्मेदार ठहराया है और घटना की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। हालांकि, मौतों के अंतिम आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और हमले के संबंध में सूडानी सेना का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।
भीड़भाड़ वाले बाजार में ड्रोन हमला
रिपोर्टों के अनुसार, न्याला के डुमाया इलाके में स्थित तानकोंग बाजार पर स्थानीय समयानुसार सोमवार रात करीब आठ बजे ड्रोन से हमला हुआ। बाजार में रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदने और अन्य कामों के लिए लोग मौजूद थे। हमले के बाद वहां भारी तबाही हुई और बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए।
मानवाधिकार संगठन इमरजेंसी लॉयर्स ने मंगलवार को जारी बयान में 102 लोगों की मौत और 113 लोगों के घायल होने की जानकारी दी। संगठन के मुताबिक, मृतकों और घायलों में महिलाओं और बच्चों की संख्या भी काफी है। इस घटना ने युद्ध के बीच आम नागरिकों के लिए सुरक्षित स्थानों की कमी और बढ़ते खतरे को फिर उजागर किया है।
अस्पतालों में घायलों का इलाज, आंकड़ों में अंतर
हमले के बाद घायलों को अस्पतालों तक पहुंचाया गया। अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा सहायता संगठन डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स यानी एमएसएफ ने 27 अक्टूबर को बताया कि न्याला टीचिंग अस्पताल में 36 शव पहुंचाए गए थे। अस्पताल के आपातकालीन विभाग में 150 से अधिक घायल मरीजों को देखा गया।
एमएसएफ के अनुसार, घायलों में छर्रे लगने, गंभीर जलने और अन्य चोटों के मामले शामिल थे। कई लोगों को स्थानीय परिवहन साधनों के जरिए अस्पताल लाया गया। चिकित्सा कर्मचारियों ने घायलों के उपचार के लिए लगातार काम किया।
इमरजेंसी लॉयर्स की ओर से बताई गई 102 मौतों और 113 घायलों की संख्या तथा एमएसएफ की अस्पताल संबंधी जानकारी में अंतर है। उपलब्ध सूचनाओं से यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों आंकड़ों में अंतर का कारण क्या है। इसलिए मृतकों और घायलों की अंतिम संख्या की पुष्टि होना अभी बाकी है।
एमएसएफ ने यह भी बताया कि बाजार पर हमले के अलावा एक नागरिक रिहायशी इलाके में भी दूसरा हमला हुआ। संगठन ने सभी संघर्षरत पक्षों से नागरिकों, अस्पतालों और जरूरी बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
सूडानी सेना पर आरोप, स्वतंत्र जांच की मांग
मानवाधिकार संगठन इमरजेंसी लॉयर्स ने बाजार पर हुए हमले के लिए सूडानी सेना को जिम्मेदार ठहराया है। संगठन ने घटना की निंदा करते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि हमले की परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।
हालांकि, किसी पक्ष पर लगाए गए आरोप को अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। उपलब्ध रिपोर्टों में सूडानी सेना की ओर से इस विशेष हमले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में घटना की पूरी परिस्थितियों और जिम्मेदारी का निर्धारण स्वतंत्र जांच के बाद ही किया जा सकेगा।
न्याला पर अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज यानी आरएसएफ का नियंत्रण है। यह संगठन अप्रैल 2023 से सूडानी सेना के साथ संघर्ष में शामिल है। दोनों पक्षों के बीच जारी लड़ाई में ड्रोन हमलों का इस्तेमाल बढ़ा है। हाल के सप्ताहों में नागरिक इलाकों और जरूरी सेवाओं से जुड़े ठिकानों पर हमलों को लेकर चिंता जताई गई है।
अप्रैल 2023 से जारी है गृहयुद्ध
सूडान में सेना और आरएसएफ के बीच अप्रैल 2023 में संघर्ष शुरू हुआ था। सत्ता और सैन्य नियंत्रण को लेकर बढ़ा तनाव राजधानी खार्तूम में खुले युद्ध में बदल गया। इसके बाद हिंसा देश के कई हिस्सों में फैल गई। दारफुर क्षेत्र भी लंबे समय से संघर्ष और विस्थापन की गंभीर समस्या से जूझ रहा है।
युद्ध के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षित आवास और अन्य बुनियादी जरूरतों तक पहुंच प्रभावित हुई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, सूडान में लगभग 3.4 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है। यह देश की आबादी का करीब दो-तिहाई हिस्सा है।
ड्रोन हमलों में बढ़ोतरी ने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। बाजार, अस्पताल, स्कूल और अन्य सार्वजनिक स्थान आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। ऐसे स्थानों पर हमले होने से न केवल लोगों की जान जाती है, बल्कि भोजन और चिकित्सा सहायता तक पहुंच भी प्रभावित होती है।
न्याला के बाजार पर हुआ हमला इसी व्यापक संकट की गंभीर तस्वीर पेश करता है। फिलहाल मृतकों की अंतिम संख्या, हमले की पूरी परिस्थितियों और जिम्मेदारी से जुड़े सवालों पर स्पष्टता आना बाकी है। स्वतंत्र जांच और घायलों के उपचार के साथ-साथ प्रभावित नागरिकों तक मानवीय सहायता पहुंचाना अब सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल है।
