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अमेरिका ने विदेशी छात्रों और पत्रकारों के लिए बदले वीजा नियम, अब तय समय तक ही रहने की अनुमति

अमेरिका ने विदेशी छात्रों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में शामिल लोगों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के लिए वीजा नियमों में बड़ा बदलाव किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा घोषित नई व्यवस्था के तहत इन श्रेणियों के वीजाधारकों को अब कार्यक्रम या पेशे की पूरी अवधि तक स्वतः अमेरिका में रहने की अनुमति नहीं मिलेगी। इसके […]

US introduces fixed visa stay limits for international students and foreign journalists

अमेरिका ने विदेशी छात्रों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में शामिल लोगों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के लिए वीजा नियमों में बड़ा बदलाव किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा घोषित नई व्यवस्था के तहत इन श्रेणियों के वीजाधारकों को अब कार्यक्रम या पेशे की पूरी अवधि तक स्वतः अमेरिका में रहने की अनुमति नहीं मिलेगी। इसके स्थान पर उनके प्रवास की एक निश्चित समयसीमा तय की जाएगी और अधिक समय की जरूरत होने पर अमेरिकी अधिकारियों से अलग से मंजूरी लेनी होगी।

नए नियम मुख्य रूप से F वीजा पर अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों, J वीजा पर आने वाले एक्सचेंज विजिटर्स और I वीजा पर काम करने वाले विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों को प्रभावित करेंगे। सरकार का कहना है कि निश्चित समयसीमा लागू करने से इन लोगों की निगरानी, सुरक्षा जांच और आव्रजन नियमों का पालन सुनिश्चित करना आसान होगा। वहीं विश्वविद्यालयों, आव्रजन विशेषज्ञों और प्रेस संगठनों ने आशंका जताई है कि यह व्यवस्था छात्रों तथा पत्रकारों के लिए अतिरिक्त अनिश्चितता और प्रशासनिक बोझ पैदा कर सकती है।

अब तक अधिकतर अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका में “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” व्यवस्था के तहत प्रवेश दिया जाता था। इसका अर्थ यह था कि छात्र जब तक किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में पढ़ाई कर रहा हो, अपने वीजा की शर्तों का पालन कर रहा हो और उसका शैक्षणिक कार्यक्रम जारी हो, तब तक वह अमेरिका में रह सकता था। उसके पासपोर्ट पर किसी तय अंतिम तारीख के बजाय आमतौर पर D/S दर्ज किया जाता था।

नई व्यवस्था में विदेशी छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स को उनके कार्यक्रम की अवधि या अधिकतम चार वर्ष तक अमेरिका में रहने की अनुमति दी जाएगी। इनमें से जो अवधि कम होगी, वही लागू होगी। उदाहरण के लिए, दो वर्ष के शैक्षणिक कार्यक्रम में दाखिला लेने वाले छात्र को चार वर्ष की स्वतः अनुमति नहीं मिलेगी, बल्कि उसका अधिकृत प्रवास कार्यक्रम की निर्धारित अवधि के अनुसार तय किया जा सकता है।

चार वर्ष से अधिक समय लेने वाले पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए यह बदलाव अधिक महत्वपूर्ण होगा। कई पीएचडी, शोध और पेशेवर डिग्री कार्यक्रम चार वर्ष से ज्यादा समय तक चलते हैं। ऐसे छात्रों को अपनी अधिकृत अवधि समाप्त होने से पहले अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा के समक्ष प्रवास बढ़ाने के लिए आवेदन करना होगा। आवेदन स्वीकार होने पर ही वे अपना कार्यक्रम जारी रखने के लिए कानूनी रूप से अमेरिका में रह सकेंगे।

सरकार ने विस्तार के विकल्प को पूरी तरह समाप्त नहीं किया है। छात्र और अन्य प्रभावित वीजाधारक अपनी निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले एक्सटेंशन ऑफ स्टे के लिए आवेदन कर सकेंगे। उन्हें यह साबित करना होगा कि अतिरिक्त समय किसी वैध शैक्षणिक, पेशेवर या कार्यक्रम संबंधी आवश्यकता के कारण मांगा जा रहा है और उन्होंने वीजा नियमों का उल्लंघन नहीं किया है।

इस प्रक्रिया से छात्रों को पाठ्यक्रम की अवधि, शोध में देरी, विश्वविद्यालय बदलने और शैक्षणिक स्तर में बदलाव की योजना पहले से अधिक सावधानी से बनानी होगी। आव्रजन आवेदन में देरी या विस्तार अस्वीकार होने पर उनकी शिक्षा और अमेरिका में कानूनी स्थिति प्रभावित हो सकती है।

नए नियमों में स्नातक स्तर के विद्यार्थियों द्वारा शैक्षणिक उद्देश्य बदलने या संस्थान स्थानांतरित करने पर भी अधिक नियंत्रण रखा गया है। कुछ स्थितियों में छात्र अब बिना अनुमति अपने अध्ययन का स्तर, पाठ्यक्रम या शिक्षण संस्थान नहीं बदल सकेंगे। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य छात्र वीजा का इस्तेमाल अमेरिका में अनिश्चित समय तक बने रहने के माध्यम के रूप में होने से रोकना है।

पढ़ाई पूरी होने के बाद छात्रों को अमेरिका छोड़ने या अपनी स्थिति बदलने के लिए मिलने वाली अवधि भी घटाई जा रही है। पहले कई F वीजाधारकों को कार्यक्रम समाप्त होने के बाद 60 दिनों की ग्रेस अवधि मिलती थी। नई व्यवस्था के तहत इसे घटाकर 30 दिन किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को यात्रा, अगली डिग्री, रोजगार प्रशिक्षण या किसी अन्य वैध आव्रजन स्थिति के लिए आवेदन की प्रक्रिया कम समय में पूरी करनी होगी।

हालांकि केवल वीजा पर लिखी अवधि समाप्त होने का अर्थ यह नहीं होगा कि हर छात्र को तुरंत अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। जिन छात्रों के पास वैध अनुमति, स्वीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम या समय रहते दाखिल किया गया विस्तार आवेदन होगा, उनकी स्थिति संबंधित नियमों और अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करेगी। प्रत्येक विद्यार्थी का मामला उसके पाठ्यक्रम और दस्तावेजों के आधार पर अलग हो सकता है।

ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग यानी OPT का उपयोग करने वाले छात्रों के लिए भी नई व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। OPT विदेशी विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई से संबंधित क्षेत्र में अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देता है। यदि छात्र के लिए निर्धारित चार वर्ष की अवधि उसके पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण दोनों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होती, तो उसे समय रहते विस्तार के लिए आवेदन करना पड़ सकता है।

अमेरिका के विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों पर भी इन बदलावों का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। भारत लंबे समय से अमेरिका भेजे जाने वाले अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के सबसे बड़े स्रोत देशों में शामिल रहा है। विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित, कंप्यूटर साइंस और प्रबंधन से जुड़े कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में भारतीय विद्यार्थी दाखिला लेते हैं।

नई समयसीमा के कारण भारतीय छात्रों को विश्वविद्यालय चुनते समय केवल फीस, पाठ्यक्रम और रोजगार के अवसर ही नहीं, बल्कि कार्यक्रम की वास्तविक अवधि और वीजा विस्तार की संभावित जरूरत का भी आकलन करना होगा। जिन विद्यार्थियों का शोध या डिग्री कार्यक्रम चार वर्ष से अधिक चल सकता है, उन्हें दस्तावेजी तैयारी और आव्रजन प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय तथा खर्च की योजना बनानी पड़ सकती है।

विदेशी पत्रकारों के लिए भी प्रवास की अवधि सीमित की गई है। सामान्य I वीजा वाले अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रतिनिधियों को अधिकतम 240 दिनों के लिए अमेरिका में रहने की अनुमति दी जाएगी। वे आवश्यकता होने पर 240 दिनों के अतिरिक्त विस्तार के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए नई जांच और सरकारी स्वीकृति जरूरी होगी।

चीनी पत्रकारों के लिए इससे भी कठोर सीमा रखी गई है। चीन के मुख्य भूभाग के पासपोर्ट पर अमेरिका आने वाले कुछ मीडिया प्रतिनिधियों को केवल 90 दिनों के लिए प्रवेश दिया जाएगा। आवश्यकता होने पर उन्हें फिर से विस्तार की अनुमति मांगनी होगी। हांगकांग और मकाऊ से संबंधित पत्रकारों की स्थिति अलग नियमों के तहत देखी जा सकती है।

चीन ने अपने पत्रकारों के लिए लागू छोटी समयसीमा को भेदभावपूर्ण बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। बीजिंग ने संकेत दिया है कि वह अमेरिकी पत्रकारों के खिलाफ जवाबी कदम उठा सकता है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद मीडिया और राजनयिक तनाव और बढ़ने की आशंका है।

अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि मौजूदा “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” व्यवस्था के कारण कुछ वीजाधारक कई वर्षों या दशकों तक बिना किसी निश्चित पुनर्मूल्यांकन तारीख के अमेरिका में बने रह सकते थे। सरकार के अनुसार निश्चित अवधि लागू करने से अधिकारियों को नियमित अंतराल पर यह जांचने का अवसर मिलेगा कि व्यक्ति अभी भी अपने मूल शैक्षणिक, सांस्कृतिक या मीडिया उद्देश्य के अनुसार अमेरिका में रह रहा है या नहीं।

सरकार ने विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या को भी नियम परिवर्तन का एक कारण बताया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2024 में छात्र वीजा श्रेणियों से संबंधित 18 लाख से अधिक प्रवेश दर्ज किए गए थे। प्रशासन का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या के बीच पुरानी व्यवस्था में लंबे समय तक रहने वाले लोगों की लगातार निगरानी करना चुनौतीपूर्ण था।

दूसरी ओर अमेरिकी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा से जुड़े संगठनों का कहना है कि विदेशी छात्र पहले से ही स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम के माध्यम से निगरानी के दायरे में रहते हैं। विश्वविद्यालयों को छात्रों के नामांकन, संस्थान परिवर्तन, कार्यक्रम समाप्ति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां अधिकारियों को देनी होती हैं। आलोचकों के अनुसार नई प्रक्रिया सुरक्षा बढ़ाने की तुलना में कागजी कार्रवाई और अनिश्चितता अधिक बढ़ा सकती है।

शिक्षा संस्थानों को आशंका है कि निश्चित प्रवास अवधि अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के लिए कम आकर्षक बना सकती है। लंबी अवधि के शोध कार्यक्रमों में जाने वाले छात्र कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया या यूरोप के ऐसे देशों का चयन कर सकते हैं जहां उन्हें अपेक्षाकृत अधिक स्पष्टता और स्थिरता मिले। इससे अमेरिकी विश्वविद्यालयों की फीस आय, शोध परियोजनाओं और वैश्विक प्रतिभा आकर्षित करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

पत्रकारिता और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े संगठनों ने भी चिंता जताई है कि बार-बार वीजा विस्तार मांगने की बाध्यता विदेशी पत्रकारों की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है। उनके अनुसार किसी पत्रकार के प्रवास का विस्तार सरकारी मंजूरी पर निर्भर होने से संवेदनशील रिपोर्टिंग करने वाले मीडिया कर्मियों पर अप्रत्यक्ष दबाव पैदा हो सकता है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि नियम किसी की रिपोर्टिंग सामग्री को नियंत्रित करने के लिए नहीं, बल्कि आव्रजन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बनाए गए हैं।

नए नियम आधिकारिक प्रकाशन के 60 दिन बाद प्रभावी होने की योजना है और इन्हें आवश्यक प्रशासनिक तथा संसदीय समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा। मौजूदा वीजाधारकों के लिए इनके लागू होने की तारीख, संक्रमणकालीन व्यवस्था और प्रवेश रिकॉर्ड में निर्धारित अवधि से संबंधित विस्तृत निर्देश अधिकारियों द्वारा जारी किए जा सकते हैं।

विदेशी छात्रों को इस बदलाव के बाद अपने पासपोर्ट पर लगे वीजा की समाप्ति तिथि और अमेरिका में अधिकृत प्रवास की अवधि के बीच अंतर समझना भी जरूरी होगा। वीजा मुख्य रूप से अमेरिका में प्रवेश मांगने का दस्तावेज होता है, जबकि देश के भीतर कितने समय तक रहने की अनुमति है, यह प्रवेश के समय जारी रिकॉर्ड और आव्रजन स्थिति से तय होता है। नई व्यवस्था मुख्य रूप से अधिकृत प्रवास की अवधि को निश्चित बनाएगी।

मौजूदा छात्रों को तत्काल कोई निर्णय लेने के बजाय अपने विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय छात्र कार्यालय, अधिकृत आव्रजन सलाहकार और आधिकारिक सरकारी निर्देशों से स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए। केवल सोशल मीडिया पोस्ट या अनौपचारिक दावों के आधार पर अमेरिका छोड़ना, पाठ्यक्रम बदलना या यात्रा की योजना बनाना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

यह बदलाव ट्रंप प्रशासन की व्यापक आव्रजन नीति का हिस्सा है, जिसमें विदेशी नागरिकों की जांच, सोशल मीडिया स्क्रीनिंग, वीजा अनुपालन और अमेरिका में रहने की अवधि पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। प्रशासन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और आव्रजन कानून लागू करने की दिशा में आवश्यक कदम बता रहा है, जबकि आलोचक इसे कानूनी रूप से अमेरिका आने वाले छात्रों, शोधकर्ताओं और पत्रकारों के लिए अनावश्यक बाधा मानते हैं।

नए नियमों का वास्तविक प्रभाव उनके क्रियान्वयन, विस्तार आवेदनों के निपटारे और मौजूदा वीजाधारकों के लिए लागू संक्रमणकालीन प्रावधानों पर निर्भर करेगा। आने वाले सप्ताहों में अमेरिकी एजेंसियों से विस्तृत दिशानिर्देश सामने आने की संभावना है। इसलिए अमेरिका में पढ़ रहे या पढ़ाई की तैयारी कर रहे भारतीय छात्रों को प्रत्येक आधिकारिक अपडेट पर नजर रखनी होगी।

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