“केंद्र सरकार ने चीनी की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए 1 नवंबर 2026 से गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेस से बने एथेनॉल की खरीद पर रोक लगाने का फैसला किया है।“
नई दिल्ली। देश में चीनी की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एथेनॉल खरीद नीति में बदलाव किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक नवंबर 2026 से शुरू होने वाले नए आपूर्ति वर्ष में सरकारी तेल कंपनियों को गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेस से तैयार एथेनॉल की खरीद नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
इस फैसले के पीछे कमजोर मानसून और प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका को वजह बताया गया है। सरकार की प्राथमिकता फिलहाल चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि घरेलू बाजार में आपूर्ति पर दबाव न बढ़े और कीमतों को काबू में रखा जा सके।
कमजोर मानसून से गन्ने के उत्पादन पर असर की आशंका
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में गन्ने की खेती पर प्रतिकूल मौसम का असर पड़ने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो से जुड़ी मौसम परिस्थितियों और कमजोर मानसून के कारण चीनी उत्पादन घटने की संभावना है।
गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेस का इस्तेमाल चीनी के साथ-साथ एथेनॉल बनाने में भी किया जाता है। ऐसे में इनसे एथेनॉल उत्पादन जारी रहने पर चीनी निर्माण के लिए उपलब्ध कच्चे माल पर दबाव पड़ सकता है। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए सरकार ने आगामी आपूर्ति वर्ष की खरीद व्यवस्था में बदलाव किया है।
तेल कंपनियों ने जारी किया करीब 11 अरब लीटर एथेनॉल का टेंडर
नई नीति के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनियों ने आगामी आपूर्ति वर्ष के लिए लगभग 11 अरब लीटर एथेनॉल की मांग से संबंधित निविदा जारी की है। इसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), नुमालीगढ़ रिफाइनरी और मंगलोर रिफाइनरी (MRPL) शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, नए टेंडर में गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेस से बने एथेनॉल की आपूर्ति के लिए बोलियां स्वीकार नहीं की जाएंगी। इससे एथेनॉल उत्पादकों को दूसरे कच्चे माल के विकल्पों की ओर रुख करना पड़ सकता है।
अब मक्का, अतिरिक्त चावल और सी-हैवी मोलासेस पर जोर
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को जारी रखने के लिए सरकार ने दूसरे कच्चे माल से उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया है। नए खरीद ढांचे में प्रमुख विकल्प इस प्रकार हैं:
- सी-हैवी मोलासेस: चीनी निर्माण के बाद बचने वाला अपेक्षाकृत कम चीनी वाला उप-उत्पाद।
- मक्का: अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादन का एक प्रमुख विकल्प।
- खराब या अतिरिक्त खाद्यान्न: निर्धारित गुणवत्ता और सरकारी नियमों के अनुरूप उपयोग योग्य अनाज।
- भारतीय खाद्य निगम का अतिरिक्त चावल: उपलब्धता और लागू नीतिगत प्रावधानों के अनुसार इस्तेमाल किया जाने वाला चावल।
इस बदलाव से अनाज आधारित एथेनॉल संयंत्रों की भूमिका बढ़ सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर उत्पादन लागत, कच्चे माल की उपलब्धता और कंपनियों की उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगा।
चीनी मिलों को अतिरिक्त बिक्री की अनुमति
चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए एक अन्य कदम के तहत मिलों को अक्टूबर 2026 में उत्पादित चीनी की अतिरिक्त मात्रा बाजार में बेचने की विशेष अनुमति दिए जाने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह बिक्री नियमित मासिक कोटे के अतिरिक्त अक्टूबर और नवंबर में की जा सकेगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ाना है। यदि अतिरिक्त मात्रा बाजार में पहुंचती है, तो इससे उपलब्धता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, खुदरा कीमतों पर इसका असर मांग, उत्पादन और वितरण सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।
खाद्य सुरक्षा और हरित ऊर्जा के बीच संतुलन
भारत पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की नीति पर काम कर रहा है। इस दिशा में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य महत्वपूर्ण रहा है। लेकिन जब चीनी उत्पादन और घरेलू उपलब्धता पर दबाव की आशंका हो, तब एथेनॉल के लिए कच्चे माल का चयन भी अहम हो जाता है।
नई खरीद नीति के तहत सरकार चीनी की उपलब्धता और एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। इससे गन्ने पर आधारित एथेनॉल उत्पादकों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जबकि मक्का और अन्य अनाज आधारित उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाले उद्योगों के लिए अवसर बन सकते हैं।
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