मध्य पूर्व में शांति की कोशिशों के बीच हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। एक ओर अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड में महत्वपूर्ण वार्ता के लिए रवाना हो चुके हैं, वहीं दूसरी ओर दक्षिणी लेबनान में इज़राइली हमले जारी रहने से क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत Steve Witkoff और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi स्विट्जरलैंड में होने वाली वार्ता में हिस्सा लेने जा रहे हैं। इन बातचीतों का उद्देश्य हाल ही में हुए अंतरिम समझौते को स्थायी शांति समझौते में बदलना है। दोनों पक्ष परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
हालांकि शांति प्रयासों को उस समय झटका लगा जब दक्षिणी लेबनान में संघर्षविराम लागू होने के कुछ घंटों बाद ही इज़राइली हवाई हमले जारी रहे। ताजा हमलों में कम से कम पांच लोगों के मारे जाने की खबर है। लेबनान के अधिकारियों का आरोप है कि इज़राइल ने संघर्षविराम का उल्लंघन किया है, जबकि इज़राइल का कहना है कि वह सुरक्षा खतरों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।
अमेरिका, कतर और अन्य मध्यस्थ देशों की कोशिशों से इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच नया संघर्षविराम लागू कराया गया था। यह युद्धविराम अमेरिका-ईरान वार्ता की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन जमीनी स्तर पर जारी हिंसा ने समझौते के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान में जारी संघर्ष अमेरिका-ईरान वार्ता को प्रभावित कर सकता है। इससे पहले भी इज़राइली हमलों के कारण प्रस्तावित वार्ताएं टल चुकी हैं और ईरान ने साफ कहा था कि क्षेत्र में स्थिरता के बिना स्थायी समझौता संभव नहीं होगा।
इस बीच अमेरिकी प्रशासन समझौते को आगे बढ़ाने के पक्ष में नजर आ रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल के दिनों में कहा था कि ईरान के साथ बातचीत जारी रहनी चाहिए और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना उनकी प्राथमिकता है। हालांकि अमेरिका के भीतर भी इस समझौते को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
विश्लेषकों का कहना है कि स्विट्जरलैंड में होने वाली यह वार्ता पूरे मध्य पूर्व के भविष्य के लिए अहम साबित हो सकती है। यदि बातचीत सफल रहती है तो क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है, लेकिन यदि लेबनान में संघर्ष जारी रहता है तो शांति प्रक्रिया को बड़ा झटका लग सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजर स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता और दक्षिणी लेबनान की स्थिति पर टिकी हुई है। आने वाले कुछ दिन यह तय कर सकते हैं कि मध्य पूर्व स्थायी शांति की ओर बढ़ेगा या फिर एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर लौट जाएगा।
