अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते को लेकर अमेरिका और इज़राइल के रिश्तों में तनाव खुलकर सामने आने लगा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने उन इज़राइली नेताओं की कड़ी आलोचना की है जिन्होंने अमेरिका-ईरान समझौते पर सवाल उठाए थे। Vance ने कहा कि इज़राइल को अपने सबसे बड़े और शक्तिशाली सहयोगी अमेरिका पर भरोसा करना चाहिए, न कि सार्वजनिक रूप से उसकी नीतियों पर हमला करना चाहिए।
JD Vance ने एक इंटरव्यू में कहा कि इज़राइल में इस समझौते को लेकर जो “घबराहट” दिखाई जा रही है, वह उन्हें समझ नहीं आती। उन्होंने कहा कि यह प्रतिक्रिया अमेरिका पर अविश्वास को दर्शाती है, जबकि अमेरिका वर्षों से इज़राइल की सुरक्षा, सैन्य सहायता और कूटनीतिक समर्थन का सबसे बड़ा स्रोत रहा है।
उपराष्ट्रपति ने विशेष रूप से इज़राइल के कुछ दक्षिणपंथी मंत्रियों पर निशाना साधा, जिन्होंने अमेरिका-ईरान समझौते को कमजोर और खतरनाक बताया था। रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइल के कुछ नेताओं का मानना है कि इस समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं है।
Vance ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका हर साल अरबों डॉलर की सैन्य सहायता देकर इज़राइल की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब इज़राइल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनाओं का सामना कर रहा है, उसे अपने सबसे करीबी सहयोगी के साथ टकराव की बजाय सहयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए।
यह विवाद उस समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने और तनाव कम करने के लिए एक प्रारंभिक समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत संघर्ष विराम, क्षेत्रीय तनाव में कमी और भविष्य की वार्ताओं के लिए एक ढांचा तैयार किया गया है। हालांकि इज़राइल के कई नेताओं को डर है कि इससे ईरान को आर्थिक और राजनीतिक लाभ मिल सकता है।
इज़राइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका की आलोचना करने से बचने की कोशिश की है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि इज़राइल अपनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में इज़राइली सैन्य मौजूदगी जारी रखने को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद उभर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में अमेरिका और इज़राइल के बीच शायद ही कभी ऐसा सार्वजनिक मतभेद देखने को मिला हो। JD Vance के बयान इस बात का संकेत माने जा रहे हैं कि वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच ईरान नीति को लेकर गंभीर रणनीतिक अंतर मौजूद हैं।
हालांकि दोनों देशों के रिश्ते अब भी मजबूत माने जाते हैं, लेकिन ईरान समझौते को लेकर पैदा हुआ यह विवाद मध्य पूर्व की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत दे रहा है। आने वाले हफ्तों में यह साफ होगा कि अमेरिका और इज़राइल इस मतभेद को सुलझा पाते हैं या नहीं।
