महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। शिवसेना (UBT) के भीतर कथित “ऑपरेशन टाइगर” को लेकर चर्चाएं तेज हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसद पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है।
शिवसेना (UBT) नेता और राज्यसभा सांसद Sanjay Raut लगातार इस मुद्दे पर मुखर नजर आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि पार्टी के सांसदों को तोड़ने के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की जा रही है। राउत के अनुसार कुछ सांसदों को पहले ₹15 करोड़ और बाद में अतिरिक्त रकम देने की बात सामने आई है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत सामने नहीं आया है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उद्धव ठाकरे गुट के 6 से 7 सांसद अलग समूह बनाने या शिंदे गुट में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। इसी संभावना को राजनीतिक गलियारों में “ऑपरेशन टाइगर” नाम दिया गया है। यदि ऐसा होता है तो यह 2022 के बाद शिवसेना (UBT) के लिए एक और बड़ा झटका माना जाएगा।
बढ़ते संकट को देखते हुए पार्टी ने अपने सांसदों की आपात बैठक बुलाई और तीन-लाइन व्हिप भी जारी किया। शिवसेना (UBT) नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि पार्टी लाइन के खिलाफ जाने वालों पर कार्रवाई की जा सकती है।
संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “विधायक और सांसद आते-जाते रहते हैं, लेकिन पार्टी बनी रहती है।” उन्होंने दावा किया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में पार्टी पहले भी संकटों से उबरी है और इस बार भी संगठन मजबूत रहेगा।
इस बीच शिवसेना (UBT) ने लोकसभा अध्यक्ष को भी पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि किसी संभावित टूटे हुए समूह को तुरंत अलग इकाई के रूप में मान्यता न दी जाए। पार्टी का कहना है कि सांसद जनता द्वारा उद्धव ठाकरे और मशाल चुनाव चिन्ह के नाम पर चुने गए हैं।
वहीं दूसरी ओर भाजपा ने इन आरोपों से दूरी बना ली है। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा है कि “ऑपरेशन टाइगर” पूरी तरह शिवसेना के दोनों गुटों का आंतरिक मामला है और भाजपा का इससे कोई संबंध नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में सांसद शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा शक्ति संतुलन परिवर्तन देखने को मिल सकता है। हालांकि अंतिम फैसला आने तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा रही है।
फिलहाल सभी की नजर उद्धव ठाकरे गुट की बैठकों, सांसदों की गतिविधियों और संभावित राजनीतिक फैसलों पर टिकी हुई है। आने वाले कुछ दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
