वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ गई है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने क्षेत्र में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए चलाए जा रहे निकासी अभियान (Evacuation Initiative) को अस्थायी रूप से रोक दिया है।
ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हमले के बाद निवेशकों के बीच यह चिंता बढ़ी कि यदि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति फिर प्रभावित होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों का तेल इसी मार्ग के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की सुरक्षा चुनौती का असर वैश्विक तेल कीमतों पर लगभग तुरंत दिखाई देता है।
रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में एक व्यापारी जहाज पर हमला हुआ था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जहाज संयुक्त राष्ट्र समर्थित निकासी योजना का हिस्सा नहीं था, लेकिन घटना के बाद सुरक्षा स्थिति की समीक्षा आवश्यक समझी गई। इसके बाद IMO ने निकासी अभियान को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया ताकि आगे की यात्रा के लिए सुरक्षा गारंटी का पुनर्मूल्यांकन किया जा सके।
IMO ने कुछ दिन पहले ही क्षेत्र में फंसे जहाजों और हजारों नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए विशेष समुद्री गलियारे (Shipping Corridors) शुरू किए थे। इन मार्गों का उद्देश्य तनावग्रस्त क्षेत्र से जहाजों को सुरक्षित निकालना था। एजेंसी के अनुसार, कई जहाज पहले ही सुरक्षित बाहर निकल चुके थे, लेकिन हालिया हमले के बाद पूरे अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
इस घटना ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में फिर से जोखिम की भावना को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल बाजार केवल वर्तमान आपूर्ति पर नहीं बल्कि संभावित जोखिमों पर भी प्रतिक्रिया देता है। यदि व्यापारियों को यह आशंका होती है कि भविष्य में आपूर्ति बाधित हो सकती है, तो कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक है। यही कारण है कि घटना के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क क्रूड की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया।
हाल के महीनों में मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य लगातार वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पहले भी प्रभावित हुई थी, जिसके कारण तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हालांकि हाल के दिनों में स्थिति कुछ सामान्य होती दिखाई दे रही थी, लेकिन ताजा घटना ने फिर से अनिश्चितता बढ़ा दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसे हमले जारी रहते हैं या समुद्री यातायात लंबे समय तक प्रभावित होता है, तो इसका असर केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा। पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन, रसायन उद्योग और वैश्विक परिवहन लागत पर भी दबाव बढ़ सकता है। ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय हो सकती है।
भारत जैसे देशों पर भी इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंबे समय तक तेल महंगा रहता है, तो इसका असर ईंधन लागत, महंगाई और परिवहन खर्च पर दिखाई दे सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पकालिक मूल्य वृद्धि और दीर्घकालिक रुझान में अंतर होता है तथा आगे की स्थिति क्षेत्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
इस बीच अमेरिका और अन्य देशों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा बनाए रखने पर जोर दिया है। वहीं क्षेत्र में जारी कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं ताकि जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सके और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो। फिलहाल IMO सुरक्षा स्थिति का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है और उसके बाद ही निकासी अभियान दोबारा शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल यह एक विकासशील (Breaking) घटनाक्रम है। जांच और सुरक्षा एजेंसियों की समीक्षा जारी है तथा आने वाले समय में इस मामले से जुड़े नए अपडेट सामने आ सकते हैं। इसी के साथ वैश्विक बाजारों की नजर भी हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति और वहां जहाजों की आवाजाही पर बनी हुई है।
