लखनऊ। उत्तर प्रदेश में किसानों को धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के दौरान मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए ग्रामीण रोजगार योजना के कामों पर 20 दिनों का विराम रहेगा। शासन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कृषि कार्यों के चरम मौसम में काम बंद रखने की अवधि में संशोधन किया है। नए कार्यक्रम के अनुसार, 1 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक मनरेगा से जुड़े कार्य नहीं कराए जाएंगे। इस फैसले का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध श्रमिकों को खेती के कामों के लिए पर्याप्त संख्या में उपलब्ध कराना है।
ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव सौरभ बाबू की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, कृषि कार्यों के व्यस्त मौसम को ध्यान में रखते हुए पहले निर्धारित अवधि में बदलाव किया गया है। इससे पहले 22 जुलाई 2026 की अधिसूचना में धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के लिए 15 अक्टूबर से 5 नवंबर तक का समय निर्धारित था। अब संशोधित व्यवस्था के तहत इस अवधि को बदलकर 1 से 20 नवंबर कर दिया गया है। <Cite refs={[“turn710611search1″,”turn710611search0”]}/>
इस निर्णय से किसानों को खेती के महत्वपूर्ण समय में मजदूर उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है। वहीं, ग्रामीण रोजगार योजना के तहत काम करने वाले श्रमिकों को इस दौरान कृषि कार्यों में रोजगार तलाशना होगा। हालांकि, इस अवधि में रोजगार योजना के तहत काम बंद रहने का मतलब यह नहीं है कि सभी प्रशासनिक गतिविधियां भी बंद रहेंगी।
1 से 20 नवंबर तक क्यों बंद रहेंगे काम?
नवंबर का महीना उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान कई क्षेत्रों में धान की कटाई और गेहूं की बुवाई का काम तेजी से चलता है। दोनों कृषि गतिविधियों के लिए पर्याप्त श्रमिकों की जरूरत होती है।
धान की कटाई समय पर पूरी करना जरूरी होता है। इसके बाद खेतों को अगली फसल के लिए तैयार किया जाता है। इसी दौरान गेहूं की बुवाई भी शुरू हो जाती है। ऐसे में यदि ग्रामीण श्रमिक दूसरे कार्यों में व्यस्त रहते हैं, तो किसानों को मजदूरों की उपलब्धता में परेशानी हो सकती है।
इसी स्थिति को देखते हुए शासन ने कृषि कार्यों के चरम मौसम में ग्रामीण रोजगार योजना के कामों को निलंबित रखने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गांवों में उपलब्ध श्रमिक खेती के जरूरी कामों में भाग ले सकें।
इस व्यवस्था के तहत निर्धारित अवधि में योजना के अंतर्गत कोई नया काम शुरू करने, स्वीकृत करने या निष्पादित करने पर रोक रहेगी। इसलिए संबंधित अधिकारियों और ग्राम पंचायतों को पहले से अपनी कार्ययोजना तैयार करनी होगी।
पहले क्या था कार्यक्रम, अब क्या बदला?
उत्तर प्रदेश शासन ने 22 जुलाई 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कृषि कार्यों के चरम मौसम की अधिसूचना जारी की थी। इसमें धान की रोपाई, धान की कटाई और गेहूं की बुवाई तथा गेहूं की कटाई के लिए अलग-अलग अवधि निर्धारित की गई थी।
पहले कार्यक्रम के अनुसार, धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के लिए 15 अक्टूबर से 5 नवंबर तक कामों के निलंबन की अवधि तय थी। बाद में इसमें संशोधन किया गया। नई व्यवस्था में संबंधित अवधि 1 नवंबर से 20 नवंबर कर दी गई है।
इस बदलाव का सीधा संबंध कृषि कार्यों के समय से है। शासन का उद्देश्य खेती के व्यस्त मौसम में श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही पहले की अधिसूचना के अन्य प्रावधान और शर्तें यथावत रहने की जानकारी दी गई है।
इसलिए संबंधित अधिकारियों को केवल संशोधित अवधि में बदलाव करना होगा। बाकी निर्देशों का पालन पहले की तरह सुनिश्चित करना होगा।
किसानों को क्या फायदा मिलने की उम्मीद है?
ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के दौरान मजदूरों की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहती है। धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के समय एक साथ कई काम करने पड़ते हैं। ऐसे में पर्याप्त श्रमिक नहीं मिलने पर किसानों को परेशानी हो सकती है।
सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण श्रमिकों को कृषि कार्यों के लिए उपलब्ध कराना है। इससे किसानों को कटाई और बुवाई के जरूरी काम समय पर पूरे करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, इसका वास्तविक असर स्थानीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा। अलग-अलग जिलों में फसलों की स्थिति, मौसम और श्रमिकों की उपलब्धता अलग हो सकती है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि इस फैसले से हर किसान को समान लाभ मिलेगा।
फिर भी, कृषि कार्यों के चरम समय में ग्रामीण रोजगार योजना के काम रोकने का उद्देश्य श्रमबल को खेती की ओर उपलब्ध कराना है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित गांवों में आदेश का सही तरीके से पालन हो।
ग्रामीण मजदूरों पर क्या पड़ेगा असर?
इस फैसले का असर उन श्रमिकों पर भी पड़ेगा, जो ग्रामीण रोजगार योजना के तहत काम करते हैं। 1 से 20 नवंबर तक निर्धारित अवधि में योजना के अंतर्गत श्रमप्रधान कार्य नहीं कराए जाएंगे।
शासन की अधिसूचना में ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों को निर्देश दिया गया है कि इस अवधि की जानकारी श्रमिकों तक पहुंचाई जाए। इससे उन्हें पहले से पता रहेगा कि निर्धारित दिनों में योजना के तहत काम उपलब्ध नहीं होगा और उन्हें कृषि कार्यों में रोजगार तलाशने की अपेक्षा की जाएगी। <Cite refs={[“turn710611search1”]}/>
हालांकि, सभी श्रमिकों को खेतों में काम मिलना सुनिश्चित नहीं माना जा सकता। स्थानीय स्तर पर कृषि कार्यों की मांग और मजदूरों की उपलब्धता के अनुसार स्थिति अलग-अलग हो सकती है।
इसलिए ग्रामीण श्रमिकों को अपने क्षेत्र में कृषि कार्यों की उपलब्धता की जानकारी रखना उपयोगी होगा। वहीं, पंचायत स्तर पर आदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार जरूरी है, ताकि श्रमिकों को समय रहते बदलाव की जानकारी मिल सके।
क्या इस दौरान सभी सरकारी काम बंद रहेंगे?
नहीं। अधिसूचना में निर्धारित अवधि के दौरान रोजगार योजना के कार्यों पर रोक लगाई गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि योजना से जुड़े सभी प्रशासनिक और नियोजन संबंधी काम भी बंद रहेंगे।
आदेश के अनुसार, प्रशासनिक गतिविधियां और योजना बनाने से जुड़े कार्य जारी रह सकते हैं। इसी तरह, अधिसूचित अवधि से पहले देय बेरोजगारी भत्ते और मजदूरी में देरी के लिए लागू मुआवजे से जुड़े प्रावधान भी जारी रहेंगे।
इसलिए योजना के तहत कामों के निलंबन और प्रशासनिक कामकाज के बीच अंतर समझना जरूरी है। निर्धारित अवधि में नए कार्य शुरू करने, उन्हें स्वीकृत करने या निष्पादित करने पर रोक रहेगी, जबकि अधिसूचना में स्पष्ट रूप से जारी रखी गई गतिविधियां चलती रहेंगी।
आदेश का पालन नहीं करने पर क्या होगा?
शासन ने अधिसूचित अवधि के दौरान नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को दी है। ग्राम पंचायतों की वार्षिक कार्ययोजना तैयार करते समय भी इस अवधि को ध्यान में रखना होगा।
अधिसूचना के अनुसार, प्रतिबंधित अवधि में नियमों का उल्लंघन करके काम कराने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। नियमित कर्मचारियों के मामले में सरकारी नियमों के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। वहीं, संविदा या आउटसोर्स कर्मचारियों के मामलों में सेवा समाप्त करने जैसी कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। <Cite refs={[“turn710611search1”]}/>
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कृषि कार्यों के लिए निर्धारित समय में योजना के तहत प्रतिबंधित कार्य न कराए जाएं। संबंधित अधिकारियों को आदेश की जानकारी ग्राम पंचायतों तक पहुंचानी होगी और उसके पालन की निगरानी करनी होगी।
आगे क्या करना होगा?
उत्तर प्रदेश में 1 से 20 नवंबर 2026 तक ग्रामीण रोजगार योजना के कामों का निलंबन किसानों और ग्रामीण श्रमिकों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। किसानों को इस अवधि में धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के लिए श्रमिकों की व्यवस्था करनी होगी। वहीं, योजना से जुड़े अधिकारियों को प्रतिबंधित अवधि के दौरान आदेश का पालन सुनिश्चित करना होगा।
ग्राम पंचायतों को भी श्रमिकों को पहले से जानकारी देनी होगी, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे। इसके अलावा, निर्धारित अवधि के बाद योजना के कामों को लागू कार्यक्रम और संबंधित निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा।
फिलहाल शासन ने कृषि कार्यों के चरम मौसम को देखते हुए निलंबन अवधि में बदलाव किया है। 1 से 20 नवंबर तक योजना के तहत काम नहीं होंगे, ताकि ग्रामीण श्रमिक खेती के जरूरी कामों में उपलब्ध हो सकें। इस फैसले का वास्तविक असर किसानों और मजदूरों पर स्थानीय स्तर पर श्रमिकों की मांग और उपलब्धता के आधार पर सामने आएगा।
