उत्तर प्रदेश के इटावा में सोशल मीडिया और यूट्यूब की दुनिया से जुड़ी अश्वी यादव उर्फ शिवांगी यादव एक नए कानूनी विवाद में घिर गई हैं। भरथना थाना पुलिस ने शिवांगी यादव समेत पांच नामजद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ कथित ब्लैकमेलिंग, निजी तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी देकर रुपये लेने और पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने से जुड़े आरोपों में मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई सीधे पुलिस शिकायत के आधार पर नहीं, बल्कि एसीजेएम प्रथम की अदालत के आदेश के बाद की गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपों और कथित वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू कर दी है।
मामले में शिकायतकर्ता जसवंतनगर क्षेत्र के गुलाबबाड़ी निवासी आशुतोष यादव उर्फ टोनू यादव हैं। उन्होंने अदालत में दिए अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि अश्वी उर्फ शिवांगी यादव और उनके साथ जुड़े अन्य लोगों ने निजी फोटो और दूसरी व्यक्तिगत सामग्री सार्वजनिक करने की धमकी देकर लंबे समय तक उनसे रुपये लिए। शिकायत में अप्रैल 2024 से मई 2026 तक अलग-अलग बैंक खातों और नकद माध्यम से लगभग 1 करोड़ 75 लाख 68 हजार 683 रुपये दिए जाने का दावा किया गया है। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस अब संबंधित बैंक खातों तथा लेनदेन के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर जिन लोगों को नामजद किया गया है, उनमें अश्वी यादव उर्फ शिवांगी यादव के अलावा नीतू सिंह यादव, शिवम यादव, गीतांजलि जादौन और अभिषेक यादव शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दो अज्ञात लोगों को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह पूरा मामला केवल एक बार रुपये मांगने तक सीमित नहीं था, बल्कि अलग-अलग समय पर लगातार आर्थिक दबाव बनाया जाता रहा।
आशुतोष यादव ने अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि निजी फोटो सार्वजनिक करने की धमकी के कारण उन्होंने कई बार रकम दी। शिकायत में दावा किया गया है कि भुगतान बैंक खातों, कुछ निजी खातों और नकद माध्यम से किया गया। शिकायतकर्ता ने कथित बैंक ट्रांजेक्शन से जुड़े दस्तावेज भी जांच के लिए उपलब्ध कराए हैं। अब पुलिस को यह निर्धारित करना होगा कि बताए गए लेनदेन वास्तव में हुए थे या नहीं और यदि हुए तो उनका उद्देश्य क्या था।
मामले में 15 नवंबर 2025 की एक कथित घटना का भी उल्लेख किया गया है। आशुतोष का आरोप है कि उस समय उनसे अतिरिक्त 58 लाख रुपये की मांग की गई। शिकायत के अनुसार इसके बाद अलग-अलग तारीखों पर 30 लाख, 18 लाख और 10 लाख रुपये दिए जाने का दावा किया गया है। इस कथित भुगतान का स्वरूप क्या था और इसे किन खातों में भेजा गया, इसकी जांच अब पुलिस के सामने महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
शिकायत में अभिषेक यादव पर भी अतिरिक्त रकम मांगने का आरोप लगाया गया है। आशुतोष के अनुसार उनसे 50 लाख रुपये और मांगे गए तथा मांग पूरी नहीं करने पर उन्हें दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी दी गई। यह आरोप अभी शिकायतकर्ता के बयान और अदालत में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र का हिस्सा है। पुलिस या अदालत ने अभी इन आरोपों को सिद्ध नहीं किया है।
पूरे विवाद में सबसे गंभीर आरोप तीन सितंबर 2026 की शाम से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के मुताबिक वह शाम करीब 7:30 बजे कार से भरथना क्षेत्र के जिंझुआ इलाके में अपने एक रिश्तेदार के घर जा रहे थे। आरोप है कि जिंझुआ पुल के पास बिना नंबर प्लेट की बाइक पर आए दो नकाबपोश लोगों ने उनकी कार रोक ली।
आशुतोष का दावा है कि दोनों लोगों ने उनसे पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी और मांग पूरी नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। शिकायत के अनुसार उन्होंने तत्काल डायल 112 पर पुलिस से संपर्क करने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों नकाबपोश लोग वहां से भाग गए। इसी कथित घटना को पांच करोड़ रुपये की रंगदारी के आरोप का प्रमुख आधार बताया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने इससे पहले भी पुलिस अधिकारियों से मामले की शिकायत की थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद अदालत का रुख किया। इसके बाद एसीजेएम प्रथम के आदेश पर भरथना थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
भरथना थानाध्यक्ष विक्रम सिंह ने उपलब्ध जानकारी में पुष्टि की है कि न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है और अब मामले की जांच की जाएगी। इसका अर्थ यह है कि एफआईआर दर्ज होना जांच की शुरुआत है, आरोपों का न्यायिक रूप से सिद्ध होना नहीं। पुलिस को अब दोनों पक्षों के बयान, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल सामग्री और कथित घटनाओं से जुड़े दूसरे साक्ष्यों की जांच करनी होगी।
इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि शिवांगी यादव और आशुतोष यादव के बीच आरोप केवल एक तरफ से नहीं लगाए गए हैं। दोनों पक्ष पिछले कुछ समय से एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
सितंबर के अंतिम सप्ताह में शिवांगी यादव ने भी आशुतोष यादव और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायतें की थीं। शिवांगी ने आरोप लगाया था कि उन्हें ब्लैकमेल किया गया, निजी सामग्री के आधार पर दबाव बनाया गया और बाद में उन्हें हनी ट्रैप जैसे मामले में फंसाने की कोशिश की गई। उन्होंने अपनी सुरक्षा और कार्रवाई की मांग भी उठाई थी। शिवांगी की ओर से लगाए गए इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और वे अलग जांच तथा विवाद का हिस्सा हैं।
इसके बाद 29 सितंबर की रात शिवांगी यादव के घर के बाहर कथित फायरिंग का मामला सामने आया। उनकी शिकायत पर फ्रेंड्स कॉलोनी थाना पुलिस ने जिला पंचायत सदस्य सोनू यादव, उनके भाई आशुतोष उर्फ टोनू यादव और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। शिवांगी ने आरोप लगाया था कि उनके घर के पास फायरिंग की गई और इससे पहले उन्हें तथा परिवार के सदस्यों को जान से मारने की धमकियां भी मिली थीं।
इस फायरिंग मामले में पुलिस ने बाद में एक बाल अपचारी को भी पकड़ा। पुलिस ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर सामने आए वीडियो के आधार पर उसकी पहचान करने और कार्रवाई करने की बात कही थी। इसका मतलब है कि वर्तमान वसूली और ब्लैकमेलिंग वाला मुकदमा एक ऐसे विवाद के बीच दर्ज हुआ है जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ पहले से अलग-अलग आपराधिक आरोप लगा चुके हैं।
इसी कारण पूरे मामले को केवल एक पक्ष के आरोपों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाना उचित नहीं होगा। शिवांगी यादव के खिलाफ अब एफआईआर दर्ज हो चुकी है और अदालत के आदेश पर पुलिस जांच कर रही है, लेकिन एफआईआर में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।
इसी तरह शिवांगी द्वारा आशुतोष और अन्य लोगों पर लगाए गए फायरिंग, धमकी और ब्लैकमेलिंग के आरोप भी अपनी अलग पुलिस और कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। दोनों मामलों में जांच पूरी होने और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होने के बाद ही वास्तविक घटनाक्रम अधिक स्पष्ट हो सकेगा।
शिवांगी यादव को सोशल मीडिया पर अश्वी यादव के नाम से भी जाना जाता है। वह इटावा क्षेत्र की सोशल मीडिया क्रिएटर और यूट्यूबर के रूप में सक्रिय रही हैं। उनके वीडियो और सोशल मीडिया गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में लोग उन्हें ऑनलाइन जानते हैं। वर्तमान एफआईआर में उनकी ऑनलाइन पहचान से अधिक महत्वपूर्ण उनके खिलाफ लगाए गए वित्तीय और आपराधिक आरोप हैं, जिनकी पुलिस को अब जांच करनी है।
आशुतोष की ओर से लगाए गए आरोपों में कथित निजी फोटो और बातचीत का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किए जाने का दावा प्रमुख है। डिजिटल सामग्री से जुड़े ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों के सामने सामान्य तौर पर मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, क्लाउड बैकअप, सोशल मीडिया मैसेज, कॉल रिकॉर्ड और बैंकिंग लेनदेन जैसे डिजिटल साक्ष्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
यदि शिकायतकर्ता ने कथित भुगतान बैंक माध्यम से किए हैं तो पुलिस संबंधित खातों के विवरण, लाभार्थियों की पहचान और रकम के आगे के इस्तेमाल की जांच कर सकती है। केवल किसी खाते में पैसे भेजे जाने से अपने आप वसूली साबित नहीं होती। जांच में यह भी स्पष्ट करना होगा कि लेनदेन किस कारण से किए गए थे और क्या उनका संबंध शिकायत में बताई गई धमकियों से था।
इसी तरह नकद भुगतान से जुड़े दावों की पुष्टि अपेक्षाकृत कठिन हो सकती है। इसके लिए परिस्थितिजन्य साक्ष्य, गवाह, बातचीत और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
पांच करोड़ रुपये की कथित रंगदारी वाली घटना में पुलिस के सामने अलग प्रकार की जांच होगी। शिकायत में जिंझुआ पुल के पास बिना नंबर प्लेट की बाइक पर दो नकाबपोश लोगों द्वारा कार रोके जाने का आरोप है। पुलिस को यह पता करना होगा कि घटना के समय शिकायतकर्ता का स्थान क्या था, आसपास सीसीटीवी उपलब्ध था या नहीं, मोबाइल लोकेशन रिकॉर्ड क्या बताते हैं और डायल 112 से संपर्क का कोई रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं।
यदि डायल 112 पर कॉल का प्रयास हुआ था तो उसका तकनीकी रिकॉर्ड शिकायतकर्ता के कथन की जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है। इसी तरह उस समय क्षेत्र में मौजूद मोबाइल नंबरों या वाहनों के डेटा की भी आवश्यकता पड़ सकती है।
यह पूरा मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें कथित ब्लैकमेलिंग, करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन, निजी तस्वीरों से जुड़ी धमकियां और दुष्कर्म के मुकदमे में फंसाने की कथित धमकी जैसे कई अलग आरोप शामिल हैं।
इसके बावजूद कानूनी प्रक्रिया में प्रत्येक आरोप के लिए अलग साक्ष्य आवश्यक होंगे। एक आरोप साबित होना दूसरे आरोप को अपने आप सिद्ध नहीं करता। पुलिस को पूरी घटनाओं की श्रृंखला और प्रत्येक आरोपी की अलग भूमिका स्थापित करनी होगी।
मामले में पांच नामजद लोगों के साथ दो अज्ञात आरोपियों का होना भी जांच को महत्वपूर्ण बनाता है। शिकायतकर्ता के अनुसार जिंझुआ पुल वाली घटना में बाइक पर आए लोगों की पहचान तत्काल स्पष्ट नहीं थी। पुलिस को जांच के दौरान यह पता करना होगा कि वे कौन थे और क्या उनका नामजद आरोपियों से कोई संबंध था।
इस विवाद में लगातार सामने आ रही परस्पर एफआईआर और आरोपों के कारण जांच एजेंसियों के सामने निष्पक्ष रूप से दोनों पक्षों के दावों को जांचने की चुनौती भी रहेगी। एक तरफ आशुतोष यादव ने निजी तस्वीरों के आधार पर करोड़ों रुपये की कथित वसूली और पांच करोड़ रुपये की रंगदारी का आरोप लगाया है, जबकि दूसरी तरफ शिवांगी यादव ने स्वयं ब्लैकमेलिंग, धमकी और अपने घर पर फायरिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना संभव नहीं है कि दोनों पक्षों के आरोपों में से कौन से पूरी तरह सही हैं। इस संबंध में पुलिस जांच, डिजिटल और बैंकिंग साक्ष्य तथा बाद की न्यायिक प्रक्रिया निर्णायक होगी।
अदालत के आदेश पर एफआईआर दर्ज होने का कानूनी महत्व यह है कि अब पुलिस को शिकायत में लगाए गए आरोपों की औपचारिक जांच करनी होगी। जांच के दौरान संबंधित लोगों से पूछताछ की जा सकती है और साक्ष्य जुटाए जा सकते हैं। इसके बाद ही पुलिस यह तय करेगी कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सामग्री है या नहीं।
एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आरोपी को दोषी नहीं माना जाता। भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था में दोष सिद्ध करने की जिम्मेदारी जांच और अभियोजन के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करती है और अंतिम निर्णय अदालत द्वारा किया जाता है।
इस कारण सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और आरोपों को भी जांच पूरी होने से पहले अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
फिलहाल भरथना पुलिस ने अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया है और कथित वित्तीय लेनदेन तथा पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता की ओर से बैंक ट्रांजेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि बताए गए करीब 1.75 करोड़ रुपये के लेनदेन वास्तव में किस संदर्भ में हुए, अतिरिक्त रकम मांगने के आरोपों के पीछे क्या साक्ष्य मौजूद हैं और पांच करोड़ रुपये की कथित रंगदारी वाली घटना की पुष्टि किन तथ्यों से होती है।
इसके साथ ही शिवांगी यादव द्वारा पूर्व में लगाए गए आरोप और उनके घर पर हुई कथित फायरिंग का मामला अलग पुलिस जांच का हिस्सा बना हुआ है। इससे दोनों पक्षों के बीच विवाद की जटिलता और बढ़ जाती है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि अश्वी उर्फ शिवांगी यादव समेत पांच नामजद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ एसीजेएम प्रथम के आदेश पर भरथना थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत में करीब 1 करोड़ 75 लाख 68 हजार रुपये कथित रूप से लेने और बाद में पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।