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काठमांडू: नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने लोकप्रिय ट्रेकिंग क्षेत्र में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मध्य नेपाल के गोरखा जिले में भूस्खलन के कारण बुढ़ी गंडकी नदी का प्रवाह बाधित हुआ और बाद में नदी का पानी आसपास के इलाकों में फैल गया। इस घटना के बाद 100 से अधिक विदेशी ट्रेकर्स अलग-अलग स्थानों पर फंस गए हैं। कई ट्रेकिंग रास्ते और पुल बह जाने से उनका सुरक्षित लौटना मुश्किल हो गया है।
नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, बचाव अभियान के दौरान 96 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें नौ विदेशी नागरिक शामिल हैं। हालांकि, 100 से अधिक विदेशी ट्रेकर्स के अब भी अलग-अलग स्थानों पर फंसे होने की जानकारी दी गई है। सेना के नेतृत्व में बचाव अभियान जारी है। शुरुआती रिपोर्टों में इस घटना में किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन पांच स्थानीय ग्रामीणों का संपर्क नहीं हो पा रहा था। (Reuters)
भूस्खलन के बाद नदी में आया उफान
रिपोर्टों के मुताबिक, रविवार को गोरखा जिले में भूस्खलन के कारण बुढ़ी गंडकी नदी का रास्ता अस्थायी रूप से अवरुद्ध हो गया था। नदी में पानी जमा होने के बाद जब अवरोध टूटा, तो पानी तेज बहाव के साथ नीचे की ओर बढ़ा। इससे नदी के किनारे के क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए।
अचानक पानी बढ़ने से कई पैदल रास्ते, पुल और स्थानीय संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हुए। कुछ स्थानों पर घरों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। बाढ़ के कारण ट्रेकिंग मार्गों पर आवाजाही बाधित हो गई, जिससे विदेशी पर्यटक और स्थानीय लोग अलग-अलग स्थानों पर फंस गए।
अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (ICIMOD) के प्रारंभिक आकलन में भी भूस्खलन से नदी का अस्थायी रूप से रुकना और बाद में पानी का अचानक बहना संभावित कारण बताया गया है। घटना की पूरी वजह का आकलन अभी जारी है।
मनास्लु ट्रेकिंग रूट पर फंसे पर्यटक
गोरखा जिला नेपाल के लोकप्रिय मनास्लु ट्रेकिंग क्षेत्र के लिए जाना जाता है। यहां देश-विदेश से पर्यटक पहाड़ी रास्तों और प्राकृतिक दृश्यों का अनुभव करने पहुंचते हैं।
बाढ़ के बाद कई ट्रेकिंग ट्रेल और पुल क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे पर्यटकों का आगे बढ़ना या वापस लौटना कठिन हो गया। मनास्लु संरक्षण क्षेत्र परियोजना के अधिकारी भुवन राज ओझा के अनुसार, 100 से अधिक विदेशी ट्रेकर्स अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए थे।
अधिकारियों ने बताया कि कुछ ट्रेकर्स सुरक्षित स्थानों पर रुककर रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि जो लोग वापस लौटना चाहते हैं, उन्हें निकालने के लिए बचाव सहायता की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक, रास्ते में मौजूद कुछ रेस्तरां और चायघर सुरक्षित बताए गए हैं, लेकिन इससे पूरे ट्रेकिंग क्षेत्र को सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
96 लोगों को बचाया गया, सेना का अभियान जारी
नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 96 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें नौ विदेशी नागरिक शामिल हैं। राहत और बचाव अभियान में सेना तथा संबंधित एजेंसियां लगी हुई हैं।
बचाव दलों के सामने चुनौती यह है कि कई स्थानों पर रास्ते और पुल क्षतिग्रस्त हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बहाव, ढीली मिट्टी और भूस्खलन का खतरा राहत कार्य को कठिन बना सकता है।
पांच स्थानीय ग्रामीणों का संपर्क नहीं हो पाने की सूचना भी सामने आई है। प्रशासन उनकी तलाश और प्रभावित इलाकों का आकलन कर रहा है। फिलहाल अधिकारियों ने इस घटना में किसी मौत की पुष्टि नहीं की है।
तीन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान
बाढ़ का असर स्थानीय बुनियादी ढांचे पर भी पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, पानी और मलबे के बहाव से तीन जलविद्युत संयंत्र प्रभावित हुए हैं। इससे क्षेत्र में बिजली उत्पादन और स्थानीय सुविधाओं पर असर पड़ने की आशंका है।
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में जलविद्युत परियोजनाएं नदियों और जलधाराओं पर निर्भर करती हैं। ऐसे में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और मलबे का बहाव बिजली उत्पादन से जुड़े ढांचे को नुकसान पहुंचा सकता है।
प्रभावित परियोजनाओं की क्षति और बहाली में लगने वाले समय का विस्तृत आकलन अभी सामने आना बाकी है।
ट्रेकर्स और स्थानीय लोगों के लिए चेतावनी
बचाव अधिकारियों की प्राथमिकता फंसे हुए पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और प्रभावित गांवों से संपर्क बहाल करना है। ट्रेकिंग क्षेत्र में मौजूद लोगों को स्थानीय प्रशासन और बचाव एजेंसियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
पहाड़ी रास्तों पर पानी कम दिखाई देने के बावजूद अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना रह सकता है। क्षतिग्रस्त पुलों या बंद ट्रेल से गुजरने की कोशिश करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
नेपाल के इस क्षेत्र में आगे यात्रा करने की योजना बना रहे पर्यटकों को मार्ग की स्थिति और स्थानीय चेतावनियों की पुष्टि किए बिना यात्रा शुरू नहीं करनी चाहिए।
निष्कर्ष
मध्य नेपाल के गोरखा जिले में भूस्खलन से नदी का प्रवाह बाधित होने के बाद आई बाढ़ ने मनास्लु ट्रेकिंग क्षेत्र में बड़ी मुश्किलें पैदा की हैं। 100 से अधिक विदेशी ट्रेकर्स के फंसे होने की जानकारी है, जबकि 96 लोगों को बचाया जा चुका है। सेना और अन्य एजेंसियों का बचाव अभियान जारी है।
फिलहाल प्राथमिकता फंसे हुए पर्यटकों तक पहुंचने, संपर्क टूटे स्थानीय लोगों की तलाश करने और क्षतिग्रस्त रास्तों की स्थिति का आकलन करने की है। हालात बदलने के साथ प्रभावित लोगों और बचाव अभियान से जुड़ी संख्या में भी बदलाव हो सकता है।
यह खबर 12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित Reuters की रिपोर्ट पर आधारित है।