राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को आंदोलन के तीसरे दिन पार्टी ने साफ कर दिया कि यदि केंद्र सरकार बातचीत करना चाहती है तो उसके प्रतिनिधियों को जंतर-मंतर आकर प्रदर्शनकारियों से बात करनी होगी। पार्टी ने सरकार के आवास या किसी अन्य स्थान पर बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
इधर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने राजधानी के 16 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया है। वहीं, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम बंगाल से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 20 अतिरिक्त कंपनियां यानी लगभग 2,000 जवान दिल्ली भेजे जा रहे हैं।
आंदोलन की अगुवाई कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने कहा कि उनका धरना तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और सरकार को प्रदर्शनकारियों के बीच आकर संवाद करना चाहिए। दूसरी ओर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राजधानी के संवेदनशील इलाकों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
सरकार के आवास पर नहीं, जंतर-मंतर में बातचीत की मांग
कॉकरोच जनता पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह सरकार के किसी मंत्री के आवास पर बातचीत के लिए नहीं जाएगी। पार्टी का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है तो उसे जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलनकारियों के बीच बातचीत करनी चाहिए।
पार्टी नेताओं का कहना है कि आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर किया जा रहा है। उनका दावा है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। यह पार्टी का दावा है।
16 मेट्रो स्टेशन बंद, यात्रियों को परेशानी
प्रदर्शन के बीच DMRC ने सुरक्षा कारणों से केंद्रीय दिल्ली के 16 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया। इन स्टेशनों पर ट्रेनों का ठहराव रोक दिया गया है, हालांकि कुछ प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर इंटरचेंज सुविधा जारी रखी गई है।
बंद किए गए प्रमुख स्टेशनों में राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, बाराखंभा रोड, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग सहित कुल 16 स्टेशन शामिल हैं। DMRC ने यात्रियों से यात्रा से पहले वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील की है।
मेट्रो स्टेशनों के बंद होने से कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में सड़क यातायात पर भी अतिरिक्त दबाव देखा गया।
बंगाल से बुलाई गईं CRPF की अतिरिक्त कंपनियां
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने CRPF की 20 अतिरिक्त कंपनियों को राजधानी भेजने का फैसला किया है। एक कंपनी में औसतन करीब 100 जवान होते हैं, इसलिए लगभग 2,000 अतिरिक्त जवान दिल्ली में तैनात किए जा रहे हैं।
इन जवानों की तैनाती संसद परिसर, जंतर-मंतर, केंद्रीय सचिवालय और अन्य संवेदनशील इलाकों में की जा सकती है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
आंदोलन के पीछे क्या है मुद्दा?
कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन कथित परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहा है। आंदोलनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित कई मांगों को लेकर पिछले कई सप्ताह से धरना दे रहे हैं।
सोमवार को “संसद चलो” मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। इसके बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया तथा विभिन्न मामलों में एफआईआर भी दर्ज की गई। बाद में हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई, लेकिन आंदोलन जारी रहा।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली एक तत्काल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की मांग की गई। हालांकि शीर्ष अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। इसके बाद भी आंदोलनकारी अपने प्रदर्शन पर डटे हुए हैं और आगे आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं।
राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। संसद मार्ग, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी व्यवस्था बढ़ा दी गई है। कई मार्गों पर यातायात भी प्रभावित हुआ है।
प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक रूप से प्रभावित क्षेत्रों में जाने से बचने और यातायात संबंधी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
आगे क्या?
कॉकरोच जनता पार्टी का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। वहीं सरकार की ओर से अब तक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया है। दोनों पक्षों के बीच औपचारिक बातचीत को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
यह एक विकसित होता घटनाक्रम है। आने वाले समय में सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और आंदोलनकारी पक्ष की ओर से नए आधिकारिक बयान या निर्णय सामने आ सकते हैं।