लखनऊ: गोमती नदी में आई बाढ़ से जूझ रहे लखनऊ के लोगों के लिए राहत के संकेत मिलने लगे हैं। नदी का जलस्तर घटने के साथ फैजुल्लागंज समेत कई प्रभावित इलाकों में पानी उतरना शुरू हो गया है। हालांकि, पानी कम होने के बाद भी लोगों की मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। लंबे समय तक जलभराव रहने के कारण घरों में गंदगी, कीचड़, सीवर टैंक भरने और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है
नगर निगम और जलकल विभाग ने प्रभावित इलाकों में सफाई अभियान की तैयारी शुरू कर दी है। फैजुल्लागंज में 10 हजार से अधिक मकानों के सीवर टैंक भरने की जानकारी सामने आई है। इनके पानी और गंदगी को निकालने के लिए 40 सुपर सक्शन मशीनें तैयार की गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, पानी पूरी तरह उतरने के बाद सफाई शुरू होगी और सभी सीवर टैंकों को साफ करने में कम से कम 20 दिन लग सकते हैं।
वहीं, गोमती नदी का जलस्तर घटने से प्रशासन को राहत कार्यों के अगले चरण की तैयारी का अवसर मिल रहा है। प्रभावित परिवारों के सामने अब घरों की सफाई, बिजली-पानी की बहाली और सुरक्षित तरीके से दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने की चुनौती है।
गोमती नदी का जलस्तर घटने से राहत की उम्मीद
लखनऊ में सितंबर के अंतिम सप्ताह से गोमती नदी के बढ़े जलस्तर के कारण निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए थे। नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश का पानी बाद में लखनऊ पहुंचा, जिससे कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की 11 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार शाम 6 बजे तक गोमती नदी का जलस्तर घटकर करीब 107.2 मीटर रह गया था। शुक्रवार के मुकाबले इसमें लगभग 6 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि जलस्तर चेतावनी के निशान 108.50 मीटर से नीचे था।
इस गिरावट से राहत की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन नदी के आसपास के सभी इलाकों से पानी एक साथ नहीं निकलता। निचले क्षेत्रों में पानी जमा रहने, नालों की निकासी और स्थानीय भौगोलिक स्थिति के कारण जलभराव लंबे समय तक बना रह सकता है।
इसलिए प्रशासन की प्राथमिकता अब नदी के जलस्तर पर निगरानी रखने के साथ-साथ प्रभावित बस्तियों से पानी निकालने और सफाई की व्यवस्था दुरुस्त करने की है।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट।
फैजुल्लागंज में 10 हजार से अधिक सीवर टैंक भरे
फैजुल्लागंज में बाढ़ का पानी उतरने के बाद सबसे बड़ी समस्याओं में से एक घरों के सीवर टैंकों की सफाई है। हिन्दुस्तान की 11 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम के सर्वे में क्षेत्र के 10 हजार से अधिक मकानों के सीवर टैंक भरे होने की जानकारी मिली है।
लंबे समय तक बाढ़ का पानी जमा रहने से घरों के सीवर टैंकों और कुछ सीवर लाइनों पर दबाव पड़ा है। ऐसे में पानी उतरने के बाद भी कई परिवारों के लिए शौचालयों का सामान्य इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है।
नगर निगम के जोन-3 के जोनल अधिकारी अजीत राय के अनुसार, पानी उतरने के बाद सीवर टैंकों की सफाई कराई जाएगी। इसके लिए 40 सुपर सक्शन मशीनें तैयार की गई हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि सभी टैंकों की सफाई में कम से कम 20 दिन लग सकते हैं।
यह अवधि पानी उतरने के बाद शुरू होने वाले सफाई कार्य से संबंधित है। वास्तविक समय इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने मकानों तक मशीनें पहुंच पाती हैं और जलनिकासी की स्थिति कैसी रहती है।
स्रोत: हिन्दुस्तान की रिपोर्ट।
पानी उतरने के बाद चलेगा सफाई अभियान
बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी उतरते ही कीचड़, कचरा और गंदगी की सफाई करना जरूरी होगा। लंबे समय तक पानी में डूबे रहने से घरों, सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी जमा हो सकती है।
नगर निगम ने प्रभावित इलाकों में सफाई, कीटनाशक छिड़काव और मच्छरों से बचाव के उपायों की तैयारी की है। पहले से चल रहे राहत अभियान के दौरान कुछ स्थानों पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, फॉगिंग और एंटी-लार्वा दवा का इस्तेमाल किया गया था। जहां कर्मचारियों का पहुंचना मुश्किल था, वहां ड्रोन से छिड़काव भी कराया गया।
अब पानी घटने के साथ सफाईकर्मियों को गलियों और घरों
