पुणे के बहुचर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में लगातार नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच एजेंसियों को ऐसे डिजिटल सबूत मिले हैं जिनमें कथित तौर पर ‘सीक्रेट कॉल’, डिलीट किए गए चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स शामिल हैं, जो इस हत्याकांड की साजिश को और गहराई से समझने में मदद कर रहे हैं।
पुलिस जांच के मुताबिक, यह मामला केवल एक अचानक हुई घटना नहीं बल्कि लंबे समय से तैयार की गई पूर्व-नियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों के बीच लंबे समय तक लगातार संपर्क रहा, और इस दौरान सैकड़ों घंटों की बातचीत और हजारों कॉल्स की जानकारी भी खंगाली जा रही है। डिजिटल फोरेंसिक टीम अब डिलीट किए गए चैट्स और डेटा को रिकवर करने की कोशिश कर रही है ताकि पूरी साजिश की टाइमलाइन बनाई जा सके।
‘सीक्रेट कॉल’ और संकेत प्रणाली की जांच
जांच एजेंसियों का ध्यान अब उस कथित ‘सीक्रेट कॉल’ और संकेत प्रणाली पर है, जिसके जरिए वारदात को अंजाम देने का दावा किया जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना के दिन और उससे पहले संदिग्ध गतिविधियों और बातचीत के पैटर्न का विश्लेषण किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आरोपियों ने आपस में पहले से तय किसी संकेत के आधार पर पूरी घटना को अंजाम दिया।
हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह सभी पहलू जांच के दायरे में हैं और अंतिम निष्कर्ष केवल फॉरेंसिक रिपोर्ट और कोर्ट में पेश किए गए सबूतों के आधार पर ही तय होगा।
डिलीट किए गए चैट्स और डिजिटल सबूत
जांच में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मोबाइल फोन और चैट डेटा को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ आरोपियों द्वारा चैट हिस्ट्री और कॉल रिकॉर्ड डिलीट करने की कोशिश की गई थी। इसके बावजूद, फॉरेंसिक टीम डिवाइस से डेटा रिकवर करने की प्रक्रिया में जुटी हुई है।
डिजिटल जांच विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में डिलीट किया गया डेटा भी अक्सर सर्वर बैकअप, क्लाउड स्टोरेज या फॉरेंसिक रिकवरी टूल्स के जरिए वापस पाया जा सकता है। इसी आधार पर जांच एजेंसियां अब घटनाक्रम की पूरी डिजिटल ट्रेल तैयार करने में लगी हैं।
पहले से तैयार साजिश के संकेत
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह घटना अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसे योजनाबद्ध तरीके से अंजाम देने की तैयारी पहले से चल रही थी। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि आरोपियों ने घटना से पहले रेकी की और स्थान का चयन भी सोच-समझकर किया गया।
इसके अलावा, कॉल डाटा रिकॉर्ड और बातचीत के पैटर्न से यह संकेत भी मिले हैं कि घटना से पहले कई बार लंबी बातचीत हुई थी, जिनका उद्देश्य कथित रूप से योजना को अंतिम रूप देना हो सकता है।
बचाव पक्ष का रुख और जांच की स्थिति
दूसरी ओर, बचाव पक्ष लगातार यह दावा कर रहा है कि आरोपों के समर्थन में अभी प्रत्यक्ष और निर्णायक सबूत नहीं हैं। वकीलों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और डिजिटल डेटा की व्याख्या को लेकर जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए।
फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों को जोड़कर पूरे मामले की कड़ी तैयार करने में जुटी हैं।
आगे की जांच और संभावित दिशा
विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले में असली तस्वीर तब साफ होगी जब पूरा डिजिटल डेटा रिकवर हो जाएगा और उसे कॉल डिटेल रिकॉर्ड तथा घटनास्थल के सबूतों से मिलाया जाएगा। जांच एजेंसियों की प्राथमिकता अब यह तय करना है कि क्या यह एक सुनियोजित हत्या थी और इसमें किन-किन लोगों की प्रत्यक्ष भूमिका रही।
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और हर दिन नए डिजिटल सबूतों के आधार पर इसकी दिशा बदलती नजर आ रही है।
