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CJP प्रदर्शन पर कंगना रनौत का निशाना, बोलीं- चुनाव लड़िए, सरकार चलाने का अधिकार जनता से चुनी सरकार को है

दिल्ली में CJP (Cockroach Janta Party) के संसद मार्च और प्रदर्शन के बीच भाजपा सांसद एवं अभिनेत्री कंगना रनौत ने आंदोलन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह अधिकार जनता द्वारा चुनी गई सरकार का होता है कि वह सरकार कैसे चलाएगी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कहा कि यदि […]

Kangana Ranaut reacts to CJP protest during Parliament march

दिल्ली में CJP (Cockroach Janta Party) के संसद मार्च और प्रदर्शन के बीच भाजपा सांसद एवं अभिनेत्री कंगना रनौत ने आंदोलन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह अधिकार जनता द्वारा चुनी गई सरकार का होता है कि वह सरकार कैसे चलाएगी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कहा कि यदि वे सरकार के फैसले तय करना चाहते हैं तो उन्हें चुनाव लड़कर जनादेश हासिल करना चाहिए।

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन संसद परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए कंगना रनौत ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार जनता चुनती है और वही सरकार प्रशासनिक फैसले लेने के लिए अधिकृत होती है। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री को हटाने या सरकार के निर्णय बदलवाने के लिए सड़क पर दबाव बनाना उचित तरीका नहीं है। उनके अनुसार यदि किसी को लगता है कि वह बेहतर शासन दे सकता है, तो उसे चुनाव लड़कर जनता का समर्थन प्राप्त करना चाहिए।

कंगना रनौत ने कहा, “आप सरकार को यह नहीं बता सकते कि किसे रखना है और किसे हटाना है। जनता ने सरकार चुनी है और सरकार कैसे चलेगी, यह तय करने का अधिकार उसी का है। यदि आपको लगता है कि आपको यह अधिकार होना चाहिए, तो चुनाव लड़िए।” उनके इस बयान को CJP द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के संदर्भ में देखा जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि संसद का उद्देश्य सरकार से सवाल पूछना और नीतियों पर चर्चा करना है। लोकतांत्रिक संस्थाओं के भीतर बहस होनी चाहिए, लेकिन सड़क पर दबाव बनाकर सरकार को निर्णय लेने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है। कंगना ने कहा कि सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है और इसी जवाबदेही के लिए संसद का सत्र आयोजित होता है।

दिल्ली में सोमवार को CJP द्वारा आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग कथित परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। पुलिस ने संसद मार्ग की ओर जाने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

CJP ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की और अनावश्यक बल प्रयोग किया। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रतिबंधित क्षेत्र की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन और सरकार के बीच टकराव और अधिक बढ़ गया।

कंगना रनौत की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब संसद के भीतर और बाहर विपक्ष सरकार को शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहा है। भाजपा का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन सरकारी निर्णयों को आंदोलन के माध्यम से बाध्य नहीं किया जा सकता।

हाल के दिनों में CJP आंदोलन को कई विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन मिला है। सोनम वांगचुक की लंबी भूख हड़ताल और बाद में उन्हें अस्पताल ले जाने के बाद आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा बटोरी। संसद मार्च के दौरान सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच प्रारंभिक बातचीत भी हुई, लेकिन आंदोलन से जुड़ी प्रमुख मांगों पर अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

कंगना रनौत ने अपने बयान में विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद के भीतर बहस और प्रश्न पूछना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन यदि हर मुद्दे पर हंगामा और सड़क पर दबाव बनाया जाएगा तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित होगी। उनके अनुसार जनता द्वारा चुनी गई सरकार को अपना कार्यकाल पूरा करने और नीतिगत फैसले लेने का संवैधानिक अधिकार है।

कंगना के बयान पर विपक्ष और CJP की ओर से तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि आंदोलन से जुड़े नेताओं का पहले से ही कहना रहा है कि उनका विरोध लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है तथा वे शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल CJP आंदोलन, संसद के मानसून सत्र और सरकार की प्रतिक्रिया के बीच राजनीतिक बहस तेज बनी हुई है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर भी इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी चर्चा होने की संभावना है।

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