नऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी की बाढ़ से प्रभावित इलाकों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में जलस्तर घटने लगा है, जिसका असर अगले 24 से 48 घंटों में लखनऊ में भी दिखाई देने की संभावना जताई गई है। हालांकि, शहर के कुछ निगरानी केंद्रों पर गुरुवार तक नदी का जलस्तर बढ़ रहा था। ऐसे में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता और राहत-बचाव अभियान जारी है।
हिन्दुस्तान टाइम्स की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, सीतापुर के भटपुरवा में गोमती का जलस्तर बुधवार रात 8 बजे 113.08 मीटर था, जो गुरुवार रात 8 बजे घटकर 113 मीटर रह गया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि ऊपरी क्षेत्रों में पानी घटने का असर धीरे-धीरे गौघाट, हनुमान सेतु और गोमती बैराज के निगरानी केंद्रों पर भी दिखाई देगा।
हालांकि, ऊपरी क्षेत्र में पानी कम होने का मतलब यह नहीं है कि लखनऊ में बाढ़ का खतरा तत्काल समाप्त हो गया है। नदी के पानी को शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरने में समय लगता है। इसके अलावा निचले इलाकों में जलभराव, नालों से पानी का उलटा प्रवाह और तटबंधों की स्थिति भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
गोमती नदी के जलस्तर में कब आएगी कमी?
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गोमती नदी के ऊपरी क्षेत्रों में जलस्तर घटने का रुझान लखनऊ के लिए राहत का संकेत है। विभाग का अनुमान है कि अगले 24 से 48 घंटों में शहर के निगरानी केंद्रों पर भी पानी घटने का असर दिखाई दे सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार शाम 8 बजे तक लखनऊ के तीन प्रमुख निगरानी केंद्रों पर जलस्तर इस प्रकार था:
- गोमती बैराज: 107.08 मीटर
- हनुमान सेतु: 107.30 मीटर
- गौघाट: 108.60 मीटर
इन तीनों केंद्रों पर दर्ज स्तर संबंधित खतरे के निशान से नीचे था। हालांकि, गुरुवार को तीनों स्थानों पर पिछले दिन के मुकाबले मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
गोमती बैराज पर जलस्तर 107.08 मीटर था, जबकि वहां खतरे का निशान 109.20 मीटर बताया गया। हनुमान सेतु पर खतरे का निशान 109.50 मीटर है। गौघाट के स्तर में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ये आंकड़े गुरुवार रात के हैं। शुक्रवार के नए आधिकारिक आंकड़ों के बिना यह दावा नहीं किया जा सकता कि शहर में जलस्तर लगातार घटने लगा है।
स्रोत: Hindustan Times की रिपोर्ट।
ऊपरी इलाकों में पानी घटने से क्यों मिलेगी राहत?
सितंबर के अंतिम सप्ताह में तराई क्षेत्र के कई जिलों में हुई भारी बारिश का पानी सहायक नदियों और नालों के जरिए गोमती नदी में पहुंचा था। इसके बाद नदी का जलस्तर बढ़ा और लखनऊ के निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए।
पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और हरदोई जैसे जिलों के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश का असर लखनऊ तक पहुंचने में समय लगा। इसी कारण राजधानी में लगातार बारिश नहीं होने के बावजूद गोमती का जलस्तर ऊंचा बना रहा।
अब ऊपरी इलाकों में पानी घटने से उम्मीद है कि नदी में आने वाले अतिरिक्त पानी का दबाव कम होगा। लेकिन इसका असर लखनऊ के अलग-अलग हिस्सों में एक ही समय पर दिखाई देना जरूरी नहीं है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ऊपरी क्षेत्रों से पानी का स्तर नीचे आने के बाद शहर के निगरानी केंद्रों पर इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देता है। इसलिए नदी के जलस्तर की नियमित निगरानी जारी रखना जरूरी है।
इकाना स्टेडियम और पलासियो मॉल के आसपास जलभराव
गोमती नदी के बढ़े हुए जलस्तर से गोमती नगर विस्तार, इकाना स्टेडियम और फीनिक्स पलासियो मॉल के आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की समस्या सामने आई थी। शहीद पथ की सर्विस लेन और कुछ संपर्क मार्गों पर भी पानी पहुंचा था।
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए पंप लगाए और नदी से नालों में पानी वापस आने वाले स्थानों को बंद करने के उपाय किए। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इकाना स्टेडियम के पीछे बौल्डर, रेत की बोरियों और मिट्टी की मदद से अवरोध तैयार किया गया था। प्रभावित सड़कों और नालों के आसपास पंप लगाकर पानी निकाला गया।
अधिकारियों ने प्रभावित स्थानों पर निगरानी के लिए नियंत्रण कक्ष भी बनाया। हालांकि, जलभराव पूरी तरह समाप्त होने और स्थिति सामान्य होने की पुष्टि क्षेत्रवार निरीक्षण के बाद ही की जा सकती है।
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत अभियान जारी
नदी का जलस्तर घटने की उम्मीद के बीच प्रशासन ने प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने का काम जारी रखा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 52 नावें तैनात की थीं।
जिलाधिकारी विशाख जी ने जेहटा, बरावन कलां, सैथा, हयात नगर, मुन्ना लाल खेड़ा और उमराई खेड़ा जैसे प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। जरूरतमंद परिवारों तक भोजन और पेयजल पहुंचाने के साथ राहत शिविरों में चिकित्सा और राजस्व विभाग की टीमों को तैनात किए जाने की जानकारी भी दी गई।
प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि पानी कम होने के बाद भी निचले इलाकों से जलनिकासी में समय लग सकता है। इसलिए राहत सामग्री, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है।
स्रोत: Times of India की रिपोर्ट।
क्या लखनऊ से बाढ़ का खतरा टल गया है?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि लखनऊ से बाढ़ का खतरा पूरी तरह टल गया है। ऊपरी क्षेत्रों में पानी घटने से राहत की संभावना जरूर बढ़ी है, लेकिन शहर के कुछ हिस्सों में जलभराव बना हुआ है और नदी के स्तर में कमी का असर अभी सभी निगरानी केंद्रों पर दर्ज नहीं हुआ था।
बाढ़ का प्रभाव केवल नदी के जलस्तर से तय नहीं होता। निचले इलाकों में जमा पानी, जलनिकासी की स्थिति, तटबंधों की मजबूती और नालों से होने वाला बैकफ्लो भी महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए लोगों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए और नदी के किनारे या जलभराव वाले रास्तों से गुजरते समय सावधानी बरतनी चाहिए। यदि किसी क्षेत्र में पानी तेजी से बढ़ता है या तटबंध में दरार दिखाई देती है, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना देनी चाहिए।
आगे क्या रहेगा प्रशासन का फोकस?
आने वाले 24 से 48 घंटे गोमती नदी के जलस्तर में बदलाव के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। प्रशासन और सिंचाई विभाग की निगरानी में मुख्य रूप से तीन बातों पर ध्यान रहेगा—ऊपरी क्षेत्रों में पानी का रुझान, लखनऊ के निगरानी केंद्रों पर जलस्तर और बाढ़ प्रभावित इलाकों में जलनिकासी।
इसके साथ ही इकाना स्टेडियम, पलासियो मॉल और गोमती नगर विस्तार जैसे क्षेत्रों में पानी दोबारा न भरने देने के लिए नालों और अवरोधों की निगरानी जरूरी होगी। प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था भी जारी रहनी चाहिए।
निष्कर्ष: लखनऊ में गोमती नदी के ऊपरी क्षेत्रों में जलस्तर घटने से राहत की उम्मीद जगी है। सिंचाई विभाग ने अगले 24 से 48 घंटों में शहर में भी इसका असर दिखाई देने की संभावना जताई है। लेकिन शुक्रवार के नए आधिकारिक आंकड़े और क्षेत्रवार स्थिति सामने आने तक यह कहना सही नहीं होगा कि गोमती का जलस्तर पूरे लखनऊ में घटने लगा है या बाढ़ का खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है।
यह खबर 9 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। जलस्तर और स्थानीय हालात तेजी से बदल सकते हैं, इसलिए प्रशासन की ताजा चेतावनियों और निर्देशों को प्राथमिकता दें।