उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में नाबालिग से कथित गैंगरेप के मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) से जुड़े एक नेता और उनके घरेलू कर्मचारी का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मामला सामने आने के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के अनुसार, पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि नाबालिग के साथ कई बार दुष्कर्म किया गया और घटना से जुड़े वीडियो बनाकर उसे तथा उसके परिवार को धमकाया गया। पुलिस ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया।
जांच के दौरान पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया और अन्य फोरेंसिक साक्ष्य भी एकत्र किए गए। पुलिस ने डीएनए जांच सहित वैज्ञानिक साक्ष्यों को केस का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र तैयार किया गया।
मामले ने उस समय राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया था क्योंकि मुख्य आरोपियों में एक का संबंध समाजवादी पार्टी से बताया गया। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी देखने को मिली। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया कि जांच केवल उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर की जा रही है, न कि किसी राजनीतिक पहचान के आधार पर।
इस मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत में हुई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर घरेलू कर्मचारी राजू खान को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। वहीं, अदालत ने सपा के पूर्व पदाधिकारी मोईद खान को उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के आधार पर इस मामले में बरी कर दिया। हालांकि अभियोजन पक्ष ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय लिया है।
सरकारी पक्ष का कहना है कि अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला अभियोजन विभाग आवश्यक दस्तावेज तैयार कर राज्य सरकार के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर करेगा।
वहीं, पीड़िता के परिवार ने अदालत के फैसले पर असंतोष जताते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद अभी भी है। परिवार का कहना है कि वे भी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। दूसरी ओर, मोईद खान के पक्ष ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो से जुड़े मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट, पीड़ित के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही देती है।
फिलहाल इस मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है। अभियोजन पक्ष द्वारा उच्च न्यायालय में अपील किए जाने के बाद मामले में आगे नए न्यायिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।