संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को संसद परिसर के मकर द्वार के बाहर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी INDIA गठबंधन के सांसद आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की और NEET से जुड़े मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन किया। इस टकराव के चलते संसद के भीतर भी हंगामे के आसार बने रहे।
विपक्षी सांसदों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत INDIA गठबंधन के कई सांसद विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने हाथों में बैनर लेकर परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और जवाबदेही का मुद्दा उठाया।
दूसरी ओर NDA सांसदों ने विपक्ष पर NEET मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। सत्तापक्ष के सांसदों ने कहा कि सरकार इस मामले पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष बहस से बच रहा है। प्रदर्शन के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाए, जिससे संसद परिसर का माहौल काफी गरमा गया।
संसद के बाहर गरमाया राजनीतिक माहौल
मकर द्वार के बाहर दोनों पक्षों के सांसद अलग-अलग समूहों में एकत्र हुए। विपक्ष की ओर से “इस्तीफा दो”, “गद्दी छोड़ो” और “शर्म करो” जैसे नारे लगाए गए, जबकि NDA सांसदों ने विपक्ष पर युवाओं के मुद्दों का राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया और जवाबी नारेबाजी की।
संसद की कार्यवाही पर असर
संसद के बाहर जारी विरोध का असर दोनों सदनों की कार्यवाही पर भी देखने को मिला। विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग करता रहा, जबकि सरकार ने सदन के भीतर चर्चा के लिए अपनी तत्परता दोहराई। हंगामे के कारण कार्यवाही सुचारु रूप से चलने में बाधा आई।
सरकार और विपक्ष के अलग-अलग रुख
सरकार का कहना है कि परीक्षा से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। वहीं विपक्ष का आरोप है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है और जिम्मेदारी तय करते हुए ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक टकराव जारी है।
आगे क्या?
NEET और परीक्षा सुधार का मुद्दा मानसून सत्र के प्रमुख राजनीतिक विषयों में बना हुआ है। संभावना है कि आने वाले दिनों में भी सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस जारी रहेगी। सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा होती है या गतिरोध आगे भी बना रहता है।