तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में स्थित एक सीफूड प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट यूनिट में हुए अमोनिया गैस रिसाव हादसे ने गंभीर रूप ले लिया है। सोमवार सुबह तक इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 5 हो गई, जबकि 67 से अधिक मजदूर विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, रविवार रात तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि सोमवार सुबह तीन अन्य मजदूरों ने भी दम तोड़ दिया।
यह हादसा पेरियापालयम के पास कन्निगापैर-मनजंगरनई क्षेत्र में स्थित एक निजी सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट में हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संयंत्र के अमोनिया रेफ्रिजरेशन सिस्टम से गैस का रिसाव हुआ, जिसके बाद आसपास मौजूद श्रमिकों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कुल 74 लोग जहरीली गैस के संपर्क में आए थे। इनमें अधिकांश प्रवासी मजदूर थे, जो ओडिशा, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल से आकर यहां काम कर रहे थे। प्रभावित लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, सीने में दर्द, लगातार खांसी और गंभीर श्वसन संबंधी समस्याओं की शिकायत हुई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना उस समय हुई जब कई मजदूर अपने हॉस्टल कमरों में आराम कर रहे थे। हॉस्टल अमोनिया प्लांट से लगभग 50 मीटर की दूरी पर स्थित था। गैस रिसाव के बाद पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
अमोनिया का उपयोग सीफूड उद्योग में कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेशन सिस्टम में बड़े पैमाने पर किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में यह प्रभावी रेफ्रिजरेंट है, लेकिन अधिक मात्रा में हवा में फैलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। इससे फेफड़ों, आंखों और श्वसन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जिसमें औद्योगिक सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। समिति को 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने संयंत्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि गैस रिसाव के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है और यदि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह हादसा देश के औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। खासकर ऐसे उद्योगों में जहां अमोनिया जैसी खतरनाक गैसों का उपयोग किया जाता है, वहां नियमित निरीक्षण, गैस डिटेक्शन सिस्टम और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था बेहद जरूरी होती है।
फिलहाल अस्पतालों में भर्ती कई मरीजों की हालत पर डॉक्टर लगातार नजर रखे हुए हैं। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। वहीं पूरे तिरुवल्लूर जिले में इस घटना को लेकर चिंता और आक्रोश का माहौल है।