लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। सुबह कार्यालय जाने का समय हो या शाम को घर लौटने की भीड़, शहर के कई प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर वाहन चालकों को जाम का सामना करना पड़ता है। दूसरी ओर, यातायात नियमों के उल्लंघन पर चालान काटने की कार्रवाई भी जारी है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि नियमों के पालन के साथ-साथ जाम से राहत दिलाने पर कितना प्रभावी काम हो रहा है।
पॉलिटेक्निक, कमता, चिनहट और अहिमामऊ जैसे क्षेत्रों में यातायात का दबाव पहले भी रिपोर्टों में सामने आ चुका है। दैनिक जागरण की 5 अक्टूबर की रिपोर्ट में पॉलिटेक्निक चौराहे पर अवैध पार्किंग, गलत दिशा में चलने वाले वाहनों और सड़क किनारे बेतरतीब खड़े ऑटो-ई-रिक्शा को जाम की प्रमुख वजहों में शामिल किया गया था।
हालांकि, 12 अक्टूबर को शहर के सभी इलाकों में जाम की स्थिति और चालान की कार्रवाई के बीच सीधे संबंध को साबित करने वाले ताजा आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए यह मुद्दा यातायात व्यवस्था की प्रभावशीलता और जमीनी स्तर पर कार्रवाई के परिणामों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
पॉलिटेक्निक और कमता चौराहे पर क्यों लगता है जाम?
लखनऊ के पॉलिटेक्निक चौराहे पर अयोध्या रोड, गोमती नगर, इंदिरा नगर और हजरतगंज की ओर से आने वाला यातायात मिलता है। वाहनों का अधिक दबाव होने के कारण यहां यातायात को व्यवस्थित रखना बड़ी चुनौती है।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, चौराहे के आसपास गलत दिशा से आने वाले वाहन, बेतरतीब खड़े ऑटो और ई-रिक्शा तथा सड़क किनारे की गतिविधियां यातायात को प्रभावित करती हैं। कुछ स्थानों पर वाहन प्रतिबंधों के बावजूद प्रवेश कर जाते हैं, जिससे दूसरी दिशाओं से आने वाले वाहनों की आवाजाही बाधित होती है।
कमता चौराहे पर भी इसी तरह की समस्या रिपोर्ट की गई है। 2 अक्टूबर की रिपोर्ट में सड़क की सीमित चौड़ाई, बस अड्डे के आसपास वाहनों की आवाजाही और अनधिकृत वाहन स्टैंड को जाम की वजहों में शामिल किया गया था। इस मार्ग से अयोध्या की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यातायात का दबाव रहता है।
इन स्थानों पर केवल चालान काटना पर्याप्त नहीं है। जाम की वजह बनने वाली गतिविधियों को रोकने, वाहनों के ठहराव को नियंत्रित करने और चौराहों पर यातायात का प्रवाह बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी भी जरूरी है।
चालान की कार्रवाई जारी, लेकिन जाम पर नियंत्रण चुनौती
लखनऊ ट्रैफिक पुलिस अवैध पार्किंग, गलत दिशा में वाहन चलाने और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करती रही है। अगस्त में शहरव्यापी अभियान के दौरान 3,675 चालान किए गए थे और 59 वाहन जब्त किए गए थे। कार्रवाई में हेलमेट के बिना वाहन चलाने, अवैध पार्किंग और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसे उल्लंघन शामिल थे।
इसके अलावा, यातायात पुलिस ने पॉलिटेक्निक, कमता, आलमबाग, अहिमामऊ और कैसरबाग जैसे क्षेत्रों में अवैध पार्किंग के खिलाफ नियमित चालान की कार्रवाई की योजना बनाई थी। उद्देश्य सड़क पर खड़े वाहनों को हटाकर यातायात के लिए जगह उपलब्ध कराना था।
लेकिन किसी अभियान की सफलता केवल काटे गए चालानों की संख्या से तय नहीं होती। यह देखना भी जरूरी है कि कार्रवाई के बाद संबंधित सड़क पर जाम कम हुआ या नहीं, अवैध पार्किंग दोबारा शुरू हुई या नहीं और व्यस्त समय में यातायात कितनी आसानी से गुजर पा रहा है।
यदि किसी चौराहे पर बार-बार वही समस्या सामने आती है, तो वहां केवल उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के साथ स्थायी यातायात प्रबंधन की जरूरत भी होती है।
गलत दिशा में वाहन और अवैध पार्किंग बन रहे समस्या
शहर के व्यस्त मार्गों पर गलत दिशा में वाहन चलाना दुर्घटना के खतरे के साथ-साथ यातायात जाम की वजह भी बनता है। इसी तरह चौराहों के पास वाहन खड़े करके सवारी भरना, सड़क पर ऑटो-ई-रिक्शा रोकना और निर्धारित स्थानों के बाहर पार्किंग करना सड़क की उपलब्ध जगह कम कर देता है।
इसका असर उन वाहन चालकों पर भी पड़ता है जो यातायात नियमों का पालन करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे होते हैं। कई बार एक वाहन के गलत तरीके से रुकने से पीछे वाहनों की कतार लग जाती है और जाम आसपास की सड़कों तक फैल जाता है।
ऐसी परिस्थितियों में यातायात पुलिस की भूमिका केवल चालान काटने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। मौके पर मौजूद कर्मचारियों को जाम की स्थिति के अनुसार वाहनों को निकालने, अवरोध हटाने और जरूरत पड़ने पर यातायात को वैकल्पिक मार्ग पर भेजने की व्यवस्था भी करनी होती है।
तकनीक से निगरानी, फिर भी जमीनी व्यवस्था जरूरी
लखनऊ में ट्रैफिक प्रबंधन के लिए इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) और कैमरों का भी सहारा लिया जा रहा है। हिन्दुस्तान की 14 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पॉलिटेक्निक, कमता, आलमबाग और अहिमामऊ चौराहों पर कैमरों से निगरानी की व्यवस्था की गई थी। इसका उद्देश्य अवैध पार्किंग पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए सूचना देना था।
कैमरों और डिजिटल निगरानी से नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान करने