उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया पर रील बनाने वाले पुलिसकर्मियों को कड़ी चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि पुलिसकर्मियों का मुख्य दायित्व कानून व्यवस्था बनाए रखना है, न कि ड्यूटी के समय सोशल मीडिया कंटेंट बनाना। उन्होंने ऐसे व्यवहार को अनुशासनहीनता करार देते हुए अधिकारियों और जवानों को अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक गंभीर और सतर्क रहने की सलाह दी।
लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग ड्यूटी के दौरान रील बनाने और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने में व्यस्त रहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां पुलिस की पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और इससे पूरे सिस्टम पर सवाल उठते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों को यह समझना होगा कि जनता उन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा प्रदान करने के लिए देखती है। ऐसे में ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन पर वीडियो बनाना या सोशल मीडिया पर समय बिताना उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर पुलिसकर्मी को अपने कार्य के प्रति पूरी निष्ठा और गंभीरता के साथ काम करना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिससे वह अनावश्यक रूप से हंसी का पात्र बने। उन्होंने पुलिसकर्मियों को सलाह दी कि वे अपनी वर्दी की गरिमा बनाए रखें और ऐसा कोई कदम न उठाएं जिससे विभाग की छवि प्रभावित हो।
पिछले कुछ समय में उत्तर प्रदेश के कई पुलिसकर्मियों के रील और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इनमें कुछ पुलिसकर्मी वर्दी में फिल्मी गानों पर अभिनय करते और वीडियो बनाते नजर आए थे। इन वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई और पुलिस विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठे। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री की यह सख्त टिप्पणी सामने आई है।
मुख्यमंत्री का यह भी कहना था कि पुलिस बल में अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है। यदि किसी पुलिसकर्मी को कोई जिम्मेदारी दी गई है तो उसे उसी पर पूरा ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छे परिणाम तभी मिलेंगे जब हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाएगा और टीम भावना के साथ काम करेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रील बनाने वाले पुलिसकर्मियों को संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में तैनात न करने के निर्देश दे चुके हैं। सरकार का मानना है कि पुलिस की प्राथमिकता कानून व्यवस्था और जनता की सुरक्षा होनी चाहिए, न कि सोशल मीडिया लोकप्रियता।
मुख्यमंत्री के इस संदेश को पुलिस विभाग में अनुशासन और पेशेवर कार्य संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में विभाग ऐसे मामलों पर और सख्ती दिखा सकता है, ताकि पुलिस की छवि और कार्यक्षमता दोनों बेहतर बनी रहें।
