लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की तैयारियों के बीच मतदाता सूची पुनरीक्षण-2027 को लेकर निर्वाचन आयोग ने अहम निर्देश जारी किए हैं। इस प्रक्रिया में जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर आयोग की पूर्व अनुमति के बिना रोक रहेगी। यह व्यवस्था मतदाता सूची के आलेख्य प्रकाशन से लेकर अंतिम प्रकाशन तक लागू रहेगी। आयोग का उद्देश्य पुनरीक्षण प्रक्रिया में निरंतरता बनाए रखना और मतदाता सूची को पारदर्शी तरीके से तैयार कराना है।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, मतदाता सूची तैयार करने, उसमें संशोधन करने और उसे अपडेट करने के कार्य में लगे अधिकारियों का स्थानांतरण निर्वाचन आयोग की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा। यह निर्देश जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों समेत पुनरीक्षण कार्य से जुड़े अन्य अधिकारियों पर भी लागू होगा।
इस प्रक्रिया का पहला बड़ा पड़ाव 12 नवंबर 2026 को निर्धारित किया गया है। इसी दिन मतदाता सूची का आलेख्य यानी ड्राफ्ट प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद मतदाता अपने नाम, पते और अन्य विवरणों की जांच कर सकेंगे। यदि किसी जानकारी में गलती हो या पात्र मतदाता का नाम सूची में शामिल न हो, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दर्ज कराई जा सकेगी।
12 नवंबर को जारी होगी आलेख्य मतदाता सूची
निर्वाचन आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027 (Special Summary Revision-2027) के तहत 12 नवंबर को मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन होगा। यह प्रक्रिया एक जनवरी 2027 की अर्हता तिथि के आधार पर संचालित की जा रही है।
आलेख्य मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद नागरिक अपने नाम और अन्य विवरणों की जांच कर सकेंगे। इसके बाद दावे और आपत्तियां प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू होगी। आयोग ने इसके लिए 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक की अवधि निर्धारित की है।
इस दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, विवरण में सुधार कराने और अन्य पात्र बदलावों के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार आवेदन किए जा सकेंगे। प्राप्त दावों और आपत्तियों का निस्तारण 28 दिसंबर 2026 तक किया जाना है। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित की जाएगी।
अंतिम प्रकाशन तक क्यों लागू रहेगी ट्रांसफर पर रोक?
मतदाता सूची पुनरीक्षण एक समयबद्ध प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसमें बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहते हैं। इनके जिम्मे मतदाता विवरणों की जांच, संशोधन, दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया तथा संबंधित रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना जैसे काम होते हैं।
ऐसे में प्रक्रिया के बीच अधिकारियों के तबादले होने पर काम की निरंतरता प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग ने पुनरीक्षण से जुड़े अधिकारियों के स्थानांतरण पर पूर्व अनुमति की शर्त लगाई है।
निर्देशों के अनुसार, पुनरीक्षण कार्य से जुड़े पदों को खाली भी नहीं छोड़ा जाना चाहिए। जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी जैसे पदों पर आवश्यक व्यवस्था बनाए रखना संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
यदि किसी अधिकारी का स्थानांतरण अपरिहार्य हो जाता है, तो इसके लिए आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेनी होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम तय समयसीमा में पूरा हो।
जनप्रतिनिधियों और मतदाताओं के लिए क्या मायने?
मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का बुनियादी हिस्सा होती है। इसमें पात्र नागरिकों के नाम शामिल होना और गलत विवरणों का समय पर सुधार होना जरूरी है। इसलिए पुनरीक्षण के दौरान प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने को महत्वपूर्ण माना जाता है।
आयोग के निर्देशों का असर उन अधिकारियों की तैनाती पर पड़ेगा, जो मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन के कार्य से जुड़े हैं। सामान्य प्रशासनिक तबादलों के बजाय अब इस विशेष कार्य से जुड़े अधिकारियों के स्थानांतरण के लिए आयोग की पूर्व अनुमति जरूरी होगी।
मतदाताओं के लिए भी यह अवधि महत्वपूर्ण है। आलेख्य सूची प्रकाशित होने के बाद उन्हें अपने नाम और विवरण की जांच करनी चाहिए। यदि नाम छूटा हुआ है या किसी जानकारी में गलती है, तो निर्धारित समयसीमा के भीतर उचित आवेदन किया जा सकता है।
हालांकि, मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने का निर्णय लागू नियमों और सत्यापन प्रक्रिया के अनुसार ही होगा। केवल आवेदन करने से किसी बदलाव को स्वतः मंजूरी नहीं मिल जाती।
कानूनी आधार क्या है?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत मतदाता सूची तैयार करने, संशोधित करने और अपडेट करने में लगे अधिकारी इस अवधि में निर्वाचन आयोग के प्रतिनियोजन पर माने जाते हैं। इस दौरान वे आयोग के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासनात्मक अधिकार के अधीन कार्य करते हैं।
इसी कानूनी व्यवस्था के आधार पर आयोग ने संबंधित अधिकारियों के स्थानांतरण के लिए पूर्व अनुमति की शर्त लागू की है। इसका उद्देश्य पुनरीक्षण कार्य के दौरान जिम्मेदारी और जवाबदेही बनाए रखना है।
आयोग ने संबंधित विभागों को निर्देशों की जानकारी देने की भी बात कही है। इससे प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की तैनाती और पुनरीक्षण कार्य के बीच तालमेल बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अंतिम मतदाता सूची से पहले इन तारीखों पर रहेगी नजर
मतदाता सूची पुनरीक्षण-2027 के कार्यक्रम में नवंबर से जनवरी तक कई महत्वपूर्ण चरण निर्धारित किए गए हैं। इन तारीखों के आधार पर पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
- 12 नवंबर 2026: आलेख्य मतदाता सूची का प्रकाशन।
- 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026: दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि।
- 28 दिसंबर 2026: दावों और आपत्तियों के निस्तारण की निर्धारित समयसीमा।
- 4 जनवरी 2027: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन।
इस पूरी अवधि में पुनरीक्षण कार्य से जुड़े अधिकारियों के तबादले के लिए निर्वाचन आयोग की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। संबंधित विभागों को निर्देशों का पालन करते हुए पदों पर आवश्यक व्यवस्था बनाए रखनी होगी।
फिलहाल उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण-2027 की तैयारियां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही हैं। 12 नवंबर को आलेख्य सूची के प्रकाशन के बाद मतदाताओं को अपने विवरण जांचने का अवसर मिलेगा। वहीं, अधिकारियों के तबादलों पर रोक से आयोग पुनरीक्षण कार्य को तय समयसीमा में पूरा करने और प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
