“उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के सभी बेसिक शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच होगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक सप्ताह में नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक दस्तावेज जमा करने का आदेश दिया है।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियों की जांच को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने के मामलों की पहचान के लिए शिक्षकों के नियुक्ति और शैक्षणिक दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी। अदालत के आदेश के अनुसार, कक्षा एक से आठ तक के शिक्षकों को एक सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक प्रमाणपत्र जमा करने होंगे।
इस कार्रवाई का उद्देश्य संदिग्ध नियुक्तियों की पहचान करना और लंबे समय से लंबित सत्यापन प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। इससे पहले भी फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्तियों की जांच के लिए कई स्तरों पर अभियान चलाए गए, लेकिन दस्तावेजों के सत्यापन में देरी और विभागीय स्तर पर कार्रवाई धीमी रहने के कारण कई मामले लंबित रहे।
2018 से चल रही है फर्जी नियुक्तियों की जांच
प्रदेश में फर्जी शिक्षक नियुक्तियों की पड़ताल के लिए वर्ष 2018 में वर्ष 2011 से हुई भर्तियों के दस्तावेजों की जांच शुरू की गई थी। इसके लिए जिलों में अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समितियां गठित की गई थीं। इन समितियों में पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल थे।
एसटीएफ से मिले इनपुट के आधार पर 10 हजार से अधिक शिक्षकों के दस्तावेज संदेह के घेरे में आए थे। हालांकि, सभी मामलों में सत्यापन की प्रक्रिया अपेक्षित तेजी से पूरी नहीं हो सकी।
वर्ष 2020 में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अनामिका शुक्ला के दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग से जुड़ा मामला सामने आने के बाद फर्जी नियुक्तियों की जांच ने फिर जोर पकड़ा। इस प्रकरण में अलग-अलग जिलों में नियुक्तियों को लेकर सवाल उठे थे।
228 से अधिक संदिग्ध शिक्षकों की सूची सौंपी गई थी
जून 2022 में एसटीएफ ने 35 से अधिक जिलों में कार्यरत 228 से अधिक संदिग्ध शिक्षकों की सूची शिक्षा विभाग को सौंपी थी। इसके बाद हरदोई और कुशीनगर सहित कुछ जिलों में वेतन वसूली से संबंधित नोटिस जारी किए गए थे।
जांच में सबसे बड़ी चुनौतियों में दूसरी राज्यों की संस्थाओं और विश्वविद्यालयों से शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन शामिल रहा। बिहार, मध्य प्रदेश और आगरा के विश्वविद्यालयों से डिग्रियों की पुष्टि में देरी की शिकायतें सामने आई थीं। इसके कारण कई मामलों में कार्रवाई समय पर आगे नहीं बढ़ सकी।
बीएसए को तैयार करना होगा नियुक्ति और मेरिट का पूरा विवरण
नए आदेश के तहत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को शिक्षकों की नियुक्ति तिथि, शैक्षणिक योग्यता, पद के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता और चयन के दौरान प्राप्त मेरिट से जुड़ा ब्योरा तैयार करना होगा। यह जानकारी एसटीएफ को भेजी जानी है, ताकि संदिग्ध नियुक्तियों की जांच व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ सके।
कुछ मामलों में एसटीएफ की रिपोर्ट मिलने के बाद भी प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी की बात सामने आई थी। गोपनीय पत्र लीक होने और आरोपित शिक्षकों को अदालत से स्थगन आदेश मिलने के कारण भी जांच प्रभावित होने की जानकारी दी गई है।
लापरवाही पर तय हो सकती है अधिकारियों की जवाबदेही
दस्तावेजों के सत्यापन और संदिग्ध नियुक्तियों पर कार्रवाई में देरी को देखते हुए अब संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। निर्धारित प्रक्रिया के पालन में लापरवाही मिलने पर जवाबदेही तय किए जाने की संभावना है।
हालांकि, किसी शिक्षक का नाम जांच में शामिल होना अपने आप में फर्जी नियुक्ति साबित नहीं करता। अंतिम निष्कर्ष संबंधित प्रमाणपत्रों के सत्यापन और नियमानुसार की जाने वाली कार्रवाई के बाद ही निकाला जा सकेगा।
देश-दुनिया की हर बड़ी खबर, सबसे पहले और सबसे सटीक…
राजनीति, चुनाव, मनोरंजन, खेल और देश-प्रदेश की हर महत्वपूर्ण हलचल से अपडेट रहने के लिए जुड़े रहिए यूपी 24 नेटवर्क न्यूज़के साथ। सत्ता के गलियारों से लेकर आम जनता के मुद्दों तक, चुनावी बयानबाज़ी से लेकर खास पड़ताल और एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स तक—हम पहुंचाते हैं आपके लिए खबरों का सटीक विश्लेषण और हर खबर की पूरी जानकारी।
खबर वही, जो आप तक पहुंचे सबसे पहले और भरोसे के साथ।
यूपी 24 नेटवर्क न्यूज़— आपकी आवाज़, आपकी खबर, आपका भरोसा..