राजस्थान के कोटा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दौरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। एक तरफ कांग्रेस इसे छात्रों की आवाज उठाने का अभियान बता रही है, वहीं बीजेपी का आरोप है कि यह परीक्षा के माहौल में राजनीति करने की कोशिश है। लेकिन इस राजनीतिक लड़ाई के बीच कोटा के छात्र, अभिभावक और कोचिंग संस्थान कुछ और ही चाहते हैं—वे फिलहाल राजनीति से दूर रहकर आगामी परीक्षाओं पर ध्यान देना चाहते हैं।
राहुल गांधी 17 जून को कोटा में आयोजित “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम के जरिए देशभर में शुरू होने वाले छात्र अभियान की शुरुआत करने पहुंचे हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह अभियान पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं की आवाज उठाने के लिए शुरू किया गया है। पार्टी नेतृत्व का दावा है कि लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और इन मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की जरूरत है।
दूसरी ओर बीजेपी ने राहुल गांधी के कार्यक्रम के समय और उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि 21 जून को होने वाली NEET पुनर्परीक्षा से ठीक पहले इस तरह के राजनीतिक कार्यक्रम छात्रों का ध्यान भटका सकते हैं। पार्टी प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों को अपनी पढ़ाई और परीक्षा पर ध्यान देना चाहिए, न कि राजनीतिक सभाओं में शामिल होना चाहिए।
कांग्रेस ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी और स्थानीय प्रशासन कार्यक्रम को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दावा किया कि कुछ कोचिंग संस्थानों, छात्रावासों और अन्य संस्थानों पर छात्रों को कार्यक्रम में शामिल होने से रोकने का दबाव बनाया गया। कांग्रेस का आरोप है कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाने से रोकने के लिए यह सब किया जा रहा है।
हालांकि कोटा के कई छात्रों और अभिभावकों की प्राथमिकता फिलहाल कुछ और है। देश के सबसे बड़े कोचिंग हब माने जाने वाले कोटा में हजारों छात्र NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में उनकी सबसे बड़ी चिंता 21 जून को होने वाली NEET पुनर्परीक्षा और उससे जुड़ी तैयारियां हैं। कई छात्रों का मानना है कि पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों का समय बेहतर हो सकता था।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राहुल गांधी का यह दौरा केवल एक स्थानीय कार्यक्रम नहीं बल्कि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत माना जा रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि शिक्षा, भर्ती और रोजगार जैसे मुद्दों पर युवाओं का समर्थन मिलेगा। वहीं बीजेपी इसे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश बता रही है।
फिलहाल कोटा में राजनीतिक बहस अपने चरम पर है, लेकिन शहर के अधिकांश छात्रों की प्राथमिकता अब भी परीक्षा और करियर ही है। यही वजह है कि सियासी बयानबाजी के बीच कोटा से एक आवाज बार-बार सुनाई दे रही है—“हमें राजनीति नहीं, पढ़ाई पर ध्यान देने दीजिए।”