महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) को बड़ा झटका लगा है। उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसदों के शिंदे खेमे में शामिल होने के बाद उपमुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने दावा किया कि “ऑपरेशन टाइगर सफल हो गया है।” यह बयान ऐसे समय आया है जब शिवसेना (UBT) के भीतर दूसरी बड़ी टूट की चर्चा तेज है।
ताजा घटनाक्रम में उस्मानाबाद (धाराशिव) से सांसद Omraje Nimbalkar ने आधिकारिक रूप से Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इसे उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। फडणवीस ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “ऑपरेशन सफल हो गया है”, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल और बढ़ गई।
इस बीच एकनाथ शिंदे ने संकेत दिया है कि यह सिलसिला अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जो कुछ अभी दिखाई दे रहा है, वह केवल शुरुआत है और आगे भी कई नेता उनके साथ आ सकते हैं। इससे पहले भी शिंदे ने कहा था कि “पिक्चर अभी बाकी है”, जिसे संभावित और दलबदल के संकेत के रूप में देखा गया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों ने अलग समूह बनाकर शिंदे खेमे का समर्थन किया है। इससे लोकसभा में शिंदे गुट की ताकत बढ़ी है और NDA के भीतर उनकी स्थिति और मजबूत हुई है।
शिंदे खेमे के नेताओं का दावा है कि “ऑपरेशन टाइगर” कोई एक दिन की कार्रवाई नहीं बल्कि लगातार चलने वाली राजनीतिक प्रक्रिया है। शिवसेना विधायक Pratap Sarnaik ने कहा कि यह अभियान पूरे साल चलता है और इसका उद्देश्य बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से जुड़े नेताओं को एक मंच पर लाना है।
वहीं, उद्धव ठाकरे गुट ने इस घटनाक्रम को गंभीर राजनीतिक संकट माना है। Aaditya Thackeray ने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेताओं ने अपनी निष्ठा और राजनीतिक पहचान को दांव पर लगा दिया है। उन्होंने इसे अवसरवादी राजनीति का उदाहरण बताया।
दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा और शिंदे गुट पर हमला बोलते हुए इस पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे “ऑपरेशन कीचड़” करार देते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2022 में हुई पहली बड़ी बगावत के बाद यह शिवसेना (UBT) के लिए दूसरा बड़ा संकट है। यदि आने वाले दिनों में और सांसद या विधायक शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन और बदल सकता है।
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या “ऑपरेशन टाइगर” यहीं रुकता है या आने वाले दिनों में उद्धव ठाकरे गुट को और बड़े झटके झेलने पड़ते हैं। शिंदे और फडणवीस के हालिया बयानों ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
