“उत्तर प्रदेश में होम्योपैथिक दवाओं की खरीद दरों में दो से छह गुना तक अंतर मिलने पर मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों और जिला अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। अब खरीद जेम पोर्टल से होगी।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी होम्योपैथिक चिकित्सा संस्थानों के लिए दवाओं की खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। अलग-अलग संस्थानों में दवाओं की खरीद दरों में दो से छह गुना तक अंतर मिलने के बाद विभाग ने कार्रवाई शुरू की है। राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों और जिला होम्योपैथी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
होम्योपैथी निदेशालय ने टेंडर की शर्तों में कथित बदलाव के जरिए कुछ फर्मों को लाभ पहुंचाने के मामलों की जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं। इसके साथ ही सभी जिलों और मेडिकल कॉलेजों को दवाओं की खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से करने को कहा गया है।
दवाओं की कीमतों में छह गुना तक अंतर
विभाग को पिछले कई वर्षों से दवाओं की खरीद दरों में असमानता की शिकायतें मिल रही थीं। जांच के दौरान ‘1 एम डाइल्यूशन’ समेत कुछ दवाओं की कीमतों में छह गुना तक अंतर सामने आने की जानकारी दी गई है।
खरीद दरों में इतने बड़े अंतर को देखते हुए निदेशालय ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सरकारी धन से दवाओं की खरीद निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की जाए।
हालांकि, कीमतों में अंतर की वजह, संबंधित खरीद आदेशों और प्रत्येक मामले में जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।
टेंडर की शर्तों में बदलाव की भी होगी जांच
होम्योपैथी निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने जिला होम्योपैथी अधिकारियों और राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों को पत्र भेजकर खरीद नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
निदेशालय को ऐसे मामलों की जांच करने को कहा गया है, जिनमें टेंडर की शर्तों में फेरबदल करके खास फर्मों को फायदा पहुंचाने की आशंका है। इस जांच का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना है।
खरीद प्रक्रिया में तकनीकी या अन्य कठिनाई आने पर संबंधित अधिकारियों को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग के जिला स्तरीय महाप्रबंधक से सुझाव लेने के लिए भी कहा गया है।
अब जेम पोर्टल से होगी दवाओं की खरीद
निदेशालय ने सभी जिलों और मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया है कि दवाओं की खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से की जाए। सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर खरीद की प्रक्रिया अपनाने से निविदाओं, उपलब्ध विक्रेताओं और कीमतों की तुलना करने में मदद मिल सकती है।
इस व्यवस्था के जरिए खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और नियमों के पालन पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देशों के अनुसार खरीद प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।
खरीद में देरी पर भी तय होगी जवाबदेही
विभाग ने केवल कीमतों में अंतर और टेंडर प्रक्रिया की जांच तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। जिन जिलों में बजट उपलब्ध होने के बावजूद समय पर दवाओं की खरीद नहीं की गई, वहां के संबंधित अधिकारियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।
जेम पोर्टल के माध्यम से खरीद में एमएसएमई विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी की भूमिका नोडल अधिकारी के रूप में निर्धारित है। निदेशालय ने खरीद में देरी के कारणों की समीक्षा करने और लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।
नियमों की अनदेखी या अनावश्यक देरी पाए जाने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
सरकारी खरीद में पारदर्शिता पर जोर
दवाओं की खरीद में दरों का अंतर, टेंडर की शर्तों में कथित बदलाव और बजट होने के बावजूद खरीद में देरी जैसे मुद्दों के बाद विभाग ने निगरानी बढ़ाने का कदम उठाया है। अब जांच और नोटिस के जरिए संबंधित अधिकारियों से जवाब लिया जाएगा।
जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल विभाग का जोर दवाओं की खरीद निर्धारित प्रक्रिया के तहत कराने, सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता बनाए रखने और समय पर दवाएं उपलब्ध कराने पर है।
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